भगवान के विज्ञान को समझना कठिन है: रत्नेश जी महाराज

Updated at : 13 Feb 2020 4:51 AM (IST)
विज्ञापन
भगवान के विज्ञान को समझना कठिन है: रत्नेश जी महाराज

बक्सर : नगर के श्रीसीताराम विवाह महोत्सव आश्रम नया बाजार में पूज्य मामा जी महाराज की स्मृति में द्धादश वर्षीय श्री प्रिया प्रियतम मिलन महोत्सव में भक्ति की प्रवाह व आध्यात्मिक कार्यक्रमों की बयार अनवरत रूप से बह रही है. बुधवार को चौथे दिन संध्या में मंच से भक्ति का प्रवाह प्रवाहित हुआ जिसमें बड़ी […]

विज्ञापन

बक्सर : नगर के श्रीसीताराम विवाह महोत्सव आश्रम नया बाजार में पूज्य मामा जी महाराज की स्मृति में द्धादश वर्षीय श्री प्रिया प्रियतम मिलन महोत्सव में भक्ति की प्रवाह व आध्यात्मिक कार्यक्रमों की बयार अनवरत रूप से बह रही है. बुधवार को चौथे दिन संध्या में मंच से भक्ति का प्रवाह प्रवाहित हुआ जिसमें बड़ी संख्या में श्रोता भक्ति के भव सागर में गोता लगाये.

कार्यक्रम मंच पर श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रकांड विद्वान आचार्य रत्नेश जी महाराज के मुखारबिंद से भक्ति में श्री कृष्ण कथा की शुरुआत हुई. श्रीप्रिया प्रियतम मिलन महोत्सव से नया बाजार भक्तिमय वातावरण में डूब गया है.

इससे पूर्व लक्ष्मण कीलाधीश पूज्य मैथिली रमण शरण जी महाराज, बसांव पीठाधीश्वर अच्युत प्रपन्नाचार्य जी महाराज, अहिरौली मठ से पूज्य मधुसूदनाचार्य जी महाराज तथा आश्रम के राजा राम शरण जी महाराज, डॉ रामनाथ ओझा एवं अन्य संत समाज द्वारा व्यास पूजन किया गया. जिसके बाद मंच से श्रीमद्भगवत का व्यासपीठ से वाचन की शुरुआत रत्नेश जी महाराज के मुखारविंद से हुआ. उन्होंने बताया की अवतार के बिना भगवान के विज्ञान को समझना कठिन है.

ईश्वर के रूप अनेक है पर स्वरूप एक है. सज्जनों की रक्षा के लिये विविध रूप धारण कर परमात्मा धरती पर अवतरित होते हैं. जिसने हमें पैदा किया, पालन-पोषण तथा जो हमारी रक्षा करता है, उसके प्रति हमें कृतज्ञ होना चाहिए. भागवत के शब्दों में – जो परमात्मा जगत का चरम एवं चेतन करण और सम्पूर्ण विश्व का विधाता है, जो सृष्टि का संचालक है, किन्तु स्वयं अचल है.

जिसने सृष्टि को स्वरूप और सौंदर्य प्रदान किया है. उस परम-पिता परमात्मा की शरणागति से श्रेयस्कर इस संसार में कुछ भी नहीं है. जब भक्त ईश्वर को अपनी आत्मा और अंतःकरण से पुकारता है तो वह सहयोगी बनकर साथ चलने लगते हैं.

जब मनुष्य प्रत्येक वस्तु या प्राणी में ईश्वर को देखता है तो अन्याय, अनीति, अत्याचार और अपमान करने से बचता है. उसमें दया और सद्भाव के गुण आते हैं.

इस प्रकार वह माया-मोह, लोभ, मद और वासना जैसी बुराइयों से मुक्त हो जाता है. दयाहीन व्यक्ति धार्मिक तो क्या इंसान कहलाने लायक नहीं होता. वो जानवर से अधिक क्रूर हो जाता है. दयाहीन व्यक्ति ज्योतिहीन दीपक की तरह है. दीपक जैसे मिट्‌टी का पात्र है, उसी तरह दयाहीन मानव सिर्फ मिट्‌टी का पुतला है. दया के कारण हम शांति से जी रहे हैं. जिस दिन प्राणी के हृदय से दया निकल जाए तो संसार नरक बन जाएगा.

भोज का हुआ आयोजन

पुण्यतिथि के अवसर पर मंदिर परिसर में भोज का आयोजन भी किया गया. इस दौरान ब्राह्मण भोज के बाद सभी को अंगवस्त्र एवं द्रव्य देकर विदाई किया गया. इस दौरान काफी संख्या में लोगों की भीड़ लगी रही.

चरण पादुका का हुआ पूजन

श्रीनारायण दास भक्तमाली उपाख्य मामाजी महाराज की पावन निर्माण तिथि पर विधि विधान के साथ चरण पादुका की पूजन अर्चन किया गया. इसके साथ ही गुरू महाराज को फूल माला अर्पण किया गया. इस दौरान सुबह से ही मंत्रोच्चार के साथ पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान व भक्तिमय हो गया.

इस मौके पर गुरू की महिमा के बारे में कथा वाचक रत्नेश जी महाराज ने कहा गुरू अंतरात्मा को जागृत करता है. दुगुर्णों को दूर करता है. ज्ञान चषु को बिना किसी भेद भाव का खोलता है. ऐसे ही संत हमारे मामा जी हुआ करते थे. जिनमें किसी तरह की न ही घमंड और न ही किसी से कोई भेदभाव था.

गुरू साक्षात परम ब्रह्म होता है इसकी भावना मामाजी में पूरी तरह दिखता था.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन