bhagalpur news. विक्रमशिला सेतु की होगी स्कैनिंग, सामने आयेंगी ढांचे की सभी खामियां

विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद उत्तर और दक्षिण बिहार के कई जिलों में आवागमन और कनेक्टिविटी से जुड़ी परेशानियों को दूर करने की कवायद तेज कर दी गयी है.
विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद उत्तर और दक्षिण बिहार के कई जिलों में आवागमन और कनेक्टिविटी से जुड़ी परेशानियों को दूर करने की कवायद तेज कर दी गयी है. पिछले तीन दिनों से जारी प्रारंभिक निरीक्षण में अब तक सिर्फ बाहरी स्तर पर ही जांच हो सकी है. इसमें यह देखा गया कि सेतु के कौन से हिस्से क्षतिग्रस्त हैं और किन स्थानों पर दबाव या टूट-फूट की स्थिति है. सेतु के अंदरुनी हिस्सों की जांच अब तक संभव नहीं हो पायी है. इसी कारण अब मशीन आधारित तकनीकी जांच की तैयारी की जा रही है. आइआइटी पटना की सिफारिश पर बड़ा निर्णय हेडक्वार्टर से मिली जानकारी के अनुसार आइआइटी पटना की विशेषज्ञ टीम ने सेतु की विस्तृत जांच के लिए मशीन आधारित स्कैनिंग की सलाह दी थी. इस सुझाव पर विभागीय स्तर पर गंभीरता से विचार करते हुए निर्णय ले लिया गया है. आइआइटी, पटना की ही टेक्निकल विंग मशीनरी जांच करेगी. इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति जता दी है, जिसके बाद अब पूरे सेतु की वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ायी जा रही है. यह कदम इसलिए जरूरी है ताकि क्षति की वास्तविक स्थिति सामने आ सके. अत्याधुनिक मशीन से होगा पूरा स्कैन बताया जा रहा है कि अगले तीन दिनों के अंदर आइआइटी पटना की टेक्निकल टीम अत्याधुनिक मशीनरी के साथ विक्रमशिला सेतु पर पहुंचेगी. इस मशीन की मदद से पूरे पुल का बारीकी से स्कैन किया जायेगा. जांच के दौरान यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस स्लैब में किस प्रकार की समस्या है और किन हिस्सों में दरार या कमजोरी आयी है. यह तकनीक पारंपरिक निरीक्षण की तुलना में कहीं अधिक सटीक मानी जा रही है, जिससे अंदरुनी संरचनात्मक स्थिति का पूरा डेटा सामने आ सकेगा. रिपोर्ट के आधार पर बनेगी मरम्मत योजना स्कैनिंग और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद आइआइटी पटना की टीम विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी. इसी रिपोर्ट के आधार पर सेतु के मरम्मत और सुधार की ठोस योजना बनायी जायेगी. अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट में जो भी कमजोरियां सामने आयेंगी, उनके अनुसार प्राथमिकता तय कर मरम्मत कार्य शुरू किया जायेगा. जल्द तय होगा कि सेतु के मरम्मत कार्य का जिम्मेदारी वर्तमान में विक्रमशिला सेतु के रखरखाव और देखरेख की जिम्मेदारी भागलपुर एनएच के पास है. विभाग के स्तर पर समय-समय पर सेतु की सामान्य मरम्मत और निगरानी नहीं होने की वजह से हादसे के तुरंत बाद एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया. लेकिन अब मरम्मत कार्य को लेकर उच्च स्तर पर नयी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. अब यह फैसला लिया जायेगा कि आगे सेतु की मरम्मत का काम किन एजेंसियों या विभागों को सौंपा जायेगा.
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