bhagalpur news. रवींद्रनाथ ठाकुर एशिया में नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय, 1912 में हुआ था भागलपुर आगमन

Published by :ATUL KUMAR
Published at :08 May 2026 12:47 AM (IST)
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bhagalpur news. रवींद्रनाथ ठाकुर एशिया में नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय, 1912 में हुआ था भागलपुर आगमन

कला केंद्र में रवींद्रनाथ ठाकुर की 165वीं जयंती पर पीस सेंटर परिधि की ओर से संवाद का आयोजन हुआ

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कला केंद्र में रवींद्रनाथ ठाकुर की 165वीं जयंती पर पीस सेंटर परिधि की ओर से संवाद का आयोजन हुआ. कला केंद्र में रवींद्रनाथ ठाकुर स्मारक व मंच के सामने सामाजिक संगठनों की गतिविधियां पर संवाद हुआ. इसमें एसएम कॉलेज हिंदी विभाग की इंटर्नशिप कर रही छात्राओं ने हिस्सा लिया. छात्राओं ने कहा कि रवींद्रनाथ ठाकुर एशिया में नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय थे. उनकी कृति गीतांजलि के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था. वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी उदय ने कहा कि रवींद्रनाथ ठाकुर कवि, गीतकार, कहानीकार, उपन्यासकार, चित्रकार और नाटककार थे. उन्होंने लगभग ढाई हजार के करीब गीत लिखे तथा उन गीतों की स्वरलिपि तैयार की, जो रवींद्र संगीत के नाम से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. कलाकेंद्र के प्राचार्य राजीव कुमार सिंह राहुल ने कहा कि रवींद्रनाथ ठाकुर का राष्ट्रवाद बहुभाषा और बहु संस्कृति पर आधारित था. उनके लिखे दो गीत जन गण मन और अमार सोनार बांग्ला क्रमशः भारत और बंगला देश का राष्ट्रगान है. रंगकर्मी निरुपम कांति पाल ने कहा कि रवींद्रनाथ ठाकुर 1912 में भागलपुर आए थे और यहां बंगीय साहित्य परिषद की स्थापना की. रीया कुमारी, रूचि कुमारी, निधि कुमारी, गीतांजलि गुंजन, सृष्टि सुमन, अलका कुमारी आदि ने अपने विचार के साथ-साथ गुरुदेव की कविताओं का पाठ किया. मूर्तिकार संजीव कुमार शर्मा ने टैगोर की प्रतिमा रंगकर्मी निरुपम कांति पॉल को भेंट की. कार्यक्रम में जयप्रकाश कुमार, अभिजीत, स्मिता कुमारी, सार्थक भारत लाडली राज, विजय कुमार शाह, अभिजीत कुमार, स्वाती आदि उपस्थित थे.

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साहित्य सफर की ओर से हुई संगोष्ठी

फोटो नंबर : सिटी

साहित्य सफर संस्था की ओर से चित्रकला सदन, नयाबाजार में कवि रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर संगोष्ठी हुई. अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ संतोष ठाकुर अनमोल ने की. संचालन संस्थापक जगतराम साह कर्णपुरी ने किया. डॉ संतोष ठाकुर अनमोल ने कहा कि कवि रवींद्रनाथ टैगोर सचमुच एक साहित्यिक ऋषि थे. विजय कुमार मंडल, अजय शंकर प्रसाद, प्रेम कुमार प्रिय, मुदित कुमार झा मुदित, नवल किशोर, इंद्रजीत सहाय, दीपक कुमार, अरुण कुमार और राजीव रंजन आदि उपस्थित थे.

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