बेगूसराय में 11 दिवसीय पटना कलम कार्यशाला का समापन, 77 विद्यार्थियों ने सीखी पटना कलम शैली
कार्यक्रम की तस्वीर
Begusarai News : बेगूसराय में 11 दिवसीय पटना कलम कार्यशाला का समापन, 77 छात्र-छात्राओं ने सीखी ऐतिहासिक चित्रकला शैली.
बेगूसराय से विकाश मिश्रा की रिपोर्ट
Begusarai News : कला एवं संस्कृति विभाग,बेगूसराय के तत्वावधान में आयोजित वर्तमान समय में पटना कलम शैली,नव सृजन विषय पर 11 दिवसीय कार्यशाला का समापन बेगूसराय संग्रहालय परिसर में संपन्न हुआ. समापन अवसर पर सामाजिक सुरक्षा कोषांग,बेगूसराय के संयुक्त तत्वावधान में नशा मुक्त भारत सप्ताह अभियान के तहत चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया. कार्यशाला में जिले के कुल 77 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया. प्रतिभागियों ने 18वीं सदी के भारतीय परिवेश को जलरंगों के माध्यम से चित्रित करते हुए पटना कलम शैली की कलात्मक विशेषताओं और तकनीकों का अभ्यास किया.
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पटना कलम को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास
इस दौरान बच्चों ने पटना कलम के इतिहास,उसके विकास और चित्रांकन की बारीकियों का गहन अध्ययन किया. समापन समारोह को संबोधित करते हुए कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्याम कुमार सहनी ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य युवा प्रतिभाओं को पटना कलम शैली की विशिष्टताओं,तकनीकों और उसके समकालीन प्रयोगों से परिचित कराना है. उन्होंने बताया कि कार्यशाला के दौरान नवोदित कलाकारों को जिले के अनुभवी कला विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया. उन्होंने कहा कि नवाचार और सृजनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करते हुए इस महत्वपूर्ण लोक एवं पारंपरिक कला शैली के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया गया,ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सके.
कला और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में सफल पहल
कार्यशाला के समापन अवसर पर कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्याम कुमार सहनी,मुख्य प्रशिक्षक वीरेंद्र नागर,वरिष्ठ चित्रकार इंद्रमोहन प्रसाद तथा मनीष कुमार कौशिक ने सभी प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया. जिला प्रशासन ने विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां न केवल कला एवं संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं,बल्कि समाज में सकारात्मक सोच,रचनात्मकता और जागरूकता के प्रसार में भी सहायक सिद्ध होती हैं. प्रशासन ने विश्वास जताया कि भविष्य में भी इस तरह के आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने और उनकी रचनात्मक प्रतिभा को निखारने का कार्य करते रहेंगे.
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