बांका मंडी में महंगाई की दोहरी मार, रसोई पर भारी दबाव

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 03 Jun 2026 7:49 AM

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सांकेतिक तस्वीर

Banka Mandi: बांका की मंडी में खाद्यान्न और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें लगातार अस्थिर बनी हुई हैं. ट्रांसपोर्ट लागत में भारी बढ़ोतरी और लंबा परिवहन रूट बाजार पर दोहरी मार डाल रहा है, जिससे व्यापारी और उपभोक्ता दोनों परेशान हैं.

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बांका से मदन कुमार की रिपोर्ट.

Banka Mandi: बांका जिले की मंडी में इन दिनों महंगाई और परिवहन संकट का सीधा असर देखने को मिल रहा है. खाद्यान्न से लेकर दैनिक जरूरत की वस्तुओं तक के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ गया है और बाजार में अनिश्चितता का माहौल है.
रिपोर्टर की रिपोर्ट से शुरुआत: बढ़ती लागत ने बिगाड़ा बाजार संतुलन

व्यापारियों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट लागत में वृद्धि और लंबी दूरी के कारण माल ढुलाई महंगी हो गई है. पहले जहां माल पूर्णिया से भागलपुर होकर आसानी से बांका पहुंच जाता था, वहीं अब वैकल्पिक मार्ग से दूरी लगभग दोगुनी हो गई है, जिससे खर्च बढ़ गया है.

मंडी में क्यों बढ़ रहे दाम?

मंडी के कारोबारी बताते हैं कि कीमतों में उछाल का सबसे बड़ा कारण लॉजिस्टिक दबाव और ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतें हैं. पहले विक्रमशिला सेतु के जरिए कम दूरी तय होती थी, लेकिन अब नए मार्ग से ट्रांसपोर्ट 250 किलोमीटर तक बढ़ गया है. इससे थोक और खुदरा दोनों स्तर पर कीमतें प्रभावित हो रही हैं.

दलहन और तेलहन की कीमतों में तेजी बनी हुई है, जबकि गेहूं और मक्का जैसे अनाज में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. बाजार में अस्थिरता का माहौल व्यापारियों की चिंता बढ़ा रहा है.

किन वस्तुओं पर सबसे ज्यादा असर

मंडी भाव के अनुसार चावल, दाल और सरसों तेल में सबसे अधिक तेजी देखी जा रही है. चावल बासमती की कीमतें 12500 से 13500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं. वहीं अरहर दाल और मसूर दाल के दाम भी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं. सब्जी और रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल आलू और प्याज भी महंगे हो गए हैं.

उपभोक्ता और व्यापारी दोनों परेशान

महंगाई का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है. मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए रसोई चलाना मुश्किल होता जा रहा है. वहीं व्यापारी वर्ग भी बढ़ते ट्रांसपोर्ट खर्च से दबाव में है.

बांका मंडी की यह स्थिति सिर्फ स्थानीय समस्या नहीं बल्कि सप्लाई चेन और ईंधन महंगाई का संयुक्त असर है, जो आने वाले दिनों में और चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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