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ग्लव्स विवाद: आखिरकार आईसीसी ने नहीं मानी बात, धौनी को मिला पूरे देश का साथ

Updated at : 08 Jun 2019 8:38 AM (IST)
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ग्लव्स विवाद: आखिरकार आईसीसी ने नहीं मानी बात, धौनी को मिला पूरे देश का साथ

लंदन/मुंबई : आईसीसी ने कड़ा रवैया अपनाते हुए महेंद्र सिंह धौनी को विश्व कप के दौरान कृपाण चिन्ह वाले विकेटकीपिंग दस्ताने पहनने की अनुमति देने से इनकार कर दिया जबकि बीसीसीआई ने दावा किया था कि यह सेना का प्रतीक चिन्ह नहीं है. बीसीसीआई ने इस स्टार खिलाड़ी द्वारा इस चिन्ह को लगाये रखने की […]

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लंदन/मुंबई : आईसीसी ने कड़ा रवैया अपनाते हुए महेंद्र सिंह धौनी को विश्व कप के दौरान कृपाण चिन्ह वाले विकेटकीपिंग दस्ताने पहनने की अनुमति देने से इनकार कर दिया जबकि बीसीसीआई ने दावा किया था कि यह सेना का प्रतीक चिन्ह नहीं है.

बीसीसीआई ने इस स्टार खिलाड़ी द्वारा इस चिन्ह को लगाये रखने की अनुमति मांगी थी लेकिन विश्व संचालन संस्था ने नियमों का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया. आईसीसी ने बयान में कहा कि आईसीसी ने बीसीसीआई को जवाब दिया है कि एमएस धौनी द्वारा पिछले मैच में विकेटकीपिंग दस्तानों पर लगाये गये ‘लोगो’ को आईसीसी पुरूष क्रिकेट विश्व कप 2019 में पहनने की अनुमति नहीं जायेगी.

इसमें कहा गया कि आईसीसी के नियम किसी व्यक्तिगत संदेश या प्रतीक चिन्ह को किसी भी पोशाक या उपकरण पर लगाने की अनुमति नहीं देते. इसके अलावा यह लोगो उस नियम का भी उल्लघंन करता है कि विकेटकीपिंग दस्तानों पर किन किन चीजों को लगाने की अनुमति दी जाती है. भारत के दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शुरुआती मैच के दौरान धौनी के दस्तानों पर कृपाण वाला चिन्ह बना हुआ था जो कि सेना के प्रतीक चिन्ह जैसा लग रहा था. हालांकि विश्व संस्था के नियमों के अनुसार विकेटकीपर के दस्ताने पर केवल एक ही प्रायोजक का ‘लोगो’ लगाने की अनुमति दी जाती है.

धौनी के मामले में वह पहले ही अपने दस्तानों पर एसजी का लोगो पहनते हैं. धौनी प्रादेशिक सेना की पैराशूट रेजिमेंट के मानद लेफ्टिनेंट हैं और यह चिन्ह उनके प्रतीक चिन्ह का हिस्सा है.

प्रशासकों की समिति के प्रमुख विनोद ने कहा था कि यह चिन्ह किसी भी नियम का उल्लघंन नहीं है. राय ने कहा कि आईसीसी के नियमों के अनुसार खिलाड़ी कोई व्यावसायिक, धार्मिक या सेना का लोगो नहीं लगा सकता है. हम सभी जानते हैं कि इस मामले में व्यावसायिक या धार्मिक जैसा कोई मामला नहीं है. उन्होंने कहा कि और यह अर्द्धसैनिक बलों का चिन्ह भी नहीं है और इसलिए धौनी ने आईसीसी के नियमों का उल्लंघन नहीं किया है.

उनका यह बयान आईसीसी के बीसीसीआई से किये उस अनुरोध के बाद आया है जिसमें विश्व में क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था से धौनी को दस्ताने से चिन्ह हटाने के लिये कहने को कहा था. इस संदर्भ में उसने नियमों का हवाला दिया जो खिलाड़ियों को ‘‘राजनीतिक, धार्मिक या जातीय गतिविधियों या किसी उद्देश्य के लिये संदेश का प्रदर्शन करने से रोकते हैं.

सीओए प्रमुख का यह कहना इस पर आधारित था कि अर्द्धसैनिक बल के कृपाण वाले चिन्ह में ‘बलिदान’ शब्द लिखा है जबकि धौनी ने जो लोगो लगा रखा उस पर यह शब्द नहीं लिखा है. धौनी को खेल मंत्री किरण रिजिजू का भी समर्थन मिला था जिन्होंने भी बीसीसीआई से इस मामले को निपटाने का अनुरोध किया था. रिजिजू ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ‘‘यह देश की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है, देश के हित का ध्यान रखा जाना चाहिए. मैं बीसीसीआई से महेंद्र सिंह धौनी के संबंध में सही कदम उठाने का अनुरोध करूंगा.

कई खिलाड़ियों ने भी पूर्व भारतीय कप्तान का समर्थन किया है जिसमें सुरेश रैना और पहलवान योगेश्वर दत्त शामिल हैं.

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