Sugar Daddy : शुगर डैडी रिलेशन का छोटे शहरों में भी बढ़ा चलन, युजवेंद्र चहल ने क्यों कसा तंज

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what is sugar daddy

शुगर डैडी रिलेशनशिप

what is sugar daddy : आपने ये गाना सुना है-मतलबी हैं लोग यहां पर मतलबी जमाना… बेगाना फिल्म के इस गाने में हीरो, कुमार गौरव मतलबी संबंधों की बात कर रहे हैं. आज के समय में जो शब्द ट्रेंड कर रहा है शुगर डैडी, वो इसी तरह के मतलबी संबंधों के बारे में बताता है. शुगर रिलेशनशिप में एक व्यक्ति चाहे स्त्री हो या पुरुष वह अपने फायदे के लिए दूसरे के साथ संबंध बनाते हैं. इस रिश्ते में ना तो उम्र की कोई सीमा होती है और ना ही किसी तरह की कोई अन्य बाधा. बस मर्जी शामिल होती है. क्रिकेटर युजवेंद्र चहल ने इसी तरह के शुगर रिलेशनशिप पर अपनी टीशर्ट के जरिए तंज कसा है.

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What is sugar daddy : क्या है शुगर डैडी? भारतीय सोशल मीडिया में यह सवाल तब तेजी से पूछा जाने लगा और गूगल पर इसके बारे में जानकारी खोजी जाने लगी, जब क्रिकेटर युजवेंद्र चहल अपनी पत्नी से तलाक के मामले में फैमिली कोर्ट पहुंचे. युजवेंद्र चहल ने  उस वक्त जो टीशर्ट पहनी थी, उसपर लिखा था-be your own sugar daddy.

क्या मैसेज देना चाहते थे युजवेंद्र चहल?

दरअसल युजवेंद्र चहल की पत्नी ने तलाक के बाद चहल से 4.75 करोड़ रुपए लिए हैं. समाज में आजकल इस तरह का सोच पनप रहा है कि पत्नियां तलाक के बाद मनमाने तरीके से एलिमनी मांग रही हैं, जो गलत हैं. इस तरह के कई मामले भी सामने आए हैं जिसमें एलिमनी बहुत ज्यादा थी या एलिमनी की वजह से विवाद हुआ. एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा, रितिक रोशन की पत्नी सुजैन खान, हार्दिक पांड्‌या की पत्नी नताशा और अब धनश्री वर्मा का मामला सामने आया है. दरअसल युजवेंद्र अपने टीशर्ट के जरिए यह बताना चाहते हैं कि अगर आप किसी के साथ रिश्ते में नहीं रहना चाहते हैं तो अपनी आर्थिक स्थिति खुद मजबूत करें, दूसरे पर बोझ ना बनें. बेंगलुरु के अतुल सुभाष की आत्महत्या के बाद be your own sugar daddy यानी खुद को अपने पैसों से सशक्त करने की बात खूब उठ रही है.

क्या है शुगर डैडी?

आधुनिक युग में शुगर डैडी का टर्म वैसे रिश्ते के लिए किया जाता है, जिसमें दो लोग किसी भी तरह के फायदे के लिए संबंध बनाते हैं. इस तरह का रिश्ता कोई भी बना सकता है, चाहे वह लड़की हो या लड़का. इस तरह के रिश्ते में शारीरिक संबंध के बदले में पैसे और गिफ्ट की शर्त होती है. हालांकि शुगर डैडी शब्द पहली बार चलन में तब आया था जब 1908 में कैलिफोर्निया के एक शुगर कंपनी के मालिक एडोल्फ स्प्रेकेल्स ने खुद से 24 साल छोटी लड़की से शादी की थी. उसके बाद कहानियों में शुगर डैडी शब्द का प्रयोग पहली बार 1923 में किया गया था. यह कहानी थी Fat Anna’s Future. इस कहानी में यह बताया गया था कि किस तरह एक अमीर आदमी ने एक महिला का सपोर्ट शुगर डैडी बनकर किया. 

कितने तरह के होते हैं शुगर डैडी?

sugar daddy meaning
शुगर-डैडी-रिलेशन

समय के साथ शुगर डैडी शब्द का अर्थ व्यापक हो गया और यह किसी लिंग तक सीमित नहीं रहा, यही वजह है कि अब शुगर डैडी और शुगर माॅम शब्द का प्रयोग होने लगा है. सोशियोलॉजिकल पर्सपेक्टिव्स नामक पत्रिका में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार आधुनिक समय में कई तरह के शुगर संबंध पाए जाते हैं. जो इस प्रकार हैं-

  • शुगर वेश्यावृत्ति
  • शुगर डेटिंग
  • शुगर फ्रेंड 
  • शुगर लव

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भारत में शुगर डैडी रिश्ते का चलन

19 शताब्दी में अमेरिका से शुरू हुआ शुगर डैडी का चलन भारत में कब पहुंच गया, संभवत: यह लोगों को पता भी नहीं चला. संभवत: यह सोशल मीडिया के प्रसार, संस्कृतियों के आदान-प्रदान की वजह से हुआ है. हालांकि यह नहीं कहा जा सकता कि भारत में किसी फायदे के लिए संबंध बनाने की संस्कृति पहले कभी नहीं थी. हां, यह जरूर है कि इस तरह के संबंध कम बनाए जाते थे. लेकिन अब जबकि हम जेन बीटा के दौर में रह रहे हैं, शुगर डैडी कल्चर आम हो चुका है. शुगर डैडी कल्चर मेट्रो सिटी से निकलकर छोटे शहरों तक पहुंच चुका है.

झारखंड में शुगर डैडी कल्चर

नाम प्रकाशित ना करने की शर्त पर एक लड़की जो रांची के लालपुर इलाके में रहती हैं ने बताया कि आजकल के युवाओं में यह चलन आम है. शहर में जितने भी लाउंज और पब हैं, वे इसके सेंटर बन चुके हैं. इनके जरिए शुगर डैडी और शुगर डेटिंग का कल्चर रांची में चल रहा है. उद्देश्य यह है कि लड़के और लड़कियों को लेविश लाइफ स्टाइल चाहिए. इसके लिए या तो वे शुगर पार्टनर के लिए एप और वेबसाइट पर जाते हैं, या फिर इन लाउंज और पब में. मुझे खुद कई बार शुगर रिलेशनशिप के लिए ऑफर मिल चुके हैं.

एमबीए की पढ़ाई कर रहे एक युवक ने बताया कि शुगर रिलेशनशिप में कोई जबरदस्ती नहीं होती है, आप चाहें तो ऑफर एक्सेप्ट करें या फिर ना करें. यह लोगों की च्वाइस है, इसलिए कोई समस्या नहीं होती है. मैंने रांची के लाउंज और पब में यह देखा है कि लड़के ड्रिक ऑफर करते हैं, अगर लड़की ने उसे एक्सेप्ट कर लिया मतलब वो शुगर रिलेशन के लिए तैयार है, इसमें किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है. रांची जैसे शहरों में भी शुगर रिलेशनशिप की स्वीकार्यता यह बता रही है कि हमारा समाज एक बड़े बदलाव के दौर में है.

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क्या है शुगर डैडी?

शुगर डैडी संबंध अपने फायदे के लिए बनाए जाते हैं.

शुगर डैडी संबंध की शुरुआत कहां से हुई?

शुगर डैडी शब्द पहली बार चलन में तब आया था जब 1908 में कैलिफोर्निया के एक शुगर कंपनी के मालिक एडोल्फ स्प्रेकेल्स ने खुद से 24 साल छोटी लड़की से शादी की थी.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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Frequently Asked Questions

शुगर डैडी संबंध अपने फायदे के लिए बनाए जाते हैं.