मुक्त वैश्विक व्यापार के पक्ष में क्वाड देश
Author : अनिल त्रिगुणायत Published by : Rajneesh Anand Updated At : 28 May 2026 11:31 AM
क्वाड देश के विदेशमंत्री
Quad countries : क्वाड के देशों ने यह महसूस किया कि अगर हिंद-प्रशांत में इस तरह की हरकतें होती रहीं, तो भविष्य में बड़ा संकट पैदा हो सकता है. होर्मुज से तो 20 फीसदी ही व्यापार होता है, जबकि विश्व व्यापार का 60 फीसदी हिंद-प्रशांत क्षेत्र से होकर गुजरता है.
Quad countries : वैश्विक सप्लाई चेन्स, ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स वगैरह की आपूर्ति में आयी रुकावट की पृष्ठभूमि में क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक बेहद महत्वपूर्ण रही. इस बैठक को एक्शन-ओरिएंटेड किया गया कि किस तरह से हिंद-प्रशांत मुक्त और अबाध हो. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर देने का सारे क्षेत्र पर फर्क पड़ा है. पूरा सप्लाई चेन बाधित हुआ है. फर्टिलाइजर से लेकर हीलियम और कितनी ही और चीजों की आवाजाही रुक गयी है, जिससे आर्थिक सुस्ती जैसी स्थिति है.
क्वाड के देशों ने यह महसूस किया कि अगर हिंद-प्रशांत में इस तरह की हरकतें होती रहीं, तो भविष्य में बड़ा संकट पैदा हो सकता है. होर्मुज से तो 20 फीसदी ही व्यापार होता है, जबकि विश्व व्यापार का 60 फीसदी हिंद-प्रशांत क्षेत्र से होकर गुजरता है. इसी से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अगर वहां पर बाधा खड़ी कर दी जाती है, तो कितना नुकसान हो सकता है. इस बैठक में भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्री शामिल हुए.
क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री निगरानी, ऊर्जा सुरक्षा तथा क्रिटिकल मिनरल्स के उत्खनन, शोधन तथा आपूर्ति शृंखला को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिये गये. बैठक में तीन पहल की गयी. क्वाड साझेदारों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्वाड देशों की समुद्री निगरानी का लाभ उठाने के लिए पहली बार हिंद-प्रशांत क्षेत्र समुद्री निगरानी गठजोड़ पहल शुरू की है. इसका उद्देश्य सूचना साझा करना और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता क्षमता बढ़ाना है, जिसमें शुरुआती ध्यान हिंद महासागर क्षेत्र पर केंद्रित होगा. दूसरी पहल है, क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव फ्रेमवर्क की घोषणा. यह फ्रेमवर्क क्वाड देशों को आर्थिक नीति के साधनों का लाभ उठाने और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने के लिए निवेश में तालमेल बिठाने में मदद करेगा. इसको कैसे सोर्स करेंगे, कैसे उसमें वैल्यू क्रिएशन करेंगे, कैसे प्रोसेसिंग होगी, इन सारी चीजों पर विचार-विमर्श हुआ है.
तीसरी पहल के तहत क्वाड देशों ने हिंद-प्रशांत ऊर्जा सुरक्षा पर क्वाड पहल की घोषणा की, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय ऊर्जा क्षमता को मजबूत करने में मदद करना है. क्वाड देशों ने वाणिज्यिक जहाजों पर होने वाले हमलों की कड़ी निंदा की और नौवहन की स्वतंत्रता तथा निर्बाध वैश्विक व्यापार की बात कही. सबको पता है कि नौवहन की स्वतंत्रता और आर्थिक सुरक्षा सबके लिए बहुत महत्वपूर्ण है. समुद्री रास्ते में आवाजाही अगर रुकती है, तो उसका क्या असर होता है, यह दुनिया ने अस्सी दिनों में देख लिया है. समुद्री परिवहन बाधित होने से दुनियाभर में ईंधन, भोजन और उर्वरक की सुरक्षा खतरे में पड़ती है. क्वाड ने पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए फिजी के साथ काम करने की घोषणा की, तो डिजिटल कनेक्टिविटी और सुरक्षा में सुधार के लिए प्रशांत द्वीप देशों में अंडर सी केबल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए अपना समर्थन दोहराया.
भारत और अमेरिका ने भी क्रिटिकल और रेयर अर्थ सप्लाई फ्रेमवर्क के तहत अलग से एक समझौते पर दस्तखत किया है. विदेश मंत्री जयशंकर ने इस समझौते को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह समझौता सुदृढ़ और विविधतापूर्ण आपूर्ति शृंखला को मजबूत करेगा, साथ ही, हमें सहयोग करने, वित्तपोषण जुटाने और महत्वपूर्ण व दुर्लभ खनिजों के प्रभावी प्रबंधन में मदद करेगा. जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना था कि हमारे रणनीतिक हित इसमें हैं कि हमें जरूरी खनिजों और आपूर्ति शृंखला तक भरोसेमंद और लंबे समय तक पहुंच मिलती रहे. इस समझौते की नींव विगत फरवरी में रखी गयी थी, जब विदेश मंत्री जयशंकर वाशिंगटन में आयोजित ‘क्रिटिकल मिनरल्स फोरम’ में शामिल हुए थे. उसके बाद इसने और तेजी तब पकड़ी, जब भारत ने ‘पैक्स सिलिका’ पर दस्तखत किये. जाहिर है, क्वाड की बैठक में ईरान के अलावा चीन भी निशाने पर रहा. लेकिन चीन का किसी ने भी नाम नहीं लिया. हालांकि बैठक में साउथ चाइना सी, ईस्ट चाइना सी पर बात हुई. और इस पर तो कोई शक ही नहीं है कि हिंद-प्रशांत में चीन का जो रवैया है, उसको लेकर क्वाड के अंदर चिंता तो है ही.
दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि बैठक में नॉर्थ कोरिया के बारे में बहुत खुलकर बोला गया है, क्योंकि उसके आक्रामक रवैये और मिसाइल हमले की धमकी चिंताजनक है. और ऐसा लगता है कि जापान ने इसे गंभीरता से लिया है. लेकिन सारे देशों के चीन के साथ संबंध इस वक्त काफी हद तक सुधरे हैं. चाहे वह अमेरिका हो, भारत हो, जापान हो या ऑस्ट्रेलिया हो. चीन के रवैये पर सबको शक है, सबको परेशानी है, कुछ-न-कुछ शिकायतें भी हैं. इसके बावजूद ये सारे देश चीन से संबंध सुधारने की कोशिश भी कर रहे हैं. खुद चीन भी इन देशों के साथ अपने रिश्ते बेहतर कर रहा है. तो तकरार की जगह समझने-समझाने का जो अप्रोच है, उसकी कोशिश हो रही है. अभी-अभी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन का दौरा किया है. उस दौरान उन्होंने चीन की तारीफ की. ऐसे में, क्वाड की बैठक में भला कौन-सा देश चीन के खिलाफ खुलेआम बोलता?
क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक की सफलता का एक और पैमाना यह है कि ब्रिक्स की बैठक के विपरीत, इसमें साझा बयान जारी किया गया है, जो काफी विस्तृत है. ब्रिक्स की बैठक में समस्या यह थी कि यूएइ और ईरान, दोनों एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे देश थे, लिहाजा आपसी सहमति बनना कठिन था. क्वाड में ऐसी कोई बात नहीं है. इसमें किसी की किसी से लड़ाई नहीं है.
कुल मिलाकर, क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक सफल रही. बल्कि यह कहा जाना चाहिए कि इस बैठक के जरिये क्वाड जैसे संगठन की प्रासंगिकता फिर से साबित हुई है. अभी तक यह चल रहा था कि ट्रंप रुचि नहीं दिखा रहे हैं. लेकिन बात उससे आगे बढ़ी है. जहां तक क्वाड के शिखर बैठक की बात है, तो वह टाइम शेड्यूलिंग पर निर्भर करेगा कि उसका आयोजन भारत की अध्यक्षता में हो पाता है या नहीं. शिखर बैठक का आयोजन अमेरिकी राष्ट्रपति पर भी बहुत हद तक निर्भर करेगा. देखने वाली बात यह है कि भारत के पास ब्रिक्स की भी अध्यक्षता है और हमने दोनों संगठनों को कुशलता से संभाल रखा है. आगामी सितंबर में ब्रिक्स के शिखर बैठक में शी जिनपिंग और पुतिन जैसे बड़े नेता आ रहे हैं. कुल मिलाकर, क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक का सफल आयोजन कर भारत ने अपनी क्षमता दिखायी है. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)
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