Gaganyaan Mission: इसरो का बड़ा कारनामा, पहला एयर-ड्रॉप परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा, अंतरिक्ष में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी

Published by : Pritish Sahay Updated At : 24 Aug 2025 10:57 PM

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Gaganyaan Mission: अंतरिक्ष में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी

Gaganyaan Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने आगामी गगनयान मिशन के लिए पहला एयर ड्रॉप परीक्षण सफलता पूर्वक पूरा कर लिया है. एयर ड्रॉप पैराशूट आधारित गति धीमी करने की प्रणाली है. इसे परखने के लिए रविवार को इसरो ने इसका परीक्षण किया. यह परीक्षण आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा के निकट किया गया. यह अभ्यास इसरो, भारतीय वायु सेना, डीआरडीओ, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक की ओर से संयुक्त रूप से किया गया.  भारत अलगे 15 सालों में अंतरिक्ष में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है.

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Gaganyaan Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गगनयान मिशन की तैयारी में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। 24 अगस्त 2025 को ISRO ने पहला एकीकृत एयर-ड्रॉप परीक्षण (IADT-01) सफलतापूर्वक पूरा किया, जो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए पैराशूट-आधारित मंदन प्रणाली का प्रदर्शन था। यह परीक्षण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में किया गया, जिसमें ISRO, भारतीय वायु सेना, DRDO, नौसेना और तटरक्षक बल ने संयुक्त रूप से कार्य किया. गगनयान मिशन में पृथ्वी की 400 किलोमीटर पर स्थित निचली कक्षा में अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा. इसके बाद पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी भी कराई जाएगी.

अंतरिक्ष में भेजकर उन्हें वापस धरती पर लाने का मिशन है गगनयान परियोजना

गगनयान परियोजना का मकसद भारत की यह क्षमता प्रदर्शित करना है कि वह मनुष्यों को अंतरिक्ष में भेजकर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस ला सकता है. देश के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन के रूप में योजनाबद्ध यह परियोजना, चालक दल की सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रणालियों की जांच के लिए पूर्ववर्ती मानवरहित मिशनों को भी शामिल करेगी. पैराशूट-आधारित गति धीमी करने की प्रणाली धरती पर लौटने और लैंडिंग के दौरान चालक दल के मॉड्यूल की सुरक्षित रूप से वापसी सुनिश्चित करने का एक खास हिस्सा है. दिसंबर 2025 में भारत अंतरिक्ष में मानव रहित मिशन लॉन्च करने पर की तैयारी कर रहा है. जिसमें रोबोट व्योम शामिल है.  मिशन के अधिकांश परीक्षण पहले ही पूरे हो चुके हैं. अगर सब कुछ ठीक रहता है तो भारत अंतरिक्ष में मानव भेजने वाला चौथा देश बन जाएगा.

सफल रहा परीक्षण

परीक्षण के दौरान एक क्रू कैप्सूल को हेलीकॉप्टर से हवा में छोड़ा गया और पैराशूट प्रणाली के माध्यम से उसका सुरक्षित अवतरण सुनिश्चित किया गया. इस प्रणाली में दो ड्रॉग पैराशूट और तीन मुख्य पैराशूट शामिल थे, जो क्रू मॉड्यूल को समुद्र में सुरक्षित रूप से उतारने में सफल रहे. यह कदम गगनयान मिशन के लिए काफी अहम है. इसरो ने बताया कि यह परीक्षण गगनयान कैप्सूल की डीसेलेरेशन प्रणाली की विश्वसनीयता को साबित करता है.  इसरो ने पहले सात एयर-ड्रॉप परीक्षणों की योजना बनाई थी, लेकिन अंतिम संख्या परिणामों पर निर्भर करेगी.

अंतरिक्ष में लंबी छलांग लगाने की तैयारी में भारत

भारत आने वाले समय में अंतरिक्ष में लंबी छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है.  गगनयान-1 के बाद भारत 2027 में पहला मानवयुक्त गगनयान मिशन लॉन्च करेगा. इसके बाद 2028 में चंद्रयान-4, फिर शुक्र ग्रह मिशन, और 2035 तक भारत का अपना भारत अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की तैयारी कर रहा है.  केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि अगले 15 वर्षों में भारत 100 से अधिक उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की योजना बना रहा है. उन्होंने कहा कि ये उपग्रह सरकारी प्रौद्योगिकी अभियानों और निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले परिचालन मिशनों के तहत प्रक्षेपित किए जाएंगे.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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