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कर्नाटक चुनाव : अमित शाह क्या मैसूर में तोड़ पायेंगे सिद्धरमैया का वर्चस्व?

Updated at : 30 Mar 2018 4:54 PM (IST)
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कर्नाटक चुनाव : अमित शाह क्या मैसूर में तोड़ पायेंगे सिद्धरमैया का वर्चस्व?

बेंगलुरु : भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने आज से कर्नाटक के ओल्ड मैसूरक्षेत्र की दो दिन की यात्रा की शुरुआत की है. इस यात्रा की शुरुआत कर उन्होंने राज्य में भाजपा के लिए औपचारिक रूप से चुनाव अभियान की शुरुआत कर दी. इन दो दिनों में अमित शाह मैसूर, मांड्या और चामराजनगरजिलों […]

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बेंगलुरु : भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने आज से कर्नाटक के ओल्ड मैसूरक्षेत्र की दो दिन की यात्रा की शुरुआत की है. इस यात्रा की शुरुआत कर उन्होंने राज्य में भाजपा के लिए औपचारिक रूप से चुनाव अभियान की शुरुआत कर दी. इन दो दिनों में अमित शाह मैसूर, मांड्या और चामराजनगरजिलों कादौरा कर रहे हैं. अमित शाह ने इस यात्रा की शुरुआतहीअपने चुनावीपंच लाइन केसाथ की कि हमभाजपा एवं आरएसएसकार्यकर्ताओं के हत्यारोंको पाताल से भी ढूंढ निकालेंगे.राजनीति में ऐसे बयान कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के काम आते हैं और वे कई गुणा अधिक ऊर्जा के साथ अपने काम में लग जाते हैं. सो, खुद के लिए सबसे कठिन इलाके में चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए अमित शाह ने सोच-समझ कर यह बयान दिया है.

224 सीट वाली कर्नाटक विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती मैसूर इलाका ही है, जहां भाजपा पिछले चुनाव में एक भी सीट जीत नहीं सकी थी औरविधानसभा में उसका आंकड़ा 40 तक सीमित रह गया था और इतनी ही सीटें जेडीएस ने भी हासिल किया था.

ओल्ड मैसूरइलाका कांग्रेस नेता व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया का गढ़ है. चुनावी नजर से यह राज्य का सबसे बड़ा क्षेत्र है, जहां 70 विधानसभा सीटें हैं. सिद्धरमैया यहां के चामुण्डेश्वरी विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं और कल ही उन्होंने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत की है. 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस इस इलाके में 40 सीटें जी पायी थी, जबकि 2008 में उसने यहां से 40 सीटें जीती थीं. वहीं, एचडी देवेगौड़ा की पार्टी जनता दल सेक्यूलर ने पिछले चुनाव में इस इलाके में सीटों का इजाफा करते हुए उसे 18 से 30कर दिया था.भाजपा यहां बिल्कुल खाली हाथ रह गयी थी.

अमित शाह एक मंझे हुए नेता व चुनाव प्रबंधक हैं. उन्होंने उत्तरप्रदेश में सपा-भाजपा की तुलनामें हाशिये पर खड़ीभाजपा को सबसे बड़ी राजनीतिक ताकतबना दिया.इसलिएजाहिरहैकि कर्नाटक विधानसभा में भगवा परचम लहराने के लिए वे इस क्षेत्र पर विशेष रूप से जोर लगायेंगेे. उन्होंने इसक संकेत इसी क्षेत्र से चुनाव अभियान की शुरुआत कर दे दिया.


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पिछली बार कर्नाटक के अन्य क्षेत्र में कैसा था चुनावी प्रदर्शन?

बेंगलुरु क्षेत्र : बेंगलुरु अरबन एरिया की 28 में 13 सीटें कांग्रेस ने, भाजपा ने 12 सीटें हासिल की थी. जबकि इससे पहले के चुनाव में भाजपा ने यहां 17 सीटें पायी थीं.


मुंबई कर्नाटक क्षेत्र :
कांग्रेस ने इस इलाके की 56 में 34 सीटें हासिल की थी. भाजपा ने 14 सीटें पायी थीं. 2008 में भाजपा ने यहां 38 सीटें हासिल की थी.

सेंट्रल कर्नाटक : सेंट्रल कर्नाटक में कांग्रेस ने पिछली बार 32 में 18 सीटें हासिल की थी. जेडीएस ने पांच और भाजपा मात्र दो सीटें हासिल कर पायी थी.

हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र :आंध्रसेसटे इस इलाके में कांग्रेस ने पिछली बार 19 सीटें हासिल की थी, जेडीएस ने चार व बीएस येदियुरप्पा की केजेपी ने मात्र तीन सीटें जीती थीं.

ध्यान नहे कि बीएस येदियुरप्पा नाराजगी वश भाजपा छोड़ दी थी और अपनी पार्टी केजेपी का गठन कर चुनाव लड़ा था. अब वे भाजपा के राज्य में मुख्यमंत्री के चेहरा हैं.

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