Ramgarh: संघर्ष से स्वावलंबन तक, रचिता कुमारी बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा

Updated:
विज्ञापन
Ramgarh News

अपने राशन दुकान एवं डेयरी व्यवसाय के साथ रचिता कुमारी

Ramgarh: रामगढ़ की रचिता कुमारी ने संघर्षों के बीच आत्मनिर्भर बनकर नई पहचान बनाई है. उनकी सफलता की कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है.

विज्ञापन

रामगढ़ से भागीरथ महतो की रिपोर्ट
Ramgarh: रामगढ़ प्रखंड अंतर्गत कुंदरू कलां पंचायत के सरैया गांव की रहने वाली रचिता कुमारी ने संघर्ष और अभावों से निकलकर आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है. कभी आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ से जूझने वाला उनका परिवार आज स्वरोजगार के जरिए बेहतर जीवन जी रहा है. रचिता कुमारी का जीवन वर्ष 2018 में बदलना शुरू हुआ, जब झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के मार्गदर्शन में गांव में महिलाओं को सखी मंडल से जोड़ने का अभियान चलाया गया.

इसके बाद उन्होंने 13 मार्च 2018 को गठित ‘गणेश आजीविका सखी मंडल’ की सदस्यता ली. समूह की नियमित बैठकों एवं प्रशिक्षण के माध्यम से उन्होंने बचत, वित्तीय साक्षरता और स्वरोजगार के बारे में जानकारी हासिल की.

सखी मंडल से मिला आत्मनिर्भर बनने का हौसला

रचिता ने समूह से जुड़ने के बाद अपनी आय बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए. उन्होंने समूह के सहयोग से दो लाख रुपये का मुद्रा लोन लेकर गांव में राशन दुकान खोली. इसके बाद कैश क्रेडिट लिंकेज (CCL) के तहत 55 हजार रुपये का ऋण लेकर दो गाय खरीदी और डेयरी व्यवसाय शुरू किया.

वर्तमान में उन्हें डेयरी से प्रतिदिन लगभग चार लीटर दूध प्राप्त होता है, जिसे वह गांव में 60 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचती हैं. इसके अलावा बचे हुए दूध से पनीर बनाकर भी बिक्री करती हैं. राशन दुकान और डेयरी व्यवसाय से उन्हें लगभग 10 हजार रुपये मासिक आय हो रही है. उनकी वार्षिक आय अब करीब डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच गयी है.

अब बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च आसानी से चल रहा

रचिता बताती हैं कि पहले परिवार को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भी परेशानी होती थी, लेकिन अब घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं. उन्होंने समय पर पूरा ऋण भी चुका दिया है. रचिता कुमारी ने कहा कि सखी मंडल ने उन्हें सिर्फ आर्थिक सहयोग ही नहीं दिया, बल्कि आत्मविश्वास और समाज में सम्मान के साथ जीने का हौसला भी दिया. आज वह खुद को आत्मनिर्भर महिला मानती हैं और उनकी सफलता की कहानी क्षेत्र की अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी प्रेरित कर रही है.

ये भी पढ़ें…

Ramgarh: महंगाई की मार में पिस रहे किसान, दाम गिरने के बाद खेतों में ही जोत दी तैयार फसल

रामगढ़: गोलीकांड में इस्तेमाल कार जब्त, मुख्य आरोपी की तलाश तेज

विज्ञापन
अमलेश नंदन सिन्हा

लेखक के बारे में

By अमलेश नंदन सिन्हा

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola