Main Vaapas Aaunga Movie :इम्तियाज अली ने कहा मकान कितने भी खरीद लूं घर हमेशा रहेगा जमशेदपुर

Published by : Urmila Kori Updated At : 12 Jun 2026 7:06 PM

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मैं वापस आउंगा पर इम्तियाज अली, फोटो- इंस्टाग्राम

निर्माता निर्देशक इम्तियाज अली ने इस इंटरव्यू में अपनी आज रिलीज हुई फिल्म 'मैं वापस आऊंगा को लेकर बातचीत की है

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main vaapas aaunga movie : साल 2020 में रिलीज हुई ‘लव आज कल 2’के छह साल लंबे अंतराल के बाद निर्देशक इम्तियाज अली एक बार फिर प्रेम कहानी ‘मैं वापस आऊंगा’के साथ सिनेमाघरों में वापसी की है. विभाजन के दौर की पृष्ठभूमि पर आधारित यह फिल्म प्रेम के साथ साथ विस्थापन के दर्द को भी खुद में समेटे है. फिल्म की मेकिंग से जुड़े अपने अनुभवों और करियर के विभिन्न पहलुओं पर इम्तियाज अली की उर्मिला कोरी के साथ हुई बातचीत

इसलिए रखा फिल्म का नाम ‘मैं वापस आऊंगा’

मेरी फिल्म ‘चमकीला’ जब रिलीज हुई और लोगों ने उसे पसंद किया, तो उसके बाद कई आर्टिकल्स आये, जिनमें लिखा था, ‘रिटर्न ऑफ इम्तियाज अली’. उन आर्टिकल्स को देखकर मुझे कॉल आया और कहा गया, ‘तुम गये कहां थे, जो ये लोग तुम्हारा कमबैक करवा रहे हैं?’ वैसे उन्होंने मुझे यह सब पढ़कर बुरा नहीं, बल्कि अच्छा महसूस करने के लिए कहा था. खैर, मैंने फिल्म का नाम उस वजह से नहीं रखा है. मैं इसे अपना कमबैक नहीं मानता. दरअसल, फिल्म की जो कहानी है, वह वापस लौटने की कहानी है. मुझे लगता है कि दुनिया में हर वह इंसान, जिसका कुछ न कुछ पीछे छूट गया है, उसे फिर से पाना चाहता है. कुछ लोग वापस जा पाते हैं, कुछ नहीं जा पाते, लेकिन हर आदमी कभी न कभी ऐसा जरूर सोचता है.

किताबों से नहीं, विभाजन के गवाहों से की इस फिल्म की रिसर्च

विभाजन के दौर की इस कहानी के रिसर्च पहलुओं पर बात करूं, तो आमतौर पर किताबों, आर्टिकल्स, वीडियो फुटेज या इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री को देखकर रिसर्च की जाती है, पर वह सेकेंड-हैंड रिसर्च होती है. इस फिल्म के लिए मैंने फर्स्ट-हैंड रिसर्च किया है. जो कुछ लोग विभाजन के दौर के बचे हुए हैं, मैं उनसे निजी तौर पर मिला हूं. पंजाब में ‘चमकीला’ की शूटिंग के दौरान मैं कई लोगों से मिला था और उनकी कई कहानियां सुनी थीं. मैं बंगाल भी गया था. वहां भी ऐसे कई लोगों से मिला, जिनकी याददाश्त लगभग जा चुकी है. उनकी स्मृतियों में सिर्फ वही घर, आसपास के लोग और वे चीजें बची हैं, जिन्हें वे पीछे छोड़ आये थे. मैं एक महिला से मिला था, जिसे कुछ भी याद नहीं था, बस अपनी गुड़िया याद थी. उसे सिर्फ यह जानना था कि जब उनका परिवार अपना घर छोड़कर ट्रेन से भारत आया था, तब उसकी वह गुड़िया उसके साथ आयी थी या नहीं. मेरी यह फिल्म उन सभी लोगों की कहानी है. विभाजन को अपनी आंखों से देख चुके अब बहुत कम लोग बचे हैं. मैं अपनी यह फिल्म उन्हीं लोगों को समर्पित करता हूं.

जमशेदपुर का वह कंपनी क्वार्टर आज भी मेरे दिल में बसा है

हर किसी की जिंदगी में कुछ न कुछ पीछे छूट ही जाता है. मेरी जिंदगी में भी बहुत कुछ पीछे छूट गया है, जिसके पास लौटने की तलब मुझे हमेशा रही है. मुझे लगता है कि बचपन ऐसी चीज है, जिसमें हर कोई वापस जाना चाहता है. मेरा एक घर है, जो बार-बार मेरे ख्वाबों में आता है. जमशेदपुर का वह किराये का घर, जो एक कंपनी क्वार्टर था, वहीं मैं बड़ा हुआ हूं. मेरे लिए वही मेरा असली घर है. मैं जिंदगी में कितने भी मकान खरीद लूं, लेकिन घर उसी को मानूंगा. मैं बीच में वहां गया भी हूं, लेकिन शायद मैं वह नहीं रहा, जो अपने बचपन में था. मेरे भीतर जो मासूमियत थी, जो इनोसेंस था, मैं उसी को सबसे ज्यादा मिस करता हूं.

दर्शकों का अटेंशन खींचना होगा

ये बातें अक्सर सुनने को मिल रही है कि इंडस्ट्री में बदलाव आया है. अब यहां हिंसा वाली फिल्मों को प्रमुखता दी जा रही है. मुझे लगता है कि कोविड ने बहुत कुछ बदला है. इंसानियत में बदलाव आया तो इंडस्ट्री क्या है? दर्शकों का अटेंशन खींचने की जरूरत थी. हिंसा और कॉमेडी से यह आसानी से हो जाता है, लेकिन लव स्टोरी के साथ ये आसान नहीं होता है. मगर मैं अपनी कोशिश जारी रखूंगा. मेरी फिल्मों के साथ दिक्कत ये है कि वह समय से आगे की कहकर उस वक्त दर्शक नहीं देखते हैं. बाद में वह बहुत पसंद की जाने लगती हैं. ‘सोचा ना था’ और ‘रॉकस्टार’ के साथ यही हुआ था. ‘मैं वापस आऊंगा’ के साथ मैं चाहता हूं कि वह दर्शकों को अभी ही पसंद आये.

नसीर साहब पहली बार पंजाबी भूमिका में

नसीर साहब लेजेंडरी एक्टर हैं. उन्होंने कमाल की फिल्में की हैं, लेकिन यह पहला मौका होगा, जब वह पंजाबी भूमिका में होंगे. पगड़ी पहने हुए वह बहुत ही प्यारे लगे हैं, लेकिन इस फिल्म में सबसे मुश्किल उनका ही किरदार है, जिसे उन्होंने बहुत ही शिद्दत से निभाया है.

एक्टिंग नहीं, डायरेक्शन को एंजॉय करता हूं

अनुराग कश्यप की फिल्म‘ब्लैक फ्राइडे’के बाद मैं अनुराग बासु की फिल्म ‘मेट्रो इन दिनों’में नजर आया था. दोनों ही मेरे करीबी हैं. उनके कहने से ही मैंने एक्टिंग की है. थिएटर में मैंने एक्टिंग की है, लेकिन मुंबई आने के बाद मैंने पाया कि मैं डायरेक्शन को ही एंजॉय करता हूं, तो मेरा फोकस उसी पर होता है.

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Urmila Kori

लेखक के बारे में

By Urmila Kori

I am an entertainment lifestyle journalist working for Prabhat Khabar for the last 14 years. Covering from live events to film press shows to taking interviews of celebrities and many more has been my forte. I am also doing a lot of feature-based stories on the industry on the basis of expert opinions from the insiders of the industry.

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