बोले शाहरुख खान- अपनी यादों को संजोना मुझे देता है सुकून
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Jul 2019 9:28 AM
मुंबई : जब भी शूटिंग से कुछ दिनों की फुर्सत होती है और बच्चे अपने स्कूल या दूसरे कामों में जुटे होते हैं, तो मैं घर के उन हिस्सों की साफ-सफाई में जुट जाता हूं, जहां मेरे जीवन की बेहतरीन यादें सहेजी हैं. अपने वॉर्डरोब, अलमारी, लाइब्रेरी को री-अरेंज करता हूं. इन हिस्सों में मेरी […]
मुंबई : जब भी शूटिंग से कुछ दिनों की फुर्सत होती है और बच्चे अपने स्कूल या दूसरे कामों में जुटे होते हैं, तो मैं घर के उन हिस्सों की साफ-सफाई में जुट जाता हूं, जहां मेरे जीवन की बेहतरीन यादें सहेजी हैं. अपने वॉर्डरोब, अलमारी, लाइब्रेरी को री-अरेंज करता हूं. इन हिस्सों में मेरी हर फिल्म से जुड़ी कोई खास चीज मिल जायेगी. कई फिल्मों की एक से ज्यादा चीजें हैं, जिसकी वजह से चीजें इधर-उधर हो जाती हैं. इसलिए मैंने तय किया है कि किसी फिल्म की एक याद को संजो कर रखूंगा. ऐसा करना मेरे दिल को सुकून देता है.
जैसे- ‘कभी हां कभी ना’ और ‘दिलवाले दुल्हनिया…’ की टोपी है, ‘जोश’ की जैकेट है, ‘ओम शांति ओम’ का गोल्डन ड्रेस है. कुल मिला कर हर फिल्म की यादें हैं. जब कभी लीजेंड बनूंगा, तो लोगों को ये चीजें दिखाऊंगा. अब भी कभी-कभी अपने घर के तमाम स्टाफ को इकठ्ठा कर लेता हूं और कहता हूं कि चलो आज घर के उस हिस्से की सफाई करते हैं. इससे वे सब भी बहुत परेशान हो जाते हैं.
अंतत: ये चीजें तब तक बिखरी रहती हैं जब तक मैं फिर से खुद रिलैक्स होकर सफाई वाले मोड में नहीं आ जाता. जिस तरह फैमिली के लिए मैं समय निकालता हूं, पढ़ने के लिए भी निकालता हूं, उसी तरह सफाई के लिए भी समय निकालता हूं. मेरे घर में एक बड़ी लाइब्रेरी भी है. बच्चों को बताता हूं कि किताबें आपको बेहतरीन इंसान बनाती हैं.
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