Haunted 3D: Echoes Of The Past Review: हॉरर के साथ इमोशन्स का तड़का, महाक्षय चक्रवर्ती का शानदार अभिनय

हॉन्टेड 3D: ईकोज ऑफ द पास्ट, फोटो- इंस्टाग्राम
हॉन्टेड 3D: ईकोज ऑफ द पास्ट डर, रहस्य और इमोशन का संतुलित मिश्रण है. शुरुआत थोड़ी धीमी है, लेकिन बाद में कहानी रोचक हो जाती है. हॉरर के साथ भावनात्मक कहानी पसंद करने वालों को यह फिल्म पसंद आ सकती है.
- निर्देशक: विक्रम भट्ट, मनीष पी. चव्हाण
- कलाकार: महाक्षय चक्रवर्ती, चेतना पांडे, गौरव बाजपेयी, हेमंत पांडे, श्रुति प्रकाश, प्रनीत भट्ट, मनवीर चौधरी
- अवधि: 2 घंटे 20 मिनट
- रेटिंग: 3.5/5
- प्लेटफॉर्म: सिनेमाघर
हॉरर फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले विक्रम भट्ट एक बार फिर हॉन्टेड 3D: ईकोज ऑफ द पास्ट लेकर आए हैं. यह फिल्म सिर्फ डराने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि प्यार, बिछड़न, रहस्य और भावनाओं को भी कहानी का अहम हिस्सा बनाती है. यही वजह है कि यह फिल्म हॉरर के साथ-साथ इमोशनल ड्रामा पसंद करने वाले दर्शकों को भी आकर्षित कर सकती है.
डर और इमोशन का दिलचस्प मेल
फिल्म की कहानी देव के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार महाअक्षय चक्रवर्ती ने निभाया है. अपने अतीत की यादों और दर्द से दूर भागते हुए वह एक पुरानी हवेली में पहुंचता है, लेकिन यह जगह सामान्य नहीं है. हवेली में होने वाली रहस्यमयी घटनाएं उसे ऐसे राजों से रूबरू कराती हैं, जिनका संबंध उसकी जिंदगी और उसकी पुरानी मोहब्बत सुनहरी से जुड़ा होता है। जैसे-जैसे सच सामने आता है, कहानी और भी रोमांचक होती जाती है.
निर्देशन है कमाल
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका डरावना माहौल है. निर्देशक ने केवल अचानक आने वाले डरावने सीन पर भरोसा नहीं किया, बल्कि पूरी फिल्म में एक रहस्य और बेचैनी का एहसास बनाए रखा है. हवेली के सुनसान कमरे, अंधेरे रास्ते और रहस्यमयी लोकेशन कहानी को और प्रभावशाली बनाते हैं.
कलाकारों का अभिनय है बेहतरीन
महाअक्षय चक्रवर्ती ने अपने किरदार की भावनाओं को अच्छी तरह पर्दे पर उतारा है. उनके अभिनय में दर्द, डर और संघर्ष साफ नजर आता है. वहीं चेतना पांडे भी अपनी भूमिका में प्रभाव छोड़ती हैं. उनका किरदार सिर्फ प्रेम कहानी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी कहानी को भावनात्मक गहराई देता है. दोनों कलाकारों की स्क्रीन प्रेजेंस और केमिस्ट्री फिल्म को मजबूती देती है. सहायक कलाकारों ने भी अपने हिस्से का काम ईमानदारी से निभाया है.
जबरदस्त है तकनीकी पक्ष
तकनीकी तौर पर फिल्म अच्छी दिखाई देती है. सिनेमैटोग्राफी कई दृश्यों को आकर्षक और डरावना दोनों बनाती है. बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के तनाव को बढ़ाने में मदद करता है. विजुअल इफेक्ट्स का इस्तेमाल भी संतुलित तरीके से किया गया है, जिससे फिल्म ज्यादा बनावटी नहीं लगती. वहीं, फिल्म की शुरुआत थोड़ी धीमी लग सकती है. कुछ सीन्स और घटनाएं पहले देखी गई हॉरर फिल्मों की याद भी दिलाती हैं. हालांकि दूसरे भाग में कहानी रफ्तार पकड़ती है और आखिर तक दर्शकों की उत्सुकता बनाए रखती है.
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By Divya Keshri
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