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फिल्‍म रिव्‍यू: मौजूदा दौर के रिश्तों की फील गुड वाली कहानी है ''शेफ''

Updated at : 06 Oct 2017 1:35 PM (IST)
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फिल्‍म रिव्‍यू: मौजूदा दौर के रिश्तों की फील गुड वाली कहानी है ''शेफ''

II उर्मिला कोरी II फ़िल्म: शेफ निर्देशक: राजा कृष्णा मेनन कलाकार: सैफ अली खान, स्वर काम्बले, पद्मप्रिया, चंदन रॉय सान्याल और अन्य रेटिंग: तीन सैफ अली खान की फ़िल्म शेफ हॉलीवुड फिल्म शेफ का ऑफिशियल रिमेक है. राजा कृष्णन मेनन, रितेश शाह, सुरेश नायर ने इस हॉलीवुड कहानी को भारतीय दर्शकों के मद्देनजर नज़र रखकर […]

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II उर्मिला कोरी II

फ़िल्म: शेफ

निर्देशक: राजा कृष्णा मेनन

कलाकार: सैफ अली खान, स्वर काम्बले, पद्मप्रिया, चंदन रॉय सान्याल और अन्य

रेटिंग: तीन

सैफ अली खान की फ़िल्म शेफ हॉलीवुड फिल्म शेफ का ऑफिशियल रिमेक है. राजा कृष्णन मेनन, रितेश शाह, सुरेश नायर ने इस हॉलीवुड कहानी को भारतीय दर्शकों के मद्देनजर नज़र रखकर बखूबी कही है. यह उन सभी बॉलीवुड फिल्मकारों के लिए प्रेरणा है जो हॉलीवुड फिल्मों से प्रभावित होते हैं. यह फ़िल्म ओरिजिनल शेफ की कट कॉपी पेस्ट नहीं है बल्कि उससे प्रेरणा लेकर उसकी कहानी को नए अंदाज में प्रस्तुत किया है जो इस फ़िल्म को खास बना देता है.

जिन्होंने हॉलीवुड फिल्म नहीं भी देखी उन दर्शकों के लिए भी यह नई कहानी है. फ़िल्म का नाम भले ही ‘शेफ’ है और फ़िल्म के कई दृश्य ऐसे हैं जो आपके मुंह में पानी ले आएंगे या फिर आपकी भूख को बढ़ा देंगे लेकिन असल में यह रिश्तों और प्यार की कहानी है.

मूल कहानी पर आते हैं तो यह कहानी रोशन कालरा की है ,जो न्यूयोर्क का बहुत फेमस शेफ है. वह तलाकशुदा है. उसका एक बेटा भी है जो कोचीन में अपनी माँ के साथ रह रहा है. इसी बीच कुछ घटनाएं ऐसी हो जाती हैं कि रोशन की नौकरी चली जाती है. वह इस अनचाहे ब्रेक में अपने बेटे से मिलने कोचीन आता है और वह पाता है कि काम के प्रति प्यार ने उसे उसके रिश्तों के दूर कर दिया था. उसे अपनी गलती का एहसास होता है.

किस तरह से रोशन का बिखरा हुआ परिवार उसके करियर को भी सपोर्ट करता है, यह सब कैसे होता है इसी की यह फन रोड ट्रिप वाली कहानी है.

फिल्म की कहानी बताती है कि रिश्ते सबसे बड़ी पूंजी है. जो हर बुरे वक़्त से आपको बाहर निकाल सकते हैं. फिल्म को-पैरेंटिंग पर भी ध्‍यान खींचती है. बच्चे के पालन-पोषण में मां और बाप दोनों की जिम्‍मेदारी है और यह आपसी सहयोग के बिना अधूरी है. फिल्म की कमज़ोरियों की बात करें तो फिल्म थोड़ी धीमी है और क्लाइमेक्स औसत है उस पर और काम किया जा सकता था फिल्म का ट्रीटमेंट इसे मल्टीप्लेक्स ऑडियंस के ज़्यादा करीब ले जाता है.

अभिनय की बात करें तो सैफ अली खान, रोशन कालरा के किरदार में खूब जमे हैं. महत्वकांक्षी शेफ हो या पिता के किरदार को उन्होंने बेहतरीन ढंग से पेश किया है. वह अपने अभिनय से हंसाते भी हैं तो कभी आँखों को नम भी कर देते हैं. उन्होंने इस किरदार से दिल जीत लिया यह कहना गलत न होगा.

बेटे की भूमिका में स्वर कांबले फिट रहे हैं. सिंगल मदर के किरदार में अभिनेत्री पद्मप्रिया जानकीरमन ने भी बेजोड़ अभिनय किया है. पर्दे पर उनको देखना अच्छा लगता है. दिनेश पी नैयर, चंदन रॉय सान्याल और मिलिंद सोमन ने भी अपने किरदारों से कहानी में अलग ही रंग भरते हैं .बाकी के किरदारों का काम भी अच्छा है.

फिल्म का गीत संगीत भी अच्छा है. कहानी के साथ वह बखूबी मेल खाते हैं. फिल्म की सिनेमेटोग्राफी बढ़िया है. केरल की खूबसूरती के साथ ही अमृतसर, दिल्ली और न्यूयॉर्क के माहौल को बखूबी फिल्म में जोड़ा गया है.

कुलमिलाकर ‘शेफ’ मौजूदा दौर की रिश्तों की फील गुड वाली कहानी है. जिसे कलाकारों का बेजोड़ अभिनय और खास बना जाता है.

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