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कोलकाता दक्षिण से पहले सांसद थे एसपी मुखर्जी, ममता बनर्जी के गढ़ में अब भाजपा कर रही जोर आजमाइश

Updated at : 30 May 2024 8:30 PM (IST)
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कोलकाता दक्षिण से पहले सांसद थे एसपी मुखर्जी, ममता बनर्जी के गढ़ में अब भाजपा कर रही जोर आजमाइश

दक्षिण कोलकाता में ही है प्रसिद्ध कोलकाता डॉक. फोटो : प्रभात खबर

कोलकाता दक्षिण सीट पर तृणमूल गठन के बाद ममता बनर्जी के कारण उसकी ताकत लगातर बढ़ती रही. हाल के दिनों में भाजपा ने क्षेत्र में ताकत का एहसास कराया.

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कोलकाता दक्षिण लोकसभा क्षेत्र में प्रसिद्ध मंदिर कालीघाट मंदिर है. मां काली की पूजा के लिए यह मंदिर पूरे देश में प्रसिद्ध है. देश के विभिन्न कोने से लोग मां काली की पूजा करने काली मंदिर में आते हैं. यह लोकसभा सीट ममता बनर्जी का गृह क्षेत्र भी है. सुभाष चंद्र बोस का पैतृक आवास इसी लोकसभा क्षेत्र में है.

इस लोकसभा क्षेत्र की खासियत यह रही है कि भारतीय जनसंघ के संस्थापक रहे श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश में 1952 में हुए पहले चुनाव में यहीं से जीत हासिल की थी. इसी के साथ उन्होंने भगवा विचारधारा की नींव भी रखी. उनकी विचारधारा आज भी भाजपा के रूप में देश के सामने है.

इस सीट पर उनके बाद कभी दक्षिण पंथी दल यहां से चुनाव नहीं जीत पाया. इस सीट से भाकपा, कभी कांग्रेस पुराने दौर में जीत दर्ज करती रही. आलम तो यह रहा कि 2009 के चुनाव में भाजपा को यहां महज 3.96 फीसदी ही वोट मिल पाया था. इसकी वजह तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी का गृह क्षेत्र होना है.

तृणमूल के गठन के बाद ममता बनर्जी के कारण उसकी ताकत इस क्षेत्र में लगातर बढ़ती रही. लेकिन हाल के दिनों में भाजपा ने इस क्षेत्र में अपनी ताकत का एहसास कराया. पिछले चुनाव में तृणमूल को यहां 47.50 फीसदी वोट मिला तो वहीं नेताजी के वंशज भाजपा उम्मीदवार चंद्र कुमार बोस को 34.64 फीसदी वोट मिला. भाजपा का वोट पिछली बार की तुलना में 9.36 फीसदी बढ़ गया था.

इससे भाजपा की उम्मीदें जगी हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा रहा था. इससे तृणमूल की चिंता बढ़ गयी थी. इस सीट को जीतने के लिए भाजपा इसबार बेताब दिख रही है. यही वजह है कि भाजपा ने केंद्रीय मंत्री देवश्री चौधरी को अपना उम्मीदवार बना दिया. उन्हें उत्तर बंगाल से लाकर यहां मौदान में उतारा गया. आमतौर पर इसे ममता बनर्जी का गढ़ माना जाता है. ममता बनर्जी 1991 से छह बार यहां से सांसद बनी थीं. अब तक नौ बार तृणमूल के उम्मीदवार यहां से जीत हासिल करते रहे हैं.

कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट का सामाजिक ताना-बानाइस लोकसभा सीट में शहरी और ग्रामीण की मिश्रित आबादी है. भवानीपुर विधानसभा, रासबिहारी, कोलकाता पोर्ट और बालीगंज विधानसभा इलाकों में बड़ी संख्या में गुजराती मारवाड़ी और बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के निवासी रहते हैं.

वहीं. कसबा, बेहाला पूर्व और बेहाला पश्चिम मूलतः बंगाली बहुल इलाके हैं. इस सीट से प्रियरंजन दासमुंशी भी सासंद हुए थे. 1991 से अभी तक इस सीट पर तृणमूल का कब्जा है. इस सीट पर इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होने की उम्मीद है. तृणमूल कांग्रेस ने पिछली बार की विजेता माला राय को मैदान में उतारा है, वहीं भाजपा ने केंद्रीय मंत्री रहीं देवश्री चौधरी को टिकट दिया है. माकपा ने फिल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की भतीजी सायरा शाह हलीम को मैदान में उतार कर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है.

भूमिपुत्र बनाम बाहरी का मुद्दा हुआ हावी

उत्तर बंगाल के दक्षिण दिनाजुपर जिला के बालुरघाट की देवश्री चौधरी उत्तर बंगाल के ही उत्तर दिनाजपुर जिला के रायगंज लोकसभा क्षेत्र से दोबारा इस बार सांसद उम्मीदवार नहीं हुईं. भाजपा ने उन्हें ममता बनर्जी के गढ़ में तृणमूल को चुनौती देने के लिए इस हाइप्रोफाइल सीट से उतारा. इसके साथ ही भूमिपुत्र बनाम बाहरी का मुद्दा भी हावी हो गया है. भाजपा यहां ममता सरकार के भ्रष्टाचार से लेकर संदेशखाली में महिलाओं के उत्पीड़न को मुद्दा बना रही है. वहीं तृणमूल कांग्रेस केंद्र द्वारा बंगाल को वंचित करने का आरोप लगा रही है.सायरा शाह हलीम पर माकपा ने खेला दांव

इस सीट से कांग्रेस और माकपा नीत वाममोर्चा गठबंधन ने माकपा की ओर से सायरा शाह हलीम को मैदान में उतारा है. वर्ष 2022 के बालीगंज विधानसभा उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के बाबुल सुप्रीयो के विरुद्ध माकपा की ओर से चुनाव लड़कर हार के बावजूद वह सुर्खियों में आयी थीं. सायरा शाह हलीम बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की भतीजी हैं. उनके पिता, ज़मीरउद्दीन शाह आर्मी में लेफ्टिनेंट जनरल रह चुके हैं.

सायरा शाह हलीम पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष दिवंगत हासिम अब्दुल हलीम की बहू भी हैं. सायरा देश की प्रमुख सामाजिक और लैंगिक कार्यकर्ताओं में से एक हैं और अपना समय समाज के मुद्दों को उठाने में बिताती हैं.क्या है राजनीतिक समीकरण ?कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखें तो तृणमूल कांग्रेस यहां की सभी सात विधानसभा सीट पर काबिज है.

पिछली बार माला राय ने यहां से जीत दर्ज की थी. इस बार भी माला राय यहां से उम्मीदवार है. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इस सीट पर ममता बनर्जी का प्रभाव ज्यादा दिखता है. माला रॉय ने 2014 के कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के रूप में कोलकाता दक्षिण क्षेत्र से चुनाव लड़ा था. तब वह चौथे स्थान पर रहीं थी, बाद में वह तृणमूल में शामिल हुईं. उन्हें नगर निगम का अध्यक्ष बनाया गया. 2019 में तृणमूल ने उन्हें यहां से टिकट दिया.

बेरोजगारी व भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा रहा विपक्षयहां चुनाव में विपक्ष बेरोजगारी व भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा रहे हैं. तृणमूल सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचार व संदेशखाली में महिलाओं पर अत्याचार का मुद्दा भी उठ रहा है. इस बारे में सायरा शाह हलीम ने बताया कि कोलकाता दक्षिण एक मिश्रित निर्वाचन क्षेत्र है, यहां कई युवा मतदाता हैं. यहां के लोग नौकरी, बेरोजगारी का समाधान और भ्रष्टाचार का खात्मा चाहते हैं. चुनावी बांड की बात करें तो टीएमसी दूसरे नंबर पर है. यहां के लोग यहां भ्रष्ट उम्मीदवार नहीं चाहते.

वहीं, भाजपा उम्मीदवार देबश्री चौधरी ने यहां जीत का भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई इस बारे घोटाले व भ्रष्टाचार के खिलाफ है. साथ ही विकास भी एक मुद्दा है. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के इस इलाके में अब बदलाव आया है. बंगाल इस समय भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है. हम इसे खत्म करना चाहते हैं. साथ ही विपक्षी दल क्षेत्र में अवैध निर्माण के मुद्दे पर भी घेर रहे हैं.

गार्डेनरीच में अवैध इमारत के गिरने के कई लोगों की दब कर मौत हो गयी थी.वहीं तृणमूल उम्मीदवार माला राय ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान जो रिस्पांस मिल रहा है, इससे तो यही लग रहा कि पिछली बार की तुलना में इस बार जीत का मार्जिन बढ़ जायेगा. मुख्यमंत्री के विकास कार्य को वह लोगों के समक्ष उठा रही हैं. इसमें लक्ष्मी भंडार प्रमुख है. उनका कहना था कि यहां के लोगों का ममता बनर्जी पर भरोसा है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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