क्रिप्टो मार्केट में हाहाकार, 5 हफ्ते के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा बिटकॉइन
Published by : Soumya Shahdeo Updated At : 28 May 2026 11:09 AM
Bitcoin Price
Bitcoin Price Drop: वैश्विक तनाव और ETF से $1.5 बिलियन की निकासी के कारण बिटकॉइन 5 हफ्ते के निचले स्तर पर गिरा. जानिए एक्सपर्ट्स का इस बड़ी गिरावट पर क्या कहना है.
Bitcoin Price Drop: क्रिप्टोकरेंसी मार्केट से इस वक्त एक बड़ी खबर आ रही है. दुनिया की सबसे बड़ी और लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी, बिटकॉइन (Bitcoin) की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. बिटकॉइन गिरकर पिछले पांच हफ्तों के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. सिंगापुर में गुरुवार को बिटकॉइन की कीमत 1.5% तक टूटकर $74,017 पर आ गई, जो कि 20 अप्रैल के बाद का इसका सबसे कमजोर स्तर है. सिर्फ बिटकॉइन ही नहीं, बल्कि दूसरी सबसे बड़ी डिजिटल करेंसी ‘इथर’ (Ether) में भी 2% से ज्यादा की गिरावट देखी गई है.
बिटकॉइन अचानक नीचे क्यों गिरा?
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण दुनिया के आर्थिक हालात और वैश्विक तनाव हैं. दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने इन्वेस्टर्स की चिंता बढ़ा दी है. बाजार को डर है कि इस युद्ध की वजह से महंगाई (Inflation) और बढ़ सकती है. अगर महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें और बढ़ा सकता है. इसके अलावा, एक तरफ जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छू रहा है, वहीं दूसरी तरफ क्रिप्टो मार्केट में डर का माहौल है.
क्या ETF से पैसा बाहर निकलना है बड़ी वजह?
हां, बिटकॉइन की कीमतों को गिराने में अमेरिकी स्पॉट-बिटकॉइन ईटीएफ (ETF) से बड़े पैमाने पर हो रही पैसों की निकासी (Outflows) का बहुत बड़ा हाथ है. आंकड़ों के मुताबिक, इस साल मई महीने में अब तक इन्वेस्टर्स ने अमेरिकी ईटीएफ से लगभग 1.5 बिलियन डॉलर (करीब 150 करोड़ डॉलर) बाहर निकाल लिए हैं. इसके साथ ही, दुनिया के सबसे बड़े बिटकॉइन ईटीएफ ‘iShares Bitcoin Trust’ के एक बहुत बड़े ब्लॉक की बिक्री की खबरें सामने आई हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बड़ी बिकवाली ने बाजार के सेंटीमेंट (भरोसे) को कमजोर कर दिया है.
एक्सपर्ट्स का इस गिरावट पर क्या कहना है?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बिटकॉइन में आई यह कमजोरी किसी क्रिप्टो-विशिष्ट (Crypto-specific) समस्या की वजह से नहीं है, बल्कि इसके पीछे पूरी तरह से ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक (वैश्विक आर्थिक) कारण हैं. अमेरिका में बॉन्ड यील्ड का बढ़ना और डॉलर का मजबूत होना वित्तीय स्थितियों को कड़ा कर रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट के हालातों में कोई सुधार नहीं होता, तब तक क्रिप्टो ट्रेडर्स बेहद सतर्क रुख अपनाए रखेंगे. शेयर बाजार में भी अब थोड़ी थकान दिखने लगी है, जिसके चलते इन्वेस्टर्स बिटकॉइन में अपने लीवरेज्ड लॉन्ग पोजीशंस (उधार लेकर किए गए निवेश) को कम कर रहे हैं. मिड-$70,000 (75,000 डॉलर के आसपास) का मुख्य सपोर्ट लेवल टूटने के बाद बिटकॉइन पर दबाव और बढ़ गया है, जिससे आने वाले दिनों में इसके और नीचे जाने का खतरा बना हुआ है.
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By Soumya Shahdeo
सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.
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