रिम्स में डॉक्टरों की मनमानी, आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी मरीजों पर 5000 रुपये का आर्थिक बोझ

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RIMS Ranchi News

रिम्स भवन की तस्वीर

RIMS Ranchi News: रांची के रिम्स (RIMS) अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज के दावों की पोल खुल रही है. सर्जरी के दौरान मरीजों को 5,000 रुपये से अधिक की दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं और रिफंड मिलने में डेढ़ महीने का समय लग रहा है.

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रांची से राजीव पांडेय की रिपोर्ट

RIMS Ranchi News, रांची : राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS), रांची में आयुष्मान भारत योजना के लाभुकों को इलाज और विशेष रूप से सर्जरी के दौरान भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. केंद्र और राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी मुफ्त इलाज योजना के बावजूद रिम्स के सर्जरी और स्त्री एवं प्रसूति रोग (गाइनी) विभाग में भर्ती गरीब मरीजों के परिजनों को दवाओं और सर्जिकल आइटमों के लिए अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है. ऑपरेशन के वक्त अचानक थमाई जा रही 5,000 रुपये से अधिक की लंबी मेडिकल सूचियों के कारण मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है, जिससे बेबस परिजन रिश्तेदारों से कर्ज मांगने को मजबूर हैं.

अमृत फार्मेसी के आदेश बेअसर

मामले की गंभीरता को देखते हुए रिम्स अधीक्षक ने पूर्व में ही सभी विभागाध्यक्षों (HODs) को सख्त निर्देश जारी किए थे कि जो भी दवा या सर्जिकल आइटम रिम्स के मुख्य स्टॉक में उपलब्ध न हो, उसे परिसर में स्थित ‘अमृत फार्मेसी’ से मंगाया जाए. डॉक्टरों को उन दवाओं की सूची अमृत फार्मेसी को उपलब्ध कराने को कहा गया था जिनकी मांग सबसे अधिक रहती है. हालांकि, इस सरकारी आदेश का रिम्स के डॉक्टरों पर कोई खास असर नहीं दिख रहा है और वे सीधे बाहर की निजी दुकानों की पर्चियां लिख रहे हैं.

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पैसा वापसी में लगता है डेढ़ महीना

अस्पताल कर्मियों और प्रबंधन का तर्क है कि रिम्स में अनुपलब्ध सामग्री ही बाहर से मंगाई जाती है और ऑपरेशन के बाद बिल जमा करने पर वह राशि मरीज को रिफंड (वापस) कर दी जाती है. लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि इस रिफंड प्रक्रिया में एक से डेढ़ महीने का लंबा वक्त लग जाता है, जो कि दैनिक मजदूरी करने वाले गरीब परिवारों के बजट से बाहर है.

केस स्टडी: आयुष्मान होने के बाद भी खरीदना पड़ा सर्जिकल सामान

रिम्स के सर्जरी विभाग में भर्ती एक मरीज की बहन सोनी ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी उन्हें बाहर से सर्जिकल सामान खरीदना पड़ा. उन्होंने कहा, “हमने किसी तरह पैसे का इंतजाम तो कर लिया, लेकिन अब यह रिफंड कब मिलेगा, कुछ पता नहीं. हमसे ज्यादा मत पूछिए, नहीं तो डॉक्टरों को पता चलने पर हमारे मरीज के इलाज में दिक्कत होने लगेगी.” यह बयान साफ तौर पर रिम्स में मरीजों के परिजनों के भीतर व्याप्त डर और लाचारी को दर्शाता है.

हर दिन लगभग 70 परिवारों पर पड़ता है आर्थिक बोझ

आंकड़ों के अनुसार, रिम्स में प्रतिदिन आयुष्मान भारत योजना के तहत करीब 150 नए मरीजों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) होता है. इनमें से लगभग 65 से 70 मरीजों के परिजनों को हर दिन बाहर से दवा और सर्जिकल सामान लाना पड़ता है. चिंताजनक बात यह भी है कि कई अनपढ़ और सीधे-साधे ग्रामीण मरीजों को लगता है कि आयुष्मान योजना के तहत इलाज की यही सामान्य व्यवस्था है. यही कारण है कि डर और अज्ञानता के चलते शिकायतें प्रबंधन तक नहीं पहुंच पातीं; बीते एक हफ्ते में नोडल ऑफिसर के पास ऐसी महज दो ही लिखित शिकायतें आई हैं.

व्यवस्था सुधारने के लिए हो रहा है अनुबंध: PRO डॉ. शिशिर

रिम्स के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) डॉ. शिशिर ने इस अव्यवस्था पर सीधी बातचीत में कहा कि रिम्स में दवाओं का स्टॉक बढ़ाने और इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी व व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि मरीजों के परिजनों पर तत्काल पड़ने वाले आर्थिक बोझ को समाप्त करने के लिए रिम्स प्रबंधन सीधे दवा निर्माता कंपनियों से अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) करने जा रहा है, ताकि दवाओं की इन-हाउस उपलब्धता को बढ़ाया जा सके. इसके साथ ही विभागीय डॉक्टरों को भी इस दिशा में संवेदनशील और जागरूक किया जाएगा ताकि मरीजों को बाहर न जाना पड़े.”

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समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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