रांची के बुढ़मू CO की गिरफ्तारी पर भड़का प्रशासनिक सेवा संघ, तड़के सुबह हुई कार्रवाई को बताया नियम विरुद्ध

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रांची एसीबी का दफ्तर

रांची एसीबी का दफ्तर

झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ (झाप्रसे) ने बुढ़मू के अंचलाधिकारी की ACB गिरफ्तारी को नियम विरुद्ध बताया है. संघ पदाधिकारियों ने इस अमानवीय कार्रवाई के विरोध में राज्य के मुख्य सचिव और DGP से मिलने का निर्णय लिया है.

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Jharkhand Administrative Service, रांची : झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ (झाप्रसे) ने बुढ़मू के अंचलाधिकारी (CO) सचिदानंद कुमार वर्मा की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा की गई गिरफ्तारी पर कड़ा रुख अख्तियार किया है. संघ ने इस पूरी कार्रवाई को नियम विरुद्ध और अनुचित बताया है. इस मामले के विरोध में संघ के पदाधिकारियों ने राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) और पुलिस महानिदेशक (DGP) से मुलाकात करने का निर्णय लिया है.

अपराधियों जैसा व्यवहार करने का आरोप

इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर रविवार को संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की एक आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य भर के कई प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया. बैठक में संघ के पदाधिकारियों ने साफ कहा कि एसीबी अपनी कानूनी कार्रवाई करने और भ्रष्टाचारियों को पकड़ने के लिए स्वतंत्र है, उस पर कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन, इस विशेष मामले में अंचलाधिकारी को रंगे हाथों (Red Hand Trap) नहीं पकड़ा गया है. अधिकारियों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सीओ को महज किसी के बयान के आधार पर तड़के सुबह 3:00 बजे गिरफ्तार कर लिया गया. कानूनी प्रक्रिया के तहत बयान के आधार पर उन्हें चार्जशीट में नामजद किया जाना चाहिए था, न कि इस तरह हिरासत में लेना था. संघ का आरोप है कि एक प्रतिष्ठित अधिकारी के साथ अपराधियों जैसा बर्ताव करते हुए सुबह-सुबह गिरफ्तार करना पूरी तरह गलत है, क्योंकि ऐसी त्वरित कार्रवाई केवल पेशेवर अपराधियों के भागने की आशंका पर की जाती है. संघ के अनुसार, इस मामले में एसीबी ने अपने तय अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया है.

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म्यूटेशन पहले ही कर दिया था रिजेक्ट

मामले की तकनीकी बारीकियों को रखते हुए संघ के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि संबंधित भूखंड (जमीन) का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) अंचलाधिकारी ने पहले ही रिजेक्ट (खारिज) कर दिया था. म्यूटेशन खारिज करने का ठोस कारण यह था कि उक्त भूखंड पर वर्ष 1960 से ही किसी दूसरे पक्ष का कब्जा चला आ रहा है. बैठक में यह बात पुरजोर तरीके से उठाई गई कि अगर मामला सही हो, तो कोई भी जांच एजेंसी कार्रवाई करे, उसमें कोई रुकावट नहीं है. लेकिन अंचलाधिकारी (CO) रैंक के अधिकारी, जो एसडीओ (SDO) रैंक के समकक्ष होते हैं, उन्हें इस अमानवीय तरीके से पकड़ना प्रशासनिक गरिमा के खिलाफ है. संघ इस पूरे मामले में न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सरकार का दरवाजा खटखटाएगा. मुख्य सचिव और डीजीपी दोनों को लिखित ज्ञापन सौंपकर इस मामले में सही कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया जाएगा.

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समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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