खलारी में हल-बैल संग उतरे किसान खेत में बिचड़ा डालने के काम में तेजी

फोटो :-11खलारी03:- खलारी प्रखंड में मानसूनी बारिश के बाद पारंपरिक रूप से हल-बैल से खेत की जुताई करता किसान. फोटो :-11खलारी04:- कृषि कार्य में तेजी आने के बाद खेतों में धान की नर्सरी तैयार करने के लिए बिचड़ा लगाते ग्रामीण किसान. | Prabhat Khabar Network
खलारी में मॉनसून की बारिश के बाद किसान हल-बैल लेकर खेतों में उतरे। धान का बिचड़ा लगाने का काम युद्धस्तर पर जारी, वैकल्पिक फसलों पर भी किसानों का रुझान।
खलारी. क्षेत्र में भीषण गर्मी के बाद आखिरकार मॉनसून की झमाझम बारिश होने से कृषि कार्य में तेजी आ गयी है. बारिश थमते ही खलारी प्रखंड के ग्रामीण व खेतिहर इलाकों के किसान पारंपरिक रूप से हल-बैल लेकर अपने खेतों की जुताई के लिए उतर गये हैं. इसके साथ ही खेतों में धान का बिचड़ा लगाने की प्रक्रिया भी युद्धस्तर पर शुरू कर दी गयी है. बारिश होने और खेतों में पानी जमा होने से क्षेत्र के अन्नदाताओं के चेहरों पर खुशी साफ देखी जा रही है.
देर से हुई बारिश के कारण खेती में हुआ विलंब
किसानों के अनुसार, इस वर्ष मॉनसून की बारिश थोड़ी देर से शुरू हुई और फिर लगातार वर्षा होने के कारण बिचड़ा लगाने के काम में थोड़ी देरी हुई है. हालांकि, क्षेत्र के कुछ बड़े किसानों ने पहले ही अपने खेतों में बिचड़ा डाल दिया था. आम किसानों ने उम्मीद जतायी है कि खेतों में डाला गया नया बिचड़ा आगामी 21 दिनों के भीतर पूरी तरह तैयार हो जायेगा, जिसके बाद पूरे प्रखंड क्षेत्र में धान की मुख्य रोपनी का काम जोर-शोर से शुरू कर दिया जाएगा.
वैकल्पिक फसलों की ओर भी बढ़ा किसानों का रुझान
मुख्य खरीफ फसल धान के अलावा क्षेत्र के किसान समय के नुकसान की भरपाई के लिए बड़े पैमाने पर वैकल्पिक खेती की ओर भी रुख कर रहे हैं. खेतों के ऊपरी और सूखे हिस्सों में मक्का, मड़वा, अरहर और विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियों की बुवाई की जा रही है, ताकि खरीफ सीजन में बहुआयामी लाभ लिया जा सके.
अनुकूल बारिश से बिचड़ा लगाने के काम में आयी तेजी
प्रखंड तकनीकी प्रबंधक विकास तिर्की ने कहा कि खलारी प्रखंड में मॉनसून की बारिश होने के बाद धान का बिचड़ा लगाने के काम में काफी तेजी आयी है. किसान अपने-अपने खेतों की जुताई कर युद्धस्तर पर बिचड़ा डाल रहे हैं. जिन किसानों ने पहले बिचड़ा डाल दिया था, उनका बिचड़ा अगले दो हफ्तों में तैयार हो जायेगा, जिसके बाद प्रखंड में मुख्य धान रोपनी का काम शुरू होगा. इसके साथ ही धान के अलावा मक्का, मड़वा और अरहर जैसी वैकल्पिक फसलों की बुवाई के लिए भी किसानों को लगातार तकनीकी सलाह दी जा रही है.
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