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JP Morgan: जेपी मॉर्गन इंडेक्स में सरकारी बॉन्ड शामिल होने से भारत की कंपनियों को होगा बड़ा मुनाफा 

Updated at : 29 Jun 2024 3:13 PM (IST)
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JP Morgan: जेपी मॉर्गन इंडेक्स में सरकारी बॉन्ड शामिल होने से भारत की कंपनियों को होगा बड़ा मुनाफा 

JP Morgan: भारतीय कंपनियों के लिए फंड जुटाना हो जाएगा आसान. हाल के एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय कंपनियों के लिए फंड जुटाना सस्ता हो जाएगा क्योंकि जेपी मॉर्गन इंडेक्स में शामिल होने जा रहे हैं देश के सरकारी बॉन्ड.

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JP Morgan: जेपी मॉर्गन इंडेक्स में शामिल होने से भारत कंपनियों को कुछ बदलाव देखने को मिलेंगे. इससे भारत की कंपनियों को अच्छा मुनाफा हो सकता है. मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, जेपी मॉर्गन के उभरते बाजारों की सूचकांक में भारत के सरकारी बॉन्ड शामिल होने वाले हैं. इससे भारत की कंपनियों के लिए फंड जुटाना आसान और सस्ता हो जाएगा. सरकारी बॉन्डों में विदेशी निवेश बढ़ने के कारण घरेलू निवेशकों को भारतीय कंपनियों की ओर से जारी किए गए लोन पर ध्यान देने का ज्यादा मौका मिलेगा. इससे भारतीय कंपनियों को कम ब्याज दर पर अच्छा फंड जुटाने में मदद मिलेगी.

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कितना मिलेगा फायदा 

रिपोर्ट की जानकारी को माने तो जेपी मॉर्गन को अगले 10 महीना में करीब 20 से 25 डॉलर के ग्लोबल फ्लो की उम्मीद है. जिससे विदेशी निवेशकों के हिस्सेदारी 2.5% से बढ़कर 4.4% तक पहुंच जाएगी. इसका सीधा फायदा भारत कम्पनियों को देखने को मिलेगा. क्योंकि इस बदलाव के बाद करीब 1.3 खरब डालर के भारतीय बाजार को विदेशी निवेशकों के लिए खोल दिया जाएगा. जेपी मॉर्गन ने बताया है कि उसके गवर्नमेंट बॉन्ड इंडेक्स इमर्जिंग मार्केट्स में से कुल 10% वेटेज भारतीय बॉन्ड को दिए जाएंगे. जिससे इंडेक्स में भारत बॉन्ड का वेटेज हर महीने एक-एक परसेंट करके बढ़ाया जाएगा. जिसका मतलब है कि अगले 10 महीने में इस इंडेक्स में भारतीय बॉन्ड का वेटेज 10% हो जाएगा.

क्या हैं उम्मीदें

सूचकांक में शामिल होने के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से अच्छा निवेश आने की उम्मीद है. यह निवेश एक्टिव और पैसिव दोनों तरीकों से हो सकते हैं, जिससे सिस्टम में कुल तरलता बढ़ेगी. इस रिपोर्ट में कौस्तभ कुलकर्णी ने बताया कि उनके अनुभवों के आधार पर जोखिम प्रीमियम और उधार लागत में कमी आने की संभावना है. यह अंतर्वेसन भारत के महत्व को दर्शाता है. कौस्तभ कुलकर्णी ने यह भी बताया कि सूचकांक में शामिल होने से सरकारी बॉन्डों के माध्यम से भारतीय क्रेडिट बाजारों के साथ वैश्विक निवेशकों का एकीकरण और भागीदारी बढ़ेगी.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों से सक्रिय निवेश पूंजी का पूल समय के साथ अन्य घरेलू बॉन्डो में भी फैल सकता है . और यह तभी संभव हो पाएगा जब वे भारतीय बाजार से अधिक परिचित हो जाएंगे. अमेरिकी बैंक केंद्र बैंक और अपने ग्राहकों को अधिक निवेश प्रोत्साहित करने के लिए जोड़ेगा.

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Nisha Bharti

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By Nisha Bharti

Nisha Bharti is a contributor at Prabhat Khabar.

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