मुआवजा मिला तो खुश न हों, बैंक की गलती से मिला हर्जाना फ्री नहीं, इस पर भी देना होगा टैक्स

बैंक मुआवजा टैक्स-फ्री कमाई नहीं है (Photo: Canva)
Income Tax on Bank Compensation: बैंक मुआवजे को टैक्स-फ्री समझने की गलती न करें. यह आपकी रेवेन्यू रिसीट है जिस पर स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है. नोटिस से बचने के लिए इसे ITR में दर्ज करें.
Income Tax on Bank Compensation: कभी-कभी बैंक की लापरवाही भारी पड़ जाती है चाहे वो ट्रांजैक्शन फेल होना हो, गलत पैसे कटना हो या सर्विस में देरी. जब बैंक अपनी गलती मानता है, तो वह आपके खाते में हर्जाना (Compensation) क्रेडिट कर देता है. पहली नजर में यह राहत भरी खबर लगती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनकम टैक्स विभाग की नजर इस ‘फ्री’ के पैसे पर भी होती है? जी हां, बैंक से मिला यह हर्जाना आपकी कमाई माना जाता है और इस पर टैक्स देना आपकी जिम्मेदारी है.
क्या यह पैसा आपकी कमाई है?
इनकम टैक्स के नियमों के हिसाब से किसी भी कमाई को दो हिस्सों में बांटा जाता है: कैपिटल रिसीट और रेवेन्यू रिसीट. बैंक से मिलने वाला हर्जाना किसी संपत्ति को बेचने से नहीं मिला है, इसलिए इसे ‘रेवेन्यू रिसीट’ माना जाता है. आसान शब्दों में कहें तो यह आपकी नियमित इंकम की तरह ही है. इनकम टैक्स एक्ट 1961 और नए नियमों के मुताबिक, जब तक किसी खास छूट का जिक्र न हो, हर रेवेन्यू रिसीट पर टैक्स लगता है. बैंक मुआवजे पर ऐसी कोई छूट नहीं दी गई है.
ITR में इसे कहां दिखाएं?
चूंकि यह पैसा न तो आपकी सैलरी है, न बिजनेस का मुनाफा और न ही घर के किराए से हुई कमाई, इसलिए इसे ‘Income from Other Sources’ (अन्य स्रोतों से आय) के हेड में डाला जाता है. जब आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करें, तो इस राशि को इसी कॉलम में दिखाएं. अगर आप इसे छिपाते हैं, तो फ्यूचर में स्क्रूटनी या नोटिस का सामना करना पड़ सकता है.
टैक्स की दर क्या होगी?
इस मुआवजे पर कोई अलग से फिक्स टैक्स रेट नहीं है. यह आपकी कुल सालाना इंकम में जुड़ जाता है. फिर आप जिस भी टैक्स स्लैब (जैसे 5%, 10% या 30%) में आते हैं, उसी के हिसाब से इस पर टैक्स कैलकुलेट होता है. यानी अगर आपकी इनकम पहले से ही टैक्स के दायरे में है, तो इस मुआवजे का एक हिस्सा टैक्स के रूप में सरकार के पास जाएगा.
नोटिस से बचने के लिए क्या करें?
अगर बैंक से मिला मुआवजा बड़ी रकम का है, तो सावधानी जरूरी है. हमेशा बैंक से मिले उस मैसेज, ईमेल या लेटर को संभालकर रखें जिसमें मुआवजे की वजह लिखी हो. अगर भविष्य में इनकम टैक्स विभाग आपसे इस क्रेडिट के बारे में पूछता है, तो आपके पास सबूत होना चाहिए कि यह पैसा कहां से आया. बिना सबूत के इसे ‘Unexplained Credit’ मान लिया जाता है, जिस पर बहुत भारी जुर्माना और अधिकतम टैक्स देना पड़ सकता है.
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लेखक के बारे में
By Soumya Shahdeo
सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.
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