क्या फिर बढ़ेगी महंगाई? ईरान-अमेरिका जंग से कच्चे तेल के दाम हुए $90 के पार
Published by : Soumya Shahdeo Updated At : 11 Jun 2026 11:57 AM
Oil Price on 11 June 2026 (Photo: Freepik)
Oil Price on 11 June 2026: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. जानिए ग्लोबल मार्केट के हालात और इसका आम जनता की महंगाई पर क्या असर होगा.
Oil Price on 11 June 2026: दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें फिर से आसमान छूने लगी हैं. बुधवार को बाजार बंद होते समय तेल की कीमतों में करीब 2 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी देखी गई. इसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान शांति समझौते पर राजी नहीं हुआ, तो अमेरिका बहुत सख्त कार्रवाई करेगा. इस धमकी के बाद से ही ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को लेकर हड़कंप मच गया है.
क्यों चढ़ रहे हैं तेल के दाम?
तेल की कीमतों में इस उछाल के पीछे दो बड़े कारण हैं. पहला, ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा सैन्य तनाव. हाल ही में दोनों देशों के बीच हुई गोलाबारी ने बाजार को डरा दिया है. दूसरा, अमेरिका की सरकारी रिपोर्ट (EIA) ने बताया कि पिछले हफ्ते अमेरिका के कच्चे तेल के स्टॉक में 72 लाख बैरल की बड़ी गिरावट आई है. बाजार को उम्मीद सिर्फ 40 लाख बैरल की कमी की थी, लेकिन डेटा उम्मीद से कहीं ज्यादा खराब रहा. साथ ही, अमेरिका के ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ (SPR) में तेल का स्टॉक अगस्त 2023 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है.
क्या अब आगे क्या होगा?
तनाव कम करने के लिए अमेरिकी ऊर्जा विभाग अब अपने इमरजेंसी रिजर्व से 4 करोड़ बैरल तेल कंपनियों को उधार देने की योजना बना रहा है, ताकि फ्यूल की बढ़ती कीमतों को कुछ हद तक काबू में किया जा सके. ट्रंप का दावा है कि अगर अमेरिकी नौसेना ने चुपचाप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों को सुरक्षित बाहर न निकाला होता, तो आज कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर के बजाय 250 डॉलर प्रति बैरल होती. वहीं, यूएन की परमाणु निगरानी संस्था ने भी ईरान को अपने परमाणु भंडार की जानकारी देने का दबाव बनाया है, जिससे स्थिति और उलझ गई है.
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
ईरान और अमेरिका के बीच जारी इस टकराव की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली शिपिंग काफी प्रभावित है. यह वही रास्ता है जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है. इस इलाके में ईरान और अमेरिका दोनों ने अपनी नाकेबंदी (Blockade) लगा रखी है. ऊर्जा की बढ़ती कीमतों की वजह से अमेरिका में महंगाई तीन साल की सबसे तेज रफ्तार पर पहुंच गई है, जिसका सीधा असर अब दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों पर पड़ेगा. ट्रेडर्स को डर है कि दिसंबर तक फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं.
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By Soumya Shahdeo
सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.
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