चांद पर जमीन कैसे खरीदी जाती है, कौन है मालिक? सुशांत सिंह राजपूत भी थे खरीदार, जानिए नियम

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Moon Land Buying

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Moon Land Buying : क्या सच में खरीदी जा सकती है चांद पर जमीन? जानिए ‘लूनर एम्बेसी’ के दावों, सुशांत सिंह राजपूत के प्लॉट और अंतरराष्ट्रीय ‘आउटर स्पेस ट्रीटी’ का पूरा सच.

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Moon Land Buying : “चलो चांद पर एक छोटा सा घर बनाते हैं…” यह लाइन अब सिर्फ गानों या शायरी तक सीमित नहीं रह गई है. पिछले कुछ सालों में इंटरनेट पर चांद (Moon) पर जमीन खरीदने और बेचने के दावे बहुत तेजी से वायरल हुए हैं.

कई विदेशी कंपनियां बकायदा विज्ञापन चलाकर लोगों को चांद पर एक एकड़ या कुछ वर्ग फीट जमीन बेचने का दावा कर रही हैं.लेकिन क्या यह वाकई मुमकिन है? क्या कोई व्यक्ति सच में चांद की जमीन का मालिक हो सकता है? आइए अंतरराष्ट्रीय कानूनों और हकीकत के चश्मे से इसके पीछे का पूरा सच समझते हैं.

क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय नियम ?

चांद की खरीद-फरोख्त को समझने से पहले हमें दुनिया के सबसे बड़े स्पेस कानून को जानना होगा. साल 1967 में दुनिया के कई बड़े देशों ने मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे “आउटर स्पेस ट्रीटी” (Outer Space Treaty) कहा जाता है.

इस संधि के तहत भारत, अमेरिका और रूस समेत 100 से ज्यादा देशों ने यह सहमति जताई थी कि अंतरिक्ष, चांद, मंगल या कोई भी अन्य खगोलीय पिंड (Celestial Body) किसी एक देश की बपौती नहीं है. अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, कोई भी सरकार या देश चांद की जमीन पर अपना झंडा गाड़कर उसका मालिकाना हक (Ownership) नहीं जता सकता. चांद पूरी मानवता की एक साझा विरासत है.

फिर चांद पर जमीन बेच कौन रहा है ?

जब कोई देश इसका मालिक नहीं है, तो इंटरनेट पर जमीन बेचने वाली ये दुकानें किसने खोली हैं? इसमें सबसे चर्चित नाम एक अमेरिकी कंपनी “लूनर एम्बेसी” (Lunar Embassy) का आता है. यह कंपनी और इसके जैसी कुछ अन्य वेबसाइट्स लोगों को चांद पर प्लॉट ऑफर करती हैं.

आप इनकी वेबसाइट पर जाकर कुछ डॉलर का भुगतान करते हैं, और बदले में ये कंपनियां आपको एक चमचमाता हुआ ‘जमीन का सर्टिफिकेट’ (Certificate of Ownership) और चांद का नक्शा ईमेल या कूरियर के जरिए भेज देती हैं.

विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय वकीलों का साफ कहना है कि इन कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले सर्टिफिकेट्स की कोई कानूनी मान्यता (Legal Validity) नहीं है. यह सिर्फ एक ‘गिफ्ट’ या ‘प्रतीकात्मक दस्तावेज’ (Novelty Gift) जैसा है, जिसे आप अपने घर की दीवार पर शौक के लिए टांग सकते हैं, लेकिन कानूनन आप उस जमीन के मालिक नहीं बनते.

सुशांत सिंह राजपूत और शाहरुख खान का ‘चांद कनेक्शन’

भारत में चांद पर जमीन खरीदने की चर्चा तब सबसे ज्यादा तेज हुई थी, जब दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के बारे में यह खबर आई थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुशांत ने ‘लूनर रजिस्ट्री’ (Lunar Registry) नाम की संस्था के जरिए चंद्रमा के ‘मेयर मस्कोविएंस’ (Mare Muscoviense) क्षेत्र में एक प्लॉट खरीदा था.

इसी तरह बॉलीवुड के किंग खान यानी शाहरुख खान को भी उनके एक ऑस्ट्रेलियाई फैन ने चांद पर जमीन का टुकड़ा गिफ्ट किया था. मगर कानूनी दृष्टि से ये सभी खरीद-फरोख्त केवल एक मनोरंजन या स्मारक उपहार के रूप में ही देखी जाती हैं. अगर कल को कोई देश वहां पहुंचता है, तो आप इस सर्टिफिकेट को दिखाकर उस जमीन पर अपना दावा नहीं ठोक सकते.

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अभिषेक पाण्डेय

लेखक के बारे में

By अभिषेक पाण्डेय

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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