8th Pay Commission को लेकर पेंशनर्स की हुंकार, सरकार के सामने रखीं ये 5 मांगें
पेंशन और वेतन वृद्धि की मांग
8वें वेतन आयोग को लेकर पेंशनर्स ने सरकार के सामने 5 मांगें रखी हैं. जानिए OPS, पेंशन बढ़ोतरी और ₹68,000 न्यूनतम वेतन की पूरी डिटेल.
8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) ने अपनी प्रक्रिया तेज कर दी है. इसी सिलसिले में आयोग ने 7 और 8 सितंबर को चेन्नई में पात्र कर्मचारी और पेंशनभोगी यूनियनों व एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की. 'द हिंदू' की रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक में चेन्नई जीपीओ पेंशनर्स फोरम ने पेंशनभोगियों की वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार और आयोग के सामने 5 प्रमुख मांगें प्रस्तुत कीं.
पेंशनर्स फोरम की 5 सबसे बड़ी मांगें क्या हैं?
चेन्नई जीपीओ पेंशनर्स फोरम ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की समस्याओं और शिकायतों को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित 5 प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित किया:
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली: पेंशनभोगियों की सबसे प्राथमिक मांग न्यू पेंशन स्कीम (NPS) को हटाकर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा पूरी तरह लागू करना है.
- पेंशन और फैमिली पेंशन में बढ़ोतरी: जीवन-यापन के बढ़ते खर्च को देखते हुए बेसिक पेंशन और फैमिली पेंशन की दरों में सम्मानजनक वृद्धि की जाए.
- कम्यूटेशन रिकवरी से राहत: पेंशन कम्यूटेशन (एकमुश्त राशि लेने) की रिकवरी की अवधि और प्रक्रिया में छूट व राहत दी जाए.
- MACP लाभों का संशोधन: 'मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन' (MACP) के तहत मिलने वाले वित्तीय और करियर से जुड़े लाभों में जरूरी सुधार किए जाएं.
- बेहतर भत्ते, छुट्टी और सामाजिक सुरक्षा: सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य-सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं, छुट्टियां और भत्ते प्रदान किए जाएं.
न्यूनतम वेतन और अन्य मांगें भी शामिल
5 मुख्य मांगों के अलावा, प्रतिनिधियों ने कर्मचारी कल्याण से जुड़े कुछ अन्य बड़े मुद्दे भी उठाए:
| विषय | मांग का विवरण |
| न्यूनतम वेतन | न्यूनतम वेतन को ₹68,000 तय करने का आग्रह. |
| वेतन संशोधन तंत्र | एक स्थायी वेतन-संशोधन व्यवस्था (Permanent Wage-Revision Mechanism) का गठन. |
| पे स्केल्स | मौजूदा पे-मैट्रिक्स में 'रनिंग स्केल्स' (Running Scales) को जोड़ना. |
आगे क्या होगा?
आयोग अब अपनी अगली बैठकें चंडीगढ़ (16-18 सितंबर) और बेंगलुरु (7-8 अक्टूबर) में आयोजित करेगा. आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है, जिसकी अंतिम रिपोर्ट मई-जून 2027 तक आने की संभावना है.
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