EPFO की लेट-लतीफी पर अदालत का डंडा, 14 लाख के PF क्लेम में देरी, अब 6% ब्याज भरना होगा
समय पर क्लेम सेटल न करने पर EPFO पर लगा जुर्माना
EPFO ने PF क्लेम में देरी की तो कोर्ट ने 6% ब्याज देने का आदेश दिया. जानिए 14 लाख रुपये के इस मामले से खाताधारकों को क्या फायदा होगा.
EPFO: अगर एम्प्लॉई प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) आपके पीएफ क्लेम का निपटारा समय पर नहीं करता है, तो उसे इसका हरजाना भरना पड़ेगा. मुंबई सबअर्बन डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रीड्रेसल कमीशन ने एक रिटायर्ड कर्मचारी के क्लेम में देरी करने पर ईपीएफओ को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है. अदालत ने ईपीएफओ को 14 लाख रुपये से अधिक के दावे पर 6% सालाना की दर से ब्याज देने का हुक्म दिया है. ईपीएफओ को इस आदेश का पालन करने के लिए 45 दिनों का समय मिला है.
अदालत ने EPFO पर जुर्माना क्यों लगाया?
यह पूरा मामला 'फ्लीट मैरीटाइम सर्विसेज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड' के एक पूर्व कर्मचारी से जुड़ा है. कर्मचारी ने 19 अक्टूबर 2016 को अपने पीएफ के ₹14,06,272 के निपटारे के लिए आवेदन किया था. नियमानुसार, ईपीएफओ को 20 दिनों के भीतर पैसा प्रोसेस करना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
ईपीएफओ का तर्क था कि आवेदन के साथ जरूरी जॉइंट डिक्लेरेशन फॉर्म नहीं लगा था, इसलिए उसने 7 नवंबर को आवेदन लौटा दिया. इसके बाद 2 दिसंबर को पूरे कागजात मिलने पर 14 दिसंबर को क्लेम पास कर दिया गया. हालांकि, ईपीएफओ आयोग के सामने ऐसा कोई लिखित सबूत या अस्वीकृति पत्र पेश नहीं कर सका, जिससे साबित हो सके कि 19 अक्टूबर को जमा किया गया आवेदन वाकई अधूरा था. आयोग ने इसे ईपीएफओ की लापरवाही माना और 9 नवंबर से 13 दिसंबर 2016 तक के 35 दिनों के विलंब के लिए 6% सालाना ब्याज देने का आदेश सुनाया.
आम पीएफ सब्सक्राइबर्स के लिए इस फैसले का क्या मतलब है?
कंज्यूमर कमीशन का यह फैसला देश के करोड़ों पीएफ खाताधारकों के लिए काफी काम का है. इस फैसले से दो बड़ी बातें साफ होती हैं:
- समय-सीमा का पालन अनिवार्य: एम्प्लॉइज प्रॉविडेंट फंड स्कीम, 1952 के तहत पीएफ क्लेम को 20 दिनों के भीतर निपटाना जरूरी है. इसमें बिना वजह देरी होने पर सदस्य कानून की मदद ले सकते हैं.
- दस्तावेज संभालकर रखना जरूरी: अगर कभी ईपीएफओ क्लेम को अधूरा बताकर वापस करता है, तो आपके पास फॉर्म जमा करने की रसीद और ईपीएफओ की तरफ से आई किसी भी लिखित सूचना का रिकॉर्ड होना बेहद जरूरी है. यही दस्तावेज अदालत में आपके पक्ष को मजबूत बनाते हैं.
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