US First Muslim-Majority City Renames Street after Khaleda Zia: अमेरिका के मिशिगन राज्य में स्थित हैमट्रैमक शहर ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया को सम्मान देते हुए अपनी एक सड़क का नाम बदलकर उनके नाम पर कर दिया है. बांग्लादेशी अखबार देश रूपांतर की रिपोर्ट के अनुसार, शहर की कारपेंटर स्ट्रीट को अब खालिदा जिया स्ट्रीट के नाम से जाना जाएगा. इस फैसले को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि हैमट्रैमक अमेरिका का पहला ऐसा शहर है, जहां मुस्लिम समुदाय की आबादी बहुमत में है. इसके साथ ही यह अमेरिका का पहला शहर भी है, जिसकी पूरी सिटी काउंसिल मुस्लिम सदस्यों से बनी हुई है. यह पहला मौका नहीं है जब अमेरिका में किसी बांग्लादेशी नेता के नाम पर सड़क का नाम रखा गया हो. इससे पहले शिकागो शहर में भी एक सड़क का नाम, बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति और खालिदा जिया के पति जियाउर रहमान के नाम पर रखा जा चुका है.
देश रूपांतर के मुताबिक, हैमट्रैमक सिटी काउंसिल ने जोसेफ कैंपाउ स्ट्रीट और कोनॉल्ट स्ट्रीट के बीच स्थित सड़क के एक हिस्से का नाम खालिदा जिया के नाम पर रखने के प्रस्ताव को हाल ही में मंजूरी दी. इस फैसले की जानकारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की मीडिया सेल ने अपने फेसबुक पेज के जरिए दी. मीडिया सेल ने कहा कि सड़क का नाम बदलना खालिदा जिया के नेतृत्व और बांग्लादेश के लिए उनके योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली सराहना का प्रतीक है. बीएनपी मीडिया सेल के अनुसार, वर्तमान हैमट्रैमक सिटी काउंसिल में बांग्लादेशी मूल के चार पार्षद हैं, जिनकी सक्रिय भूमिका के कारण यह निर्णय संभव हो पाया.
2022 में बना अमेरिका का पहला मुस्लिम बहुल शहर
मिशिगन राज्य का हैमट्रैमक शहर की कुल आबादी 28,433 है. यह बांग्लादेशी मूल के प्रवासियों की बड़ी संख्या के लिए जाना जाता है. यहां रहने वाले लोगों में करीब 70 प्रतिशत मुस्लिम हैं. हैमट्रैमक वर्ष 2013 में मुस्लिम-बहुल शहर के रूप में उभरा था. इसके बाद 2015 में यहां की नगर प्रशासन परिषद में भी मुस्लिम सदस्यों का दबदबा हो गया. साल 2022 में शहर ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया, जब यह अमेरिका का पहला ऐसा शहर बना, जहां नगर परिषद के सभी सदस्य मुस्लिम हैं. डेट्रॉयट फ्री प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, हैमट्रैमक की लगभग 40 प्रतिशत आबादी विदेशों में जन्मी है. सिटी हॉल में लगे संकेत बोर्ड अंग्रेजी के साथ-साथ अरबी और बांग्ला भाषाओं में भी लिखे गए हैं. (US First Muslim-Majority City Hamtramck in Michigan)
कैसे अस्तित्व में आया शहर?
हैमट्रैमक, मिशिगन के वेन काउंटी में स्थित, डेट्रॉयट के भीतर एक एनक्लेव है। 2020 की जनगणना में इसकी आबादी 28,433 थी, जो राज्य का सबसे घना आबादी वाला नगर है। शहर का नाम जीन फ्रांस्वा हैमट्रैमक के नाम पर रखा गया है, जो वॉर ऑफ 1812 के दौरान फोर्ट शेल्बी का कमांडर थे. यह शुरू में जर्मन-अमेरिकी किसानों का एक ग्रामीण टाउनशिप था। 1914 में डॉज ऑटोमोबाइल फैक्ट्री खुलने के बाद शहर तेजी से बढ़ा और 1922 में इसे शहर के रूप में शामिल किया गया, ताकि डेट्रॉयट में इसे शामिल करने से बचाया जा सके। 20वीं सदी में पोलिश प्रवासियों की बड़ी संख्या ने शहर की पहचान बनाई।
जनसंख्या घटती गई, फिर प्रवासियों ने बदली संख्या
1950 के दशक में शहर की आबादी 43,000 से अधिक थी, लेकिन 2000 की जनगणना में यह घटकर 22,423 रह गई। हालांकि, 20वीं सदी के अंत में मुस्लिम प्रवासियों की बढ़ती आबादी ने शहर का चेहरा बदल दिया। 2020 की जनगणना में आबादी 28,433 हो गई, जिसमें इन प्रवासी समुदायों का बड़ा योगदान था। यमन और बांग्लादेश से आए प्रवासी सस्ते आवास और रोजगार के कारण यहां बस गए। 2020 तक शहर की 40% से अधिक आबादी विदेश में जन्मी और लगभग 70% मुस्लिम थी। इस शहर के मेयर अमेरिक गलीब और पुलिस प्रमुख और पूरी सिटी काउंसिल मुस्लिम है, जिससे हैमट्रैमक अमेरिका का पहला मुस्लिम-बहुल शहर बन गया।
थोड़ा बहुत विवाद भी स्थानीय निवासियों को खटका
इस बदलाव के साथ आलोचनाएँ और विवाद भी हुए। सड़कों पर भी बदलाव दिखाई दिए, जैसे पोलिश स्थलों की जगह नए प्रवासी व्यवसायों ने ले ली, फैमिली डोनट शॉप अब ताज अल-यमन और क्राकस पोलिश रेस्टोरेंट अब बंगाली सिलहट कैफे बन गया। हालांकि, शहर की रोजमर्रा की जिंदगी में विभिन्न धर्म और जातियों के लोग साथ रहते हैं और साझा स्कूल, सड़कें उन्हें जोड़ते हैं। मेयर गलीब के अनुसार, लोग यहां दोस्ताना हैं, भले ही हम असहमत हों।” पुराने निवासी बताते हैं कि करीब रहने से मतभेदों को सहना पड़ता है.
खालिदा जिया बांग्लादेश की राजनीति में छाई रहीं
खालिदा जिया बीएनपी की लंबे समय तक अध्यक्ष रहीं और तीन बार देश की प्रधानमंत्री बनीं. वे देश की पहली महिला प्रधानमंत्री और मुस्लिम दुनिया की दूसरी प्रधानमंत्री थीं. अपने लंबे राजनीतिक करियर में उन्होंने पार्टी को शीर्ष स्तर पर पहुंचाया. 8 फरवरी 2018 से दो साल से अधिक समय तक वे भ्रष्टाचार के मामले में जेल में थीं. कोरोना काल में उन्हें रिहा किया गया था. शेख हसीना सरकार गिरने के बाद उन्हें 2024 में सभी मामलों से मुक्त किया गया.
80 वर्ष की आयु में हुआ निधन
हालांकि, लंबे समय की बीमारी के बाद उनके शरीर ने साथ नहीं दिया और वे 23 नवंबर को अस्पताल में भर्ती हुईं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ और 11 दिसंबर को उनकी हालत और खराब हो गई, जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और 30 दिसंबर को उनका लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था. 80 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ और अगले दिन उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया.
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