ट्रंप की हत्या की साजिश: पाकिस्तानी नागरिक पर मुकदमा, नैपकिन पर बनाया प्लान, 5000 डॉलर एडवांस दिए

डोनाल्ड ट्रंप को मारने की योजना बनाने में आसिफ मर्चेंट पकड़ा गया था.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऊपर 13 जुलाई को हमला हुआ था, जब एक गोली उनके कान को छूकर निकल गई थी. इससे एक दिन पहले ईरान से संबंधित एक पाकिस्तानी नागरिक अमेरिका में पकड़ा गया था. अब उसके ऊपर मुकदमा चलना शुरू हो रहा है.
न्यूयॉर्क की ब्रुकलिन कोर्ट में इस हफ्ते एक पाकिस्तानी नागरिक के खिलाफ मुकदमा शुरू हुआ है, जिस पर आरोप है कि उसने अमेरिका में बड़े राजनीतिक नेताओं की हत्या कराने की साजिश रची थी. इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम भी संभावित निशाने के तौर पर सामने आया है. आरोपी का नाम आसिफ मर्चेंट है. वह इस समय ब्रुकलिन की एक संघीय अदालत में जूरी के सामने पेश हो रहा है. अगर अदालत उसे दोषी ठहराती है, तो उसे उम्रकैद तक की सजा हो सकती है.
क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी अभियोजकों के मुताबिक, आसिफ मर्चेंट 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले अमेरिका आया था. उस समय देश में राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण था. आरोप है कि इसी दौरान उसने अमेरिका में हत्या की साजिश रचने की योजना बनाई. अप्रैल 2024 में अमेरिका पहुंचने के बाद मर्चेंट ने एक ऐसे व्यक्ति से संपर्क किया, जिसे वह ‘सुपारी किलिंग’ की व्यवस्था कराने वाला समझ रहा था. लेकिन वह व्यक्ति पहले ही अधिकारियों को जानकारी दे चुका था और बाद में एफबीआई का गुप्त मुखबिर बन गया.
इसके बाद एफबीआई ने एक स्टिंग ऑपरेशन चलाया. इस दौरान मर्चेंट ने दो लोगों को 5,000 डॉलर एडवांस भी दिए, जिन्हें वह हत्यारा समझ रहा था, लेकिन वे दोनों अंडरकवर एफबीआई एजेंट निकले. अभियोजकों का कहना है कि यह मुलाकात किसी हमले की दिशा में एक गंभीर और ठोस कदम थी, हालांकि आखिरकार कोई हमला नहीं हो पाया.
होटल की नैपकिन पर बनाई गई योजना
कोर्ट को बताया गया कि बैठकों के दौरान मर्चेंट होटल की नैपकिन पर इमारतों, भीड़ और संभावित निशानों को दिखाकर अपनी योजना समझाता था. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, इससे उसकी तैयारी और इरादे दोनों साफ दिखते हैं. बताया गया कि कथित हत्या नवंबर 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले कराई जानी थी, ताकि अमेरिका में डर और अव्यवस्था फैलाई जा सके.
ट्रंप रैली से ठीक पहले गिरफ्तारी
आसिफ मर्चेंट को 12 जुलाई को गिरफ्तार किया गया, उसी दिन जब वह अमेरिका छोड़ने वाला था. दिलचस्प बात यह है कि इसके ठीक एक दिन बाद पेंसिल्वेनिया के बटलर में ट्रंप की रैली के दौरान गोलीबारी हुई थी, जिसमें ट्रंप के कान में चोट लगी थी. हालांकि गिरफ्तारी के वक्त किसी एक तय लक्ष्य का नाम सामने नहीं आया था, लेकिन कोर्ट के दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि ट्रंप और अमेरिका के कुछ शीर्ष अधिकारी संभावित निशानों में शामिल थे. मर्चेंट पर ‘मर्डर फॉर हायर’ यानी पैसे देकर हत्या कराने की साजिश का आरोप है.
कैसे पकड़ में आया आसिफ?
ब्रुकलिन की संघीय अदालत में गुमनाम जूरी के सामने मध्यस्थ नदीम अली ने कहा, ‘मैं हैरान रह गया.’ उन्होंने बताया कि दो दिनों की बातचीत में मर्चेंट ने उनसे हिटमैन जुटाने को कहा. अभियोजकों ने अदालत में वे रिकॉर्डिंग भी चलाईं, जिन्हें अली ने एफबीआई के लिए गुप्त रूप से रिकॉर्ड किया था. अली की गवाही के अनुसार, मर्चेंट की मुलाकात उनसे एक साझा मित्र के जरिए हुई थी. पाकिस्तान में जन्मे अली अब अमेरिकी नागरिक हैं. वह किशोरावस्था में अमेरिका आए थे और कुछ समय तक अफगानिस्तान में सेना के अनुवादक के रूप में भी काम कर चुके हैं.
अली ने बताया कि मर्चेंट ने उनसे टी-शर्ट के कारोबार में साझेदारी की बात की थी. लेकिन शर्तों में बार-बार बदलाव उन्हें ‘संदिग्ध’ लगे और मर्चेंट के साथ समय बिताने के बाद उन्हें लगा कि कुछ गाड़ियां उनका पीछा कर रही हैं. चिंतित होकर अली ने मई 2024 में एफबीआई से संपर्क किया और इसके बाद मर्चेंट के साथ अपनी बातचीत रिकॉर्ड करने लगे.
कोर्ट में क्या बोला था अभियोजन पक्ष?
सहायक अमेरिकी अभियोजक नीना गुप्ता ने शुरुआती बयान में कहा कि मर्चेंट ने अंततः कथित हिटमैन से मुलाकात की और शुरुआती भुगतान के तौर पर उन्हें 5,000 डॉलर दिए. हालांकि गिरफ्तारी उससे पहले हो गई, जब वह किसी लक्ष्य का नाम बताता. लेकिन उसने अली से कहा था कि लक्ष्य ‘ऐसा कोई होगा जो पाकिस्तान और मुस्लिम दुनिया को नुकसान पहुंचा रहा हो.’ अभियोजकों ने पिछले महीने एक अदालती दस्तावेज में कहा कि मर्चेंट के लैपटॉप पर ट्रंप की रैलियों के स्थानों से जुड़ी खोजें पाई गई थीं. सरकार ने यह नहीं बताया कि उसने और किन संभावित लक्ष्यों पर विचार किया था.
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आरोपी का बचाव
आसिफ मर्चेंट ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है. पहले बैंकिंग सेक्टर में काम कर चुके और बाद में कारोबारी बने मर्चेंट के वकीलों ने उसे एक धार्मिक और शांत स्वभाव का व्यक्ति और एक समर्पित पिता बताया था. बचाव पक्ष के वकील क्रिस्टोफर नेफ ने शुरुआती दलील में कहा कि पूर्व बैंकर से उद्यमी बने मर्चेंट अमेरिका में एक टूरिस्ट के तौर पर आए थे.
बचाव पक्ष ने कोर्ट में कहा कि मर्चेंट का परिवार पाकिस्तान और ईरान दोनों देशों में रहता है, लेकिन उसे किसी वास्तविक हत्या की साजिश से जोड़ने वाला कोई पुख्ता सबूत नहीं है. नेफ ने जूरी से कहा, ‘वह आपसे यह उम्मीद करते हैं कि आप सिर्फ सरकार द्वारा सबूतों को जिस कथा में फिट करने की कोशिश की जा रही है, उसे ही न स्वीकार करें, बल्कि उन सबूतों से सामने आने वाली पूरी कहानी पर भी विचार करें.’
ईरान कनेक्शन पर अमेरिकी एजेंसियों का शक
अमेरिकी अधिकारी लंबे समय से यह आशंका जताते रहे हैं कि ईरान, 2020 में हुए ड्रोन हमले का बदला लेना चाहता है, जिसमें ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी मारे गए थे. यह हमला ट्रंप के कार्यकाल में किया गया था. पुराने अदालती दस्तावेजों के अनुसार, मर्चेंट अमेरिका आने से पहले ईरान में रह चुका था और सुलेमानी की मौत को लेकर वह अमेरिकी नेताओं से नाराज़ था. हालांकि ईरान हमेशा ऐसे किसी भी हत्या-षड्यंत्र में अपनी भूमिका से इनकार करता रहा है.
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अमेरिकी अटॉर्नी जनरल का बयान
अमेरिका के अटॉर्नी जनरल मेरिक गारलैंड ने कहा कि न्याय विभाग वर्षों से अमेरिकी अधिकारियों के खिलाफ ईरान की बदले की कोशिशों का सख्ती से जवाब दे रहा है. उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका किसी भी विदेशी शासन को अपने नेताओं या नागरिकों को निशाना बनाने की इजाजत नहीं देगा और ऐसी साजिशों में शामिल लोगों को हर हाल में जवाबदेह ठहराया जाएगा.
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By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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