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ईरान में आधी रात इंटरनेट ब्लैकआउट, प्रिंस की कॉल पर सड़कों पर उतरी जनता, सरकार के खिलाफ हो रही नारेबाजी

Updated at : 09 Jan 2026 7:13 AM (IST)
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Iran Protest erupts after Internet Blackout.

ईरान में इंटरनेट बंद होने के बाद सड़कों पर उतरी जनता. फोटो- स्क्रीनशॉट.

Iran Protest after Internet Blackout: ईरान में गुरुवार को हालात बिगड़ने के बाद आधी रात इंटरनेट बंद कर दिया गया. प्रिंस रजा पहलवी के आह्वान के बाद पिछले 12 दिनों से चल रहा जनता का प्रदर्शन तेज हो गया है. इसे रोकने के लिए ईरानी सरकार ने संचार व्यवस्था रोक दी है.

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Iran Protest after Internet Blackout: ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए प्रदर्शन अब और तेज हो गए हैं. गुरुवार रात ईरान में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए, जब अचानक इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी गईं. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया, जब देश में सरकार और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ लोगों का गुस्सा तेजी से बढ़ रहा है. इंटरनेट कंपनी क्लाउडफ्लेयर और डिजिटल अधिकारों पर नजर रखने वाले संगठन नेटब्लॉक्स ने पुष्टि की कि ईरान में इंटरनेट बंद किया गया है. दोनों का कहना है कि यह सरकार की ओर से किया गया कदम है. संस्था के मुताबिक, यह कदम सरकार की ओर से विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए की जा रही डिजिटल सेंसरशिप का हिस्सा है, जिससे अहम समय पर लोगों का आपस में संपर्क टूट गया है.

इससे पहले भी ईरान में जब इंटरनेट बंद किया गया था, तब उसके बाद विरोध प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई देखने को मिली थी. इंटरनेट बंद होने का समय संयोग से नहीं, बल्कि उसी वक्त आया जब ईरान के पूर्व शाह परिवार के वारिस रजा पहलवी ने लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की थी. सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और संदेशों में दावा किया गया कि तेहरान की सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग जुटे. लोगों का कहना था कि अब उनका सब्र जवाब दे चुका है और खामेनेई तथा उनके सहयोगियों को सत्ता छोड़नी चाहिए. रजा पहलवी, ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे हैं, जिन्हें 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद देश छोड़ना पड़ा था.

ईरान में लोग सड़कों पर क्यों उतरे

पिछले कुछ वर्षों से ईरान की आम जनता महंगाई, बेरोजगारी और खराब आर्थिक हालात से जूझ रही है. देश में वार्षिक महंगाई रिकॉर्ड 42% तक पहुंच गई है, जबकि मुद्रा का अवमूल्यन होते-होते यह 1 डॉलर के बदले 14 लाख तोमान का आंकड़ा भी पार कर गया है. अमेरिकी प्रतिबंधों ने हालात और बिगाड़ दिए हैं, वहीं इजरायल से तनाव भी बढ़ा है. इन सब कारणों से करीब 50 साल से सत्ता में बैठी अयातुल्लाओं की सरकार के खिलाफ नाराजगी खुलकर सामने आ रही है. कई प्रदर्शनकारी खुलकर शाह के समर्थन में नारे लगा रहे हैं. पहले ऐसा करना जानलेवा हो सकता था, लेकिन अब लोग खुलकर राजशाही की वापसी की बात करने लगे हैं. इससे साफ है कि लोगों का गुस्सा कितनी हद तक पहुंच चुका है.

सड़कों पर गूंजे नारे

रजा पहलवी ने गुरुवार और शुक्रवार रात 8 बजे प्रदर्शन करने की अपील की थी. तय समय पर तेहरान समेत कई इलाकों में लोग सड़कों पर निकल आए. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ ने “तानाशाह मुर्दाबाद” और “इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए. कुछ जगहों पर लोग “राजा अमर रहें”, “खामेनेई मुर्दाबाद” और “यह आखिरी लड़ाई है, पहलवी लौटेगा” जैसे नारे भी लगाते दिखे. हजारों लोगों की मौजूदगी की खबरें सामने आईं.

रजा पहलवी का बयान

रज़ा पहलवी ने अपने संदेश में कहा कि पूरी दुनिया ईरान की जनता को देख रही है. उन्होंने लोगों से एकजुट होकर सड़कों पर उतरने और अपनी मांगें साफ-साफ रखने की अपील की. उन्होंने सरकार और रिवोल्यूशनरी गार्ड को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर लोगों पर ज़ुल्म किया गया, तो दुनिया और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे नजरअंदाज नहीं करेंगे. पहलवी ने यह भी कहा कि प्रदर्शन कितने बड़े होते हैं, उसके आधार पर वह आगे की योजना बताएंगे.

तीन साल में सबसे बड़ा आंदोलन

दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ यह आंदोलन पिछले तीन सालों में इस्लामिक सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा माना जा रहा है. शुरुआत तेहरान के व्यापारियों से हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे यह विश्वविद्यालयों और ग्रामीण इलाकों तक फैल गया. अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, अब तक हिंसा में कम से कम 39 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है.

ट्रंप के बयान पर ईरान की नाराजगी

पिछले हफ्ते डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या होती है, तो अमेरिका उनकी मदद करेगा. ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन ईरान पर कड़ी कार्रवाई करेगा. इस बयान पर ईरान के विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध जताया. मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका का यह दावा पाखंड भरा है और उसका मकसद ईरान के आंतरिक मामलों में दखल देना और अपने पुराने अपराधों पर पर्दा डालना है. हालांकि, हालात को लेकर ईरानी सरकार के भीतर भी अलग-अलग राय देखने को मिल रही है. 

सरकार का नरम गरम रूप

राष्ट्रपति मसूद पेशेज्कियान ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों से निपटते वक्त सरकार को पूरी सावधानी और संयम बरतना चाहिए. उन्होंने हिंसा से बचने, बातचीत करने और लोगों की बात सुनने पर जोर दिया है. लेकिन दूसरी ओर, देश के शीर्ष नेता ज्यादा सख्त रुख अपनाते नजर आ रहे हैं. इसी हफ्ते सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा था कि दंगे करने वालों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए. वहीं, मुख्य न्यायाधीश गोलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई ने साफ चेतावनी दी कि जो लोग अशांति फैलाएंगे या उसका समर्थन करेंगे, उनके साथ किसी तरह की नरमी नहीं होगी. उनका कहना है कि ऐसे लोग ईरान के दुश्मनों के इशारे पर काम कर रहे हैं.

यूएन ने भी जताई चिंता

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने ईरान में हो रही हिंसा पर चिंता जताई है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने कहा है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान होने वाली मौतों को हर हाल में रोका जाना चाहिए. उनके प्रवक्ता स्टेफान दुजारिक के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र ने ईरानी सरकार से लोगों को अपनी बात कहने, शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने और अपनी मांगें रखने का अधिकार देने की अपील की है.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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