China Moon Mission: चांद पर जाने का सपना हर देश देखता है, लेकिन चीन इस सपने को जमीन के नीचे उतरकर पूरा करने की तैयारी कर रहा है. चांद पर जाने से पहले उसके अंतरिक्ष यात्री जिन्हें ताइकोनॉट कहा जाता है अंधेरी, ठंडी और सुनसान गुफाओं में भेजे गए. सुनने में अजीब लगता है, लेकिन मकसद बिल्कुल साफ है कि चांद जैसे हालात को धरती पर ही महसूस करना, ताकि असली मिशन में कोई चूक न हो.
China Moon Mission in Hindi: करस्ट गुफाओं में ताइकोनॉट्स की अनोखी ट्रेनिंग
इस खास ट्रेनिंग के तहत चीन ने 28 ताइकोनॉट्स को देश के चोंगछिंग स्थित वूलोंग नेशनल पार्क की करस्ट यानी चूना पत्थर की गुफाओं में भेजा. यह इलाका बेहद दूर-दराज और सुनसान है. यह ट्रेनिंग पूरे 6 दिन और 5 रात चली, जिसमें अंतरिक्ष यात्रियों को लगभग पूरी तरह अंधेरे में रहना पड़ा. सभी को चार अलग-अलग समूहों में बांटा गया, जो बारी-बारी से गुफाओं के अंदर रहे. यह चीन की पहली ऐसी ट्रेनिंग है, जो सीधे तौर पर भविष्य की चंद्रमा पर मानव लैंडिंग को ध्यान में रखकर की गई.
मिशन की कमान संभालने वाले अनुभवी ताइकोनॉट
इस पूरे अभ्यास की अगुवाई की ये ग्वांगफू ने. ये वही ताइकोनॉट हैं जो शेन्झोउ-14 मिशन पर उड़ान भर चुके हैं और 2016 में यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) की CAVES ट्रेनिंग में हिस्सा ले चुके हैं ये ग्वांगफू के अनुसार, गुफाओं में किया गया यह अभ्यास चाद पर होने वाले असली मिशन से सीधे जुड़ा है. इससे अंतरिक्ष यात्रियों को मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से कठिन हालात के लिए तैयार किया जाता है.
गुफाओं में चांद जैसे हालात कैसे बनाए गए?
गुफाओं के अंदर जो माहौल था, वह काफी हद तक चांद जैसा ही रखा गया. यहां ताइकोनॉट्स को झेलना पड़ा बेहद कम रोशनी, तापमान में अचानक बदलाव, बाहर से संपर्क में देरी और हवा-पानी जैसे जरूरी संसाधनों की कमी. चांद पर एक दिन करीब 14 पृथ्वी दिनों के बराबर होता है और वहां रात के समय तापमान -130 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है. इन्हीं हालात की झलक गुफाओं में दी गई. (China Moon Mission Astronauts Cave Training Lunar Preparation in Hindi)
ट्रेनिंग के दौरान क्या-क्या सिखाया गया?
खड़ी चट्टानों से उतरने का अभ्यास जिसमें ताइकोनॉट्स ने रस्सियों की मदद से खड़ी चट्टानों से उतरने की प्रैक्टिस की. यह अभ्यास चाँद पर मौजूद गहरे गड्ढों और ऊबड़-खाबड़ जमीन पर चलने के लिए जरूरी माना जाता है, खासकर तब जब गुरुत्वाकर्षण कम हो.
गुफाओं का नक्शा तैयार करना. यहां अंतरिक्ष यात्रियों ने सीमित उपकरणों की मदद से गुफाओं का सर्वे किया और रास्तों का नक्शा बनाया. यह हुनर चांद पर भूवैज्ञानिक अध्ययन करने और भविष्य में रहने की जगह तय करने में काम आएगा. इस ट्रेनिंग में ताइकोनॉट्स को सीमित हवा और पानी में काम करना सिखाया गया. साथ ही संसाधनों को दोबारा इस्तेमाल करना और बंद जगह में रहने के मानसिक दबाव से निपटना भी सिखाया गया. ये सब लंबे समय तक चलने वाले चंद्र मिशनों के लिए बेहद जरूरी है.
चीन की बढ़ती अंतरिक्ष ताकत की झलक
यह पूरी ट्रेनिंग चीन के बढ़ते अंतरिक्ष अनुभव का हिस्सा है. 2021 से अब तक चीन अपने स्पेस स्टेशन पर तीन मानव मिशन पूरे कर चुका है 2024 में चांग’ए-6 मिशन चांद के दूर वाले हिस्से से मिट्टी और चट्टानों के नमूने लेकर लौटा. इन उपलब्धियों से साफ है कि चीन चांद को लेकर तेजी से आगे बढ़ रहा है. चीन की योजना सिर्फ चांद पर झंडा गाड़ने की नहीं है, बल्कि वहां जमीन के नीचे ठिकाने बनाने की भी है. इससे अंतरिक्ष यात्रियों को खतरनाक रेडिएशन और छोटे उल्कापिंडों
से बचाया जा सकेगा. गुफाओं में दी जा रही ट्रेनिंग इसी सोच से जुड़ी है. यह योजना रूस और दूसरे देशों के साथ मिलकर बनाए जा रहे International Lunar Research Station (ILRS) का हिस्सा है. इसका लक्ष्य 2030 तक इंसानों को चांद पर उतारना है.
दुनिया से सीखकर अपनी तैयारी
चीन का यह अभ्यास दुनिया के दूसरे एनालॉग स्पेस मिशनों से प्रेरित है, जैसे NASA का HI-SEAS मिशन (हवाई). ये ग्वांगफू के अनुसार, ऐसी ट्रेनिंग इसलिए जरूरी है ताकि ताइकोनॉट्स सिर्फ चांद पर जिंदा ही न रहें, बल्कि वहां जाकर सही ढंग से काम भी कर सकें. चीन ने संकेत दिए हैं कि आगे चलकर और भी ऐसी ट्रेनिंग कराई जाएगी. साफ है कि इंसान की अगली बड़ी छलांग की तैयारी अब पूरी रफ्तार में है.
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