China Mega Embassy: ब्रिटेन में चीन के नए मेगा दूतावास को लेकर हड़कंप मचा हुआ है. फ्री तिब्बत और कई समर्थक संगठन इस योजना के खिलाफ जोरदार अभियान चला रहे हैं. उनका कहना है कि यह दूतावास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है और पहले से असुरक्षित निर्वासित समुदायों की हालत और भी जोखिम भरी हो सकती है. ब्रिटेन सरकार 20 जनवरी को इस प्रस्ताव पर अपना फैसला देने वाली है.
China Mega Embassy in Hindi: यूरोप का सबसे बड़ा दूतावास
रॉयल मिंट कोर्ट में बनने वाला यह दूतावास मंजूर हो गया तो यूरोप में चीन का सबसे बड़ा दूतावास बन जाएगा. लगभग 20,000 वर्ग मीटर में फैले इस दूतावास का आकार सामान्य दूतावास के मुकाबले दस गुना ज्यादा है. अभियानकर्ताओं ने कहा कि इसका आकार और स्थान जासूसी और गुप्त खुफिया गतिविधियों की संभावना बढ़ाता है. लंदन में रहने वाले तिब्बती और तिब्बत समर्थक समूहों ने हाउसिंग सेक्रेटरी स्टीव रीड को खुले पत्र में इस योजना को पूरी तरह खारिज करने की अपील की है.
राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में
पत्र में चेतावनी दी गई है कि यह दूतावास महत्वपूर्ण संचार नेटवर्क के पास होगा, जिसमें अंडरसी केबल भी शामिल हैं जो ब्रिटेन की इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी हैं. MI5 की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह जगह मंजूर होने पर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हो सकती है. ये चिंता चीन की ब्रिटेन में खुफिया गतिविधियों के हालिया खुलासों के साथ और बढ़ जाती है.
जासूसी और गुप्त गतिविधियां
जांचकर्ताओं ने ऐसे मामलों का खुलासा किया है, जिसमें बीजिंग से जुड़े लोग वेस्टमिंस्टर के संपर्क में आने वाले लोगों को संवेदनशील जानकारी देने के लिए पैसे का लालच दे रहे थे. तिब्बती, उइगर, हांगकांग और चीनी विरोधी समूहों का कहना है कि इस प्रस्ताव का मूल्यांकन चीन के लंबे समय से चल रहे ट्रांसनेशनल दमन के रिकॉर्ड को देखकर ही होना चाहिए. (China Mega Embassy UK National Security Threat in Hindi)
विदेश में उत्पीड़न के मामले
फयूल की रिपोर्ट के अनुसार, इन समूहों ने विदेश में सक्रिय कार्यकर्ताओं के खिलाफ उत्पीड़न, धमकी और हिंसा के कई मामले बताए. खासतौर पर 2022 में मैनचेस्टर की घटना में एक हांगकांग प्रदर्शनकारी को चीनी काउंसुलेट में खींचकर हमला किया गया था. चीन ने यह रॉयल मिंट कोर्ट की संपत्ति 2018 में खरीदी थी. टॉवर हैमलेट्स काउंसिल ने 2022 में सुरक्षा चिंताओं के कारण योजना को खारिज कर दिया था. लेकिन चीन ने अगस्त 2024 में वही प्रस्ताव फिर से प्रस्तुत किया, जिससे ब्रिटेन सरकार ने फैसला लेने की जिम्मेदारी संभाली. अभियानकर्ता लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और कहते हैं कि यह दूतावास सिर्फ कूटनीतिक दफ्तर नहीं, बल्कि एक रणनीतिक केंद्र होगा. 20 जनवरी के फैसले से पहले बड़े प्रदर्शन होने की संभावना है.
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