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ग्रीनलैंड पर क्यों टिकी है ट्रंप की नजर, बर्फीली परत के नीचे छुपा है अकूत खजाना

Donald Trump Greenland Plan: वेनेजुएला के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब ग्रीनलैंड पर नजरें गड़ा दी हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा, खनिज संसाधनों और आर्कटिक रणनीति पर अमेरिका के रुख से डेनमार्क और NATO में चिंताएं बढ़ गई हैं. ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के इरादों और इसके वैश्विक असर के बारे में जानें.

Donald Trump Greenland Plan: साल 2026 की शुरुआत दुनिया के लिए किसी झटके से कम नहीं रही. पहले अमेरिका ने वेनेजुएला पर हवाई हमले किए, फिर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके घर से पकड़कर न्यूयॉर्क ले आया. दुनिया अभी इसी घटनाक्रम को समझ ही रही थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक और बड़ा संकेत दे दिया. इस बार उनकी नजर वेनेजुएला के तेल के बाद ग्रीनलैंड पर है. व्हाइट हाउस ने साफ कहा है कि ट्रंप ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने के विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं. इसमें सैन्य कार्रवाई तक की बात शामिल है. डेनमार्क ने इसे खतरनाक कदम बताया है और कहा है कि ऐसा हुआ तो NATO टूट सकता है.

Donald Trump Greenland Plan in Hindi: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की मंशा क्या है?

ग्रीनलैंड कभी डेनिश कॉलोनी हुआ करता था. आज, यह डेनमार्क के तहत एक ऑटोनॉमस इलाका है. यह यूरोप और नॉर्थ अमेरिका के बीच नॉर्थ अटलांटिक महासागर में स्थित है. कनाडा से बैफिन खाड़ी के ठीक पार स्थित यह द्वीप दुनिया के सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक माना जाता है और बर्फीली परत के नीचे छुपा है अकूत खजाना है. इसी वजह से डोनाल्ड ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड पर है; इसके बारे में और पढ़ें नीचे.

लोकेशन का फायदा: अमेरिका की सुरक्षा की चाबी

ग्रीनलैंड की अहमियत शीत युद्ध के समय से रही है. अमेरिका का यहां बड़ा सैन्य अड्डा है, जिसे पिटुफिक स्पेस बेस कहा जाता है, पहले इसे थुले एयर बेस कहा जाता था. यहां से अमेरिका रूस, चीन या उत्तर कोरिया से आने वाली मिसाइलों पर नजर रख सकता है. जरूरत पड़ने पर यहीं से यूरोप और एशिया की तरफ मिसाइलें और सैन्य जहाज भेजे जा सकते हैं. यही वजह है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जाता है.

खनिजों का खजाना: चीन की पकड़ तोड़ने की कोशिश?

ग्रीनलैंड करीब 8.36 लाख वर्ग मील में फैला है और खनिज संसाधनों से भरपूर है. यहां बड़ी मात्रा में रेयर अर्थ मिनरल्स पाए जाते हैं. इनका इस्तेमाल मोबाइल फोन, कंप्यूटर, बैटरी, इलेक्ट्रिक गाड़ियों और हथियारों तक में होता है. फिलहाल इन खनिजों की सप्लाई पर चीन का दबदबा है और अमेरिका लंबे समय से इस निर्भरता को खत्म करना चाहता है. हालांकि 2021 में ग्रीनलैंड ने यूरेनियम खनन पर रोक लगा दी थी. ट्रंप भले ही कहें कि हमें ग्रीनलैंड खनिजों के लिए नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चाहिए, लेकिन उनके पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वॉल्ट्ज ने जनवरी 2024 में फॉक्स न्यूज से कहा था कि सरकार की दिलचस्पी क्रिटिकल मिनरल्स और प्राकृतिक संसाधनों में है. (Donald Trump Greenland Plan After Venezuela in Hindi)

रूस और चीन पहले ही इस इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं

जलवायु परिवर्तन की वजह से आर्कटिक की बर्फ तेजी से पिघल रही है. इससे नए समुद्री रास्ते खुल रहे हैं और खनिजों तक पहुंच आसान हो रही है. रूस और चीन पहले ही इस इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं. अमेरिका नहीं चाहता कि ग्रीनलैंड और उसके आसपास रूस या चीन का दबदबा बढ़े. दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप खुद जलवायु संकट को “सबसे बड़ा धोखा” कह चुके हैं, लेकिन उसी बदलाव से बने मौके अमेरिका को लुभा रहे हैं.

क्या ग्रीनलैंड पर हमला हो सकता है?

मादुरो की गिरफ्तारी के अगले ही दिन ट्रंप ने फिर कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है. व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने भी यही बात दोहराई. ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा कि ग्रीनलैंड इस वक्त बेहद रणनीतिक है और वहां रूसी व चीनी जहाज मौजूद हैं. उन्होंने यह भी कहा कि डेनमार्क अकेले इसे संभाल नहीं सकता. इसी बीच स्टीफन मिलर की पत्नी और राइट विंग पॉडकास्टर कैटी मिलर ने  एक्स पर ग्रीनलैंड का नक्शा पोस्ट किया, जिस पर अमेरिकी झंडा लिपटा था और कैप्शन था कि SOON.

NATO पर मंडराता खतरा

अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई की तो NATO में बड़ी दरार पड़ सकती है. डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने साफ कहा कि अगर अमेरिका किसी NATO देश पर हमला करता है तो NATO वहीं खत्म हो जाएगा. इसके बाद ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, पोलैंड, इटली, स्पेन और डेनमार्क ने साझा बयान जारी कर कहा कि ग्रीनलैंड उसके लोगों का है और इस पर फैसला सिर्फ डेनमार्क और ग्रीनलैंड को करने का हक है. NATO ने भी कहा है कि आर्कटिक इलाका उसकी प्राथमिकता में है.

अमेरिका की आधिकारिक सफाई क्या कहती है?

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट ने एएफपी से कहा कि ग्रीनलैंड को हासिल करना ट्रंप के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और उनकी टीम सभी विकल्पों पर चर्चा कर रही है और सैन्य विकल्प हमेशा मौजूद रहता है. हालांकि वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सांसदों से कहा कि ट्रंप की पहली पसंद ग्रीनलैंड को खरीदने की है, न कि उस पर हमला करने की.

वेनेजुएला और ग्रीनलैंड की कहानी एक जैसी?

अमेरिका का कहना है कि निकोलस मादुरो को ड्रग तस्करी और भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़ा गया. लेकिन विशेषज्ञों और सोशल मीडिया पर यह चर्चा है कि वेनेजुएला का तेल भी अमेरिका की दिलचस्पी की वजह हो सकता है. ठीक इसी तरह ग्रीनलैंड के मामले में भी माना जा रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में खनिज संसाधनों पर नजर है.

डेनमार्क ने चेताया है कि अमेरिका का कोई भी टेकओवर NATO के अंत की शुरुआत हो सकता है. ग्रीनलैंड की आबादी सिर्फ करीब 56 हजार है और ज्यादातर लोग इनुइट समुदाय से हैं. दुनिया ने लंबे समय तक इस इलाके को नजरअंदाज किया. एपी के मुताबिक, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कब्जा इसलिए किया था ताकि यह नाजी जर्मनी के हाथ न लगे और उत्तरी अटलांटिक के समुद्री रास्ते सुरक्षित रहें. अब एक बार फिर बर्फ पिघलने के साथ ग्रीनलैंड दुनिया की ताकतों के बीच खींचतान का केंद्र बन गया है.

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Govind Jee
Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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