21 C
Ranchi

लेटेस्ट वीडियो

ग्रीनलैंड लेने के लिए अमेरिका के पास सैन्य विकल्प भी, यूरोपीय एकजुटता के बाद व्हाइट हाउस का बड़ा बयान

Greenland Acquisition by US Military Options Donald Trump: ग्रीनलैंड को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है. एक ओर डेनमार्क लगातार तरह तरह की धमकियां दे रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका इसे लेने के लिए पूरी कोशिश में जुटा हुआ है. अब ट्रंप प्रशासन इसके लिए सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है. व्हाइट हाउस ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए जानकारी दी.

Greenland Acquisition by US Military Options Donald Trump: अमेरिका की वैश्विक रणनीति को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें ग्रीनलैंड को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोच ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल पैदा कर दी है. व्हाइट हाउस के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड को अमेरिका के दायरे में लाने के विभिन्न विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है और जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्प को भी पूरी तरह नकारा नहीं गया है. व्हाइट हाउस ने बताया कि ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अहम मसला मानते हैं. आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच ट्रंप प्रशासन इसे एक रणनीतिक केंद्र के रूप में देख रहा है. इसी कारण हाल के दिनों में ग्रीनलैंड को हासिल करने का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है. हालांकि, ग्रीनलैंड पहले ही कई बार साफ कर चुका है कि वह अमेरिका का हिस्सा बनने के पक्ष में नहीं है.

विकल्पों पर मंथन, सैन्य रास्ता भी खुला

व्हाइट हाउस के बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति और उनकी टीम इस विदेश नीति लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए कई संभावनाओं पर काम कर रही है. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ओवल ऑफिस में इस विषय पर सक्रिय चर्चा चल रही है और सलाहकार अलग-अलग विकल्पों का मूल्यांकन कर रहे हैं. इनमें ग्रीनलैंड को सीधे खरीदने से लेकर उसके साथ ‘कॉम्पैक्ट ऑफ फ्री एसोसिएशन’ (COFA) जैसा समझौता करने तक के प्रस्ताव शामिल हैं. हालांकि, COFA समझौता ट्रंप की उस महत्वाकांक्षा से कम होगा, जिसके तहत वे 57 हजार आबादी वाले इस द्वीप को अमेरिका का हिस्सा बनाना चाहते हैं.

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिना लेविट ने ग्रीनलैंड के मसले पर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप इस क्षेत्र को अमेरिका की सुरक्षा के लिए अहम मानते हैं. उनका मानना है कि आर्कटिक में चीन और रूस जैसे देशों का मुकाबला करने के लिए ग्रीनलैंड पर नियंत्रण आवश्यक हैं. लेविट के अनुसार, अमेरिका ग्रीनलैंड को लेने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है, इसमें अमेरिकी सेना का उपयोग भी शामिल है, जो राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में है. हालांकि अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने इस मसले पर कुछ नरमी दिखाई है. उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई की योजना फिलहाल नहीं है. अमेरिका की पहली पसंद ग्रीनलैंड को डेनमार्क से लेने पर है. 

ट्रंप का संकेत और कूटनीति पर जोर

ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया था कि ग्रीनलैंड पर कोई बड़ा फैसला अगले करीब दो महीनों में लिया जा सकता है, खासतौर पर तब जब वेनेजुएला की स्थिति स्थिर हो जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप की पहली प्राथमिकता हमेशा कूटनीति और सौदेबाजी रहती है. यदि ग्रीनलैंड को लेकर कोई “अच्छा सौदा” संभव हुआ, तो वही उनका पसंदीदा रास्ता होगा. ग्रीनलैंड की संभावित कीमत को लेकर फिलहाल कोई जानकारी साझा नहीं की गई है.

खनिज संसाधनों में छिपी रणनीति

अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि वहां ऐसे खनिज संसाधन मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल उन्नत तकनीक और सैन्य उद्देश्यों में किया जा सकता है. हालांकि, श्रमिकों की कमी, कमजोर बुनियादी ढांचे और अन्य व्यावहारिक चुनौतियों के चलते इन संसाधनों का अब तक व्यापक दोहन नहीं हो सका है.

यूरोप का समर्थन, डेनमार्क की आपत्ति

ग्रीनलैंड और डेनमार्क ने इस पूरे मुद्दे पर बातचीत के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से जल्द मुलाकात की मांग की है. ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्जफेल्ट ने कहा कि 2025 भर अनुरोध के बावजूद अब तक ऐसी बैठक संभव नहीं हो पाई है. वहीं, डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने उम्मीद जताई कि रुबियो से बातचीत होने पर कई गलतफहमियां दूर हो सकेंगी. वहीं डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने अमेरिका के किसी भी तरह के एडवेंचर पर सख्त चेतावनी दी है. उन्होंने सोमवार को अपने एक बयान में कहा कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर हमला करता है, तो नाटो समाप्त हो जाएगा.

नाटो हो जाएगा समाप्त

उन्होंने  डेनिश प्रसारक TV2 से कहा, “अगर संयुक्त राज्य अमेरिका किसी अन्य नाटो देश पर सैन्य हमला करने का फैसला करता है, तो सब कुछ खत्म हो जाएगा. इसका मतलब नाटो भी और वह सुरक्षा व्यवस्था भी, जो द्वितीय विश्व युद्ध के अंत से अब तक चली आ रही है.” इससे पहले फ्रेडेरिक्सन ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका की सोच पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से “धमकियां देना बंद करने” की अपील की थी. फ्रेडरिक्सन ने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की जरूरत की बात करना बिल्कुल भी तर्कसंगत नहीं है. डेनिश साम्राज्य में शामिल तीनों देशों में से किसी को भी अपने अधीन करने का अमेरिका को कोई अधिकार नहीं है.”

इस बीच, ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने दोहराया कि द्वीप बिक्री के लिए नहीं है और इसके भविष्य का फैसला केवल ग्रीनलैंड के लोग ही करेंगे. उन्होंने ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड और स्पेन सहित यूरोपीय देशों के उस समर्थन के लिए आभार जताया, जिसमें संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और सीमाओं की अक्षुण्णता जैसे सिद्धांतों की रक्षा की बात कही गई है.

NATO में मचा बवाल

हालांकि इस मसले में अमेरिका के सैन्य हमले का विकल्प इस मामले को गंभीर बना रहा है. इसमें तीनों पक्ष- ग्रीनलैंड, डेनमार्क और अमेरिका नाटो के हिस्सा हैं. ऐसे में अगर अमेरिका ग्रीनलैंड को हथियाने की कोशिश करता है, तो ऐसा पहली बार होगा कि कोई नाटो देश किसी सदस्य देश पर ही हमला कर दे. यह पूरे यूरोप में चिंता का कारण बन रहा है, वैसे भी ट्रंप नाटो के बजट को लेकर पहले ही यूरोपीय देशों को अल्टीमेटम दे चुके हैं. 

रूस से लड़ने के लिए अमेरिका अपने चारों ओर सुरक्षा घेरा तैयार कर रहा है. इसमें मुनरो डॉक्ट्रिन की वापसी के साथ ही वेनेजुएला में सत्ता पलट किया जा चुका है. अन्य देशों को अमेरिका की ओर से लगातार धमकियां दी जा रही हैं. अगर ऐसी ही स्थिति जारी रही, तो आने वाले समय में सैन्य संघर्ष और बढ़ सकता है और नाटो गठबंधन भी टूट सकता है. 

ये भी पढ़ें:-

इमरान खान का खौफ! पाकिस्तान में पुलिस ने शादी से 7 लोगों को उठाया, 14 दिन के लिए किया नजरबंद, आरोप क्या?

अमेरिकी इस्लामी उपदेशक की ब्रिटेन में एंट्री बैन, स्टार्मर सरकार ने नफरती मौलाना पर क्यों लगाया प्रतिबंध? 

आओ मुझे पकड़ो… मादुरो के बाद ट्रंप को एक और राष्ट्रपति ने ललकारा, कहा- मातृभूमि के लिए फिर से हथियार उठाऊंगा

Anant Narayan Shukla
Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

संबंधित ख़बरें

Trending News

जरूर पढ़ें

वायरल खबरें

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel