प्रतीक उर रहमान पर माकपा नेता सलीम का तंज, बोले- मैंने जिसे मंच दिया तृणमूल ने उसे सड़क पर ला दिया
Published by : Ashish Jha Updated At : 22 Feb 2026 8:56 PM
Prateek Ur Rahman: माकपा के युवा नेता रहे प्रतीक उर रहमान ने लाल झंडा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन कर लिया है. सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हो रही है. एक वामपंथी नेता का तृणमूल कांग्रेस में शामिल होना बंगाल की राजनीति में विमर्श का विषय है. माकपा ने अपने युवा नेता के पार्टी छोड़ने पर तंज कसते हुए उसकी गिरती हुई हैसियत की ओर संकेत दिया है.
मुख्य बातें
Prateek Ur Rahman: कोलकाता : सीपीएम के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने प्रतीक उर रहमान के तृणमूल कांग्रेस का दामन थामने पर तंज कसा है. उन्होंने कहा है कि हमने जिसे मंच दिया था, तृणमूल उसे सड़क पर ले आयी है. उन्होंने कहा कि प्रतीक जब तक माकपा में था तभी तक उसका मोल था. तृणमूल कांग्रेस एक हफ्ते में ही प्रतीक उर को भूल जाएगी. मो सलीम ने आगे कहा- हमने उन्हें मंच दिया, पद और सम्मान दिया था. तृणमूल के लोगों ने उन्हें सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है. तृणमूल में प्रतीक की क्या हैसियत है इससे पता चलता है.
प्रतीक का कोई मोल नहीं
अखिल भारतीय लोकतांत्रिक महिला संघ की पश्चिम बंगाल राज्य समिति के एक कार्यक्रम में बोलते हुए मो सलीम ने कहा- कल, प्रतीक उर रहमान ने तृणमूल के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के हाथों से तृणमूल कांग्रेस का झंडा थामा. उन्हें अभिषेक के कार्यालय के बाहर सड़क पर तृणमूल का झंडा पकड़े खड़े देखा गया. हम युवाओं को मंच देते हैं. जिसे हमने मंच दिया, उसे पहले ही दिन सड़क पर ला खड़ा कर दिया गया. प्रतीक का मोल उस पार्टी में उतना ही है.
हर कोशिश रही नाकाम
इस अवसर पर सलीम ने कहा- प्रतीक उर रहमान पर एक बार सीपीएम में रहते हुए हमला हुआ था. उन पर तृणमूल समर्थित बदमाशों द्वारा पीटे जाने का आरोप लगाया गया था. फिर भी, अगर वे अपना सिर सीधा रखते हैं, तो वे लालच दिखाते हैं. उनके शब्दों में- मैं जानता हूं कि जिन्होंने उन्हें खरीदा है, वे एक सप्ताह में उन्हें भूल जाएंगे. इस बीच, पता चला है कि सीपीएम के वरिष्ठ नेता विकास रंजन भट्टाचार्य ने प्रतीक को समझाने की बहुत कोशिश की. सलीम ने भी प्रतीक उर रहमान को फोन किया. प्रतीक उर को आखिरी बार फोन करने वाले वाम मोर्चा के अध्यक्ष बिमान बसु थे. इसके बावजूद, प्रतीक उर तृणमूल के रास्ते पर चलते रहे.
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By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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