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Jharkhand Nikay Chunav 2026: पोस्टल बैलेट की व्यवस्था नहीं, 50,000 पोलिंग स्टाफ वोट से वंचित!

Updated at : 22 Feb 2026 9:23 PM (IST)
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Jharkhand Nikay Chunav 2026

Jharkhand Nikay Chunav 2026

Jharkhand Nikay Chunav 2026: झारखंड नगर निकाय चुनाव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. सोमवार को राज्यभर में शहर की सरकार के लिए वोटिंग होगी. हालांकि, मतदानकर्मी वोट नहीं कर पाएंगे, क्योंकि इस बार पोस्टल बैलेट की व्यवस्था नहीं की गई है. ऐसा खुद मतदानकर्मी बता रहे हैं.

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Jharkhand Nikay Chunav 2026: झारखंड निकाय चुनाव 2026 को लेकर सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. रविवार को सभी बूथों पर पोलिंग स्टाफ को भेज दिया गया है. इसी बीच एक गंभीर और चौंकाने वाला मुद्दा सामने आया है. प्रभात खबर की टीम ने एक खुलासा किया है कि इस बार पोस्टल बैलेट की व्यवस्था नहीं होने से राज्यभर के करीब 50,000 मतदानकर्मी अपना वोट नहीं डाल पाएंगे. प्रभात खबर के वीडियो में एक मतदानकर्मी यह कहते सुना जा सकता है कि नगर निगम क्षेत्रों में करीब 20000 वोट नहीं डाले जा सकेंगे, क्योंकि वे वोट पोस्टल बैलेट से डाले जाते. इसी मतदानकर्मी ने खुलासा किया कि इस बार नगर निकाय चुनाव में मतदान ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के लिए पोस्टल बैलेट (Postal Ballot) की कोई व्यवस्था नहीं की गई है. इससे हजारों मतदान कर्मी अपने संवैधानिक वोट के अधिकार से वंचित हो सकते हैं.

राम लखन सिंह कॉलेज से उठा सवाल

वीडियो में रांची स्थित राम लखन सिंह कॉलेज में मौजूद मतदानकर्मियों से बातचीत की गई है. यहां मतदान कर्मी और ट्रेनर मौजूद हैं. इसी दौरान कर्मियों ने अपनी पीड़ा जाहिर की कि वे कल मतदान तो करवाएंगे, लेकिन खुद वोट नहीं डाल पाएंगे. रांची यूनिवर्सिटी के कर्मचारी एक मतदानकर्मी अमित कुमार बताते हैं कि यह उनका सातवां या आठवां चुनाव है. इससे पहले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उन्हें हमेशा पोस्टल बैलेट की सुविधा दी गई थी. अमित कहते हैं, ‘चुनाव तो चुनाव होता है. अगर हम खुद मतदान ड्यूटी पर हैं तो हमारी जगह वोट कौन देगा.’ उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान भी यह सवाल उठाया गया, लेकिन अधिकारियों ने साफ कह दिया कि इस बार कोई प्रावधान नहीं है.

हजारों वोटों का सवाल

मतदानकर्मी की बात में अगर पूरी सच्चाई है कि तो राज्यभर में नगर निकाय चुनाव में लगे करीब 50,000 मतदानकर्मी अपने वोट का इस्तेमाल करने से वंचित रह जाएंगे. नगर निकाय चुनावों में अक्सर जीत-हार का अंतर बहुत कम होता है. कभी-कभी सिर्फ 10–20 वोट से हार-जीत तय होती है. ऐसे में हजारों वोटरों का बाहर होना चुनाव परिणामों को प्रभावित करने वाला साबित हो सकता है. आमतौर पर मतगणना के दिन पोस्टल बैलेट की गिनती सबसे पहले होती है और यह मतदान कर्मियों का संवैधानिक अधिकार माना जाता है. कर्मियों का कहना है कि सरकार उन्हें चुनाव संपन्न कराने का दायित्व तो दे रही है, लेकिन बदले में उन्हें उनके मौलिक अधिकार से दूर रखा जा रहा है.

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AmleshNandan Sinha

लेखक के बारे में

By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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