पिता की मौत से चंद सेकेंड पहले निकले थे मोजतबा खामेनेई, किस्मत से बची ईरान के सुप्रीम लीडर की जान

Updated at : 17 Mar 2026 8:51 AM (IST)
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Mojtaba Khamenei dodged death Stepped Outside house Before Attack that killed His Father

मोजतबा खामेनेई. फोटो- एक्स.

Iran Mojtaba KhameneI: ईरान के मौजूदा सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अपनी मौत को चंद सेकेंड से चकमा दिया. वह 28 फरवरी को जिस हमले में उनके पिता की मौत हुई, उस दिन वह भी वहां थे, लेकिन कुछ देर पहले ही वह गार्डेन में टहलने निकल गए थे.

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Iran Mojtaba KhameneI: ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की मौजूदा हालत के बारे में कई तरह की खबरें सामने आ रही हैं. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वह बुरी तरह घायल हैं, कुछ में कहा गया कि उनका इलाज रूस के अस्पताल में हो रहा है. उन्हें उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान का सर्वोच्च नेता घोषित किया गया. अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को इजरायल-अमेरिका के अटैक में मौत हो गई थी. अब एक रिपोर्ट सामने आई है कि मोजतबा भी उस अटैक के दौरान उसी परिसर में मौजूद थे, लेकिन मिसाइल हमले से चंद सेकेंड पहले ही बाहर निकल गए और अपनी मौत को चकमा दिया. 

ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ के हवाले से दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई एक घातक मिसाइल हमले में बाल-बाल बच गए, वह भी महज कुछ सेकंड के फर्क से. रिपोर्ट के मुताबिक, जिस वक्त अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमले में तेहरान स्थित सुप्रीम लीडर परिसर को निशाना बनाया गया, उस समय मोजतबा अपने आवास के भीतर नहीं थे. बताया जाता है कि वह किसी छोटे से काम के चलते बाहर बगीचे में चले गए थे. ठीक उसी दौरान मिसाइलें इमारत पर आ गिरीं.

यह हमला इतना सटीक और घातक बताया गया है कि उसी परिसर में मौजूद उनके पिता, उनकी पत्नी, बेटे और साले की मौत हो गई. ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए.

लीक ऑडियो में खुलासा

द टेलीग्राफ के हाथ लगी ऑडियो  रिकॉर्डिंग इस रिपोर्ट का आधार है. इसमें अली खामेनेई दफ्तर के प्रोटोकॉल प्रमुख मजहर हुसैनी हमले के घटनाक्रम का विवरण देते सुनाई देते हैं. हुसैनी ने यह बयान वरिष्ठ मौलवियों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कमांडरों को दिए एक संबोधन में दिया.

हुसैनी के अनुसार, ‘यह खुदा की मर्जी थी कि मोजतबा किसी काम से आंगन में चले गए… और तभी इमारत पर मिसाइल गिर गई.’ उनके मुताबिक, मोजतबा उस वक्त वापस इमारत की ओर लौट रहे थे और ऊपर जा रहे थे, तभी हमला हुआ. यानी कुछ सेकंड की देरी ने उनकी जान बचा ली. हुसैनी ने बताया कि इस हमले में मोजतबा खामेनेई को सिर्फ पैर में मामूली चोट आई.

तीन मिसाइलें, एक ही निशाना

ऑडियो के हवाले से कहा गया है कि हमले में कम से कम तीन बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ. एक मिसाइल उस हिस्से पर गिरी जहां अली खामेनेई मौजूद थे. दूसरी मोजतबा के आवासीय हिस्से पर और तीसरी उसी परिसर में स्थित अन्य परिवारिक आवासों पर. उनके अनुसार, हमले की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई शव पहचान के लायक भी नहीं बचे.

तबाही का भयावह मंजर

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के सैन्य तंत्र से जुड़े अहम चेहरे भी इस हमले की चपेट में आ गए. इनमें सैन्य ब्यूरो प्रमुख मोहम्मद शिराजी का नाम भी शामिल है. हुसैनी के हवाले से कहा गया कि उनका शरीर पूरी तरह चिथड़े-चिथड़े हो गया था और पहचान केवल कुछ किलो अवशेषों के आधार पर ही हो पाई. इसी तरह, मोजतबा के साले मिस्बाह अल-हुदा बाघेरी कानी भी इस हमले में मारे गए. दावा है कि मिसाइल का असर इतना जबरदस्त था कि उनका सिर धड़ से अलग हो गया.

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मोजतबा की हालत रहस्य बनी हुई

28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू हुआ, लेकिन इसके बाद से मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं. 8 मार्च को उन्हें सुप्रीम लीडर बनाया गया और 13 मार्च को उनकी ओर से केवल एक संदेश ईरानी सरकारी टीवी पर प्रसारित हुआ, जिसमें उन्होंने शहीदों के खून का बदला लेने की बात कही. यही वजह है कि उनकी वास्तविक स्थिति को लेकर अटकलें लगातार तेज हो रही हैं कि क्या वह मामूली रूप से घायल हैं या गंभीर रूप से?

अमेरिका भी अनिश्चित

इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी साफ कहा कि वॉशिंगटन के पास मोजतबा की हालत को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा, हमने उन्हें देखा नहीं है… हमें नहीं पता कि वह जिंदा हैं या नहीं. वहीं, कुवैत के एक अखबार ने दावा किया कि मोजतबा का इलाज रूस के एक अस्पताल में चल रहा है. 

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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