हम मर रहे, आप किस तरफ हैं… ईरानी विदेश मंत्री ने इस्लामिक दुनिया से पूछे 6 सवाल

Updated at : 17 Mar 2026 8:06 AM (IST)
विज्ञापन
Whose Side Are You in Iran War Iranian FM releases 6 Point Letter to Islamic World

अली लारिजानी. फोटो- एक्स

Iran War Iranian FM 6 Point Letter: ईरान के वरिष्ठ नेता अली लारिजानी ने इस्लामिक दुनिया के नाम पर 6 पॉइंट का लेटर जारी किया है. इसमें इन सरकारों से पूछा है कि अगर तुम किसी मुसलमान की पुकार का जवाब नहीं देते, तो तुम मुसलमान नहीं हो. यह किस प्रकार का इस्लाम है?

विज्ञापन

Iran War Iranian FM 6 Point Letter: ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध में जान-माल की भारी तबाही हो रही है. अब तक इस वॉर में 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें से अकेले ईरान में 1440 से ज्यादा मौतें हुई हैं. ऑयल रिजर्व और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी अमेरिका और इजरायल के मिसाइल और ड्रोन बरसे, जिससे आम जनता को काफी नुकसान हो रहा है. हालांकि, ऐसा नहीं है कि ईरान चुप है, वह भी अपनी क्षमता में उसी तरह जवाब दे रहा है. अब ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी ने ‘दुनिया के मुसलमानों’ के नाम एक पत्र लिखा है. उन्होंने इसमें मुसलमानों और इस्लामिक मुल्कों से 6 सवालों के जवाब मांगे हैं. 

लारिजानी का पत्र भारत में ईरानी दूतावास ने एक्स पर पोस्ट किया. इसमें युद्ध के विवरण पर ज्यादा चर्चा नहीं की गई है, बल्कि इस्लामी सरकारों का व्यवहार पर बात की गई है. लारिजानी के अनुसार, ईरान पर अमेरिकी-जायोनी धुरी द्वारा एक धोखेभरा आक्रमण किया गया, जो उस समय शुरू हुआ जब बातचीत अभी जारी थी. उन्होंने कहा कि ईरान की सहायता कोई नहीं कर रहा, अगर ऐसा है, तो यह कैसा इस्लाम है. उनका यह पत्र आंशिक रूप से फटकार, धार्मिक आलोचना और कुछ हद तक रणनीतिक अपील के तौर पर देखा जा रहा है.

सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव ने लिखा, ‘अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है. दुनिया के मुसलमानों और इस्लामी देशों की सरकारों के नाम.’

1. ईरान पर उस समय अमेरिकी-जायोनी (इजरायल) धुरी द्वारा एक छलपूर्ण आक्रमण किया गया, जब बातचीत अभी जारी थी. इस आक्रमण का उद्देश्य ईरान को तोड़ना था. उन्होंने इस्लामी क्रांति के महान और आत्मबलिदानी नेता को शहीद कर दिया, साथ ही कई आम नागरिकों और सैन्य कमांडरों की भी हत्या कर दी. इसके परिणामस्वरूप उन्हें ईरानी जनता के राष्ट्रीय और इस्लामी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा.

2. आप जानते हैं कि कुछ दुर्लभ मामलों को छोड़कर, और वह भी केवल राजनीतिक स्तर पर किसी भी इस्लामी सरकार ने ईरानी राष्ट्र की सहायता नहीं की. इसके बावजूद, ईरानी जनता ने दृढ़ संकल्प के साथ दुष्ट दुश्मन को इस तरह दबा दिया कि आज वह इस रणनीतिक गतिरोध से बाहर निकलने का रास्ता नहीं जानता.

3. ईरान बड़े और छोटे शैतानों (अमेरिका और इजरायल) के खिलाफ प्रतिरोध के मार्ग पर आगे बढ़ता रहेगा. लेकिन क्या इस्लामी सरकारों का व्यवहार पैगंबर के उस कथन के विपरीत नहीं है, जिसमें कहा गया है, ‘अगर तुम किसी मुसलमान की पुकार का जवाब नहीं देते, तो तुम मुसलमान नहीं हो.’ यह किस प्रकार का इस्लाम है?

4. कुछ देश तो इससे भी आगे बढ़ गए हैं और उन्होंने कहा है कि क्योंकि ईरान ने उनके देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और अमेरिका-इजरायल के हितों को निशाना बनाया, इसलिए ईरान उनका दुश्मन बन गया है. क्या ईरान चुप बैठा रहे जबकि आपके देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों से उस पर हमले किए जाएं? ये केवल बहाने हैं. आज के इस टकराव में एक तरफ अमेरिका और इजरायल हैं और दूसरी तरफ मुस्लिम ईरान तथा प्रतिरोध की ताकतें. आप किस पक्ष में हैं?

5. इस्लामी दुनिया के भविष्य के बारे में सोचिए. आप अच्छी तरह जानते हैं कि अमेरिका कभी आपका वफादार नहीं होगा और इजरायल आपका दुश्मन है. अपने बारे में और क्षेत्र के भविष्य के बारे में थोड़ा सोचिए. ईरान आपके कल्याण की कामना करता है और आप पर प्रभुत्व जमाने का उसका कोई इरादा नहीं है.

6. पूरी ताकत के साथ इस्लामी उम्मा (मुस्लिम समुदाय) की एकता सभी देशों के लिए सुरक्षा, प्रगति और स्वतंत्रता सुनिश्चित कर सकती है.

यानी, लारिजानी ने अंत में इस्लामी उम्मा (मुस्लिम समुदाय) की एकता को सुरक्षा की गारंटी बताता. उन्होंने कहा कि अगर इस्लामी सरकारें वॉशिंगटन और तेल अवीव के साथ समझौते की बजाय एकजुटता को चुनें, तो सभी देशों के लिए स्वतंत्रता और प्रगति सुनिश्चित हो सकती है.

US-इजरायल ने ईरान की लीडरशिप समाप्त कर दी

ईरान के ऊपर 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने साझा अटैक किया. इसमें देश के तत्कालीन सुप्रीम लीडर अली खामनेई समेत कई शीर्ष सैन्य लीडरशिप की मौत हो गई. ईरान के ऊपर इसके बाद से कई अटैक हुए हैं, जिनमें अन्य नेताओं की भी मौत हो गई. ईरान ने अली खामेनेई की मौत के बाद, उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर घोषित किया है, लेकिन उनके बारे में अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी सामने नहीं आई है. 

ये भी पढ़ें:- मौत की अफवाहों के बीच सामने आए नेतन्याहू, जारी किया नया वीडियो

ये भी पढ़ें:- अफगान तालिबान का आरोप: काबुल के अस्पताल पर पाकिस्तान का हमला, 400 लोगों की मौत

अमेरिका हर प्रयास कर रहा- युद्ध समाप्त हो

वहीं, दूसरी ओर अमेरिका ने मोजतबा समेत 10 नेताओं पर बाउंटी घोषित कर दिया है. इसमें अली लारिजानी भी शामिल हैं. ईरान के प्रतिरोध में ये नेता पर्दे के पीछे से अहम योगदान दे रहे हैं. ऐसे में अमेरिका हर संभव प्रयास कर रहा है कि वह जल्द से जल्द यह युद्ध समाप्त कर सके. लेकिन ईरान ने इस युद्ध को मिडिल ईस्ट के अन्य देशों तक फैलाकर वैश्विक व्यवस्था में ही समस्या पैदा कर दी है. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को चोक करके. 

ईरान ने कहा कि वह मिडिल ईस्ट के युद्ध को ‘जहां तक जरूरी होगा’ वहां तक ले जाने के लिए तैयार है. इसी दौरान उसने पूरे क्षेत्र में हमले भी किए. अमेरिका हरसंभव प्रयास कर रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट खुलवाया जा सके, लेकिन उनके सहयोगी देशों ने महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलने के लिए ट्रंप की मदद की अपील को ठुकरा दिया.

विज्ञापन
Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola