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इंडियन ओशन पर ट्रंप: भारत से 1800 किमी दूर इस द्वीप पर निशाना, कहा- यूके का यह फैसला बेवकूफी भरा, जानें पूरा मामला

Updated at : 20 Jan 2026 4:43 PM (IST)
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Donald Trump slams UK Mauritius Chagos deal eyes on Diego Garcia Indian Ocean dominated by India.

डिएगो गार्सिया को लेकर मॉरीशस और यूके के बीच हुई डील पर ट्रंप ने लगाई लताड़.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड के बाद अब हिंद महासागर पर नजर डाल रहे हैं. उन्होंने कहा कि यूके का मॉरीशस के साथ डील करना बेवकूफी भरा फैसला है. उन्होंने डिएगो गार्सिया के बारे में टिप्पणी की है, जो भारत से 2000 किमी से भी कम दूरी पर है.

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला, ईरान और ग्रीनलैंड के बाद अब इंडियन ओशन का रुख किया है.  इस बार मुद्दा था डिएगो गार्सिया द्वीप. मंगलवार को ट्रंप ने कहा कि ब्रिटेन का यह फैसला, जिसमें वह चागोस आईलैंड में मौजूद डिएगो गार्सिया की संप्रभुता (Sovereignty) मॉरीशस को सौंप दे, यह पूरी तरह कमजोरी दिखाने वाला कदम है. ट्रंप ने साफ कहा कि ऐसे फैसले ही यह साबित करते हैं कि ग्रीनलैंड को हासिल करना अमेरिका के लिए क्यों जरूरी है. उनके मुताबिक यह सीधा-सीधा अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है.

डिएगो गार्सिया द्वीप हिंद महासागर में है. यहां पर अमेरिका और ब्रिटेन का एक बहुत अहम सैन्य हवाई अड्डा मौजूद है. इस अड्डे की रणनीतिक अहमियत काफी ज्यादा मानी जाती है. पिछले साल ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच एक समझौता हुआ था. इस समझौते के तहत चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को दी जानी है, लेकिन ब्रिटेन को लंबे समय के पट्टे पर डिएगो गार्सिया के एयर बेस को चलाने की इजाजत मिलेगी. यह भारत के सदर्न पॉइंट से केवल 1800 किमी दूर है. 

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, मारीशस डिएगो गार्सिया को 99 साल के लिए लीज पर देगा, जिसे अगले 40 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है. इसके बदले ब्रिटेन मॉरीशस को 100 मिलियन पाउंड देगा. दिलचस्प बात यह है कि जब मई में इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, तब अमेरिकी सरकार ने भी इसका समर्थन किया था. उस वक्त अमेरिका ने कहा था कि वह इस समझौते का स्वागत करता है और इससे साझा सैन्य अड्डे का लंबे समय तक सुरक्षित संचालन संभव होगा. इस समझौते को करवाने में भारत ने अहम भूमिका निभाई थी. यह संधि फिलहाल ब्रिटिश संसद में मंजूरी की प्रक्रिया में है. 

ट्रंप ने क्या कहा?

हालांकि, अब अमेरिका, लेकिन खासकर ट्रंप का रुख बिल्कुल बदल गया है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “हैरानी की बात है कि हमारा ‘बेहद समझदार’ नाटो सहयोगी ब्रिटेन, डिएगो गार्सिया जैसे अहम द्वीप को, जहां अमेरिका का बेहद जरूरी सैन्य अड्डा है, मॉरीशस को देने जा रहा है. वह भी बिना किसी वजह के.” उन्होंने आगे कहा कि चीन और रूस ने ब्रिटेन के इस कदम को जरूर नोट किया होगा और वे इसे कमजोरी के तौर पर देख रहे होंगे.

उन्होंने आगे कहा कि ये ऐसी अंतरराष्ट्रीय ताकतें हैं जो सिर्फ ताकत को ही समझती हैं. इसी वजह से उनके नेतृत्व में अमेरिका आज, सिर्फ एक साल में, पहले से कहीं ज्यादा सम्मानित हो गया है. ट्रंप ने कहा, “ब्रिटेन का इतनी अहम जमीन को छोड़ देना बहुत बड़ी मूर्खता है. यह उन कई राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों में से एक है, जिनकी वजह से ग्रीनलैंड को हासिल करना जरूरी है. डेनमार्क और उसके यूरोपीय सहयोगियों को सही कदम उठाना होगा.”

भारत के खिलाफ इस आईलैंड को इस्तेमाल करने की कोशिश कर चुका है यूएस

वैसे, ट्रंप ने अपने बयान के दौरान भारत का जिक्र नहीं किया, जबकि हिंद महासागर में भारत के बड़े सुरक्षा हित हैं, खासकर चीन को लेकर. भारत ने पर्दे के पीछे ब्रिटेन को प्रोत्साहित किया कि वह डिएगो गार्सिया की संप्रभुता मॉरीशस को लौटाए, जो इसका असली मालिक है. ब्रिटेन 1965 से इसे ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी (BIOT) के तहत संचालित करता रहा है. डिएगो गार्सिया का सैन्य महत्व इतिहास में भी बड़ा रहा है. 

1971 के बांग्लादेश युद्ध में अमेरिका ने यहां नौसैनिक ताकत तैनात की थी, लेकिन भारत ने अपने दबदबे से युद्ध जीतकर बांग्लादेश को आजाद कराया. इसके बाद अमेरिका ने इस द्वीप को बड़े रणनीतिक केंद्र के रूप में विकसित करना शुरू किया. आज भी भारत हिंद महासागर में सैन्य गतिविधियों पर सतर्क है, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर. भारत मॉरीशस को 680 मिलियन डॉलर का आर्थिक और सुरक्षा पैकेज दे रहा है, जिसमें चागोस मरीन प्रोटेक्टेड एरिया का विकास, सैटेलाइट स्टेशन और समुद्री सर्वे शामिल हैं.

ब्रिटेन बोला- सुलझाएंगे मामला

उधर, ब्रिटेन के वरिष्ठ मंत्री डैरेन जोन्स ने ट्रंप के बयान का जवाब दिया. उन्होंने मंगलवार को कहा कि यह समझौता सैन्य अड्डे के लिए सबसे बेहतर विकल्प है और इससे यह अड्डा अगले 100 साल तक काम करता रह सकेगा. डैरेन जोन्स ने टाइम्स रेडियो से कहा, “इस संधि पर पहले ही दस्तखत हो चुके हैं और अब इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता.” उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन अब अपने कूटनीतिक असर का इस्तेमाल करेगा और प्रधानमंत्री के अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ रिश्तों के ज़रिये ब्रिटेन के हितों की रक्षा की जाएगी.

ट्रंप ने मुद्दे को टाल दिया था

ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच हुआ यह समझौता जनवरी 2025 में ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद कुछ समय के लिए टाल दिया गया था. इसकी वजह यह थी कि ब्रिटेन चाहता था कि नई अमेरिकी सरकार इस योजना को अच्छे से समझ ले और उसकी जांच कर ले. अब ट्रंप के नए बयानों से यह साफ हो गया है कि डिएगो गार्सिया और ग्रीनलैंड दोनों ही मुद्दे आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विवाद बन सकते हैं.

हाल के दिनों में ग्रीनलैंड और अब डिएगो गार्सिया को लेकर ट्रंप के बयानों से अमेरिका और ब्रिटेन के रिश्तों में तनाव आ गया है. ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि चीन और रूस की बढ़ती मौजूदगी की वजह से ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद अहम है. वह यह भी साफ कर चुके हैं कि ग्रीनलैंड के मामले में वह पूरे मालिकाना हक से कम कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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