क्या है नीतीश मॉडल, जिसने कल्याणबीघा के ‘मुन्ना’ को बिहार में बनाया जनता का ऑल टाइम फेवरेट?
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 20 Nov 2025 1:03 PM
नीतीश कुमार ने 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली
Nitish Kumar Bihar CM : बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के 10वीं बार शपथ लेने को अगर आप सिर्फ एक राजनीतिक घटना मानते हैं, तो ठहरिए आप गलती कर रहे हैं. यह सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं है, यह शपथग्रहण इस बात का पुख्ता सबूत है कि समाज और सत्ता के बीच बदलते संबंधों के बावजूद एक नेता अपनी नीतियों और छवि की वजह से रेलेवेंट या प्रासंगिक रह सकता है और ऑल टाइम फेवरेट बना रह सकता है.
Nitish Kumar Bihar CM : कल्याणबीघा का ‘मुन्ना’ यानी नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं. इस शपथ के साथ ही नीतीश कुमार पूरे देश में रिकॉर्ड बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले राजनेता बन गए हैं. यह तो बात हुई रिकॉर्ड की, लेकिन नीतीश कुमार बिहार के ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्हें लेकर स्वीकार्यता जनता में तो है ही, राजनीतिक दल भी एकमत हो जाते हैं. आखिर नीतीश कुमार के नेतृत्व में ऐसी क्या बात है?
हर गठबंधन में फिट कैसे हो जाते हैं नीतीश कुमार?

नीतीश कुमार की खासियत यह है कि वे बिहार की राजनीति की जरूरत बन गए हैं. वे हर गठबंधन में रहकर सरकार चला चुके हैं और किसी भी सरकार में उनकी ईमानदारी और विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठे हैं. नीतीश कुमार इस तरह की राजनीति करते हैं कि वो हर खांचे में फिट हैं. उन्होंने प्रदेश के विकास का मॉडल तैयार किया है, जिसपर जनता का भरोसा है. यह भरोसा इतना पुख्ता है कि सरकार में चाहे वो किसी भी गठबंधन के साथ हों,सीएम की कुर्सी उनके लिए सुरक्षित रखती है. नीतीश कुमार ने महागठबंधन के साथ भी सरकार चलाई है और एनडीए के साथ भी, लेकिन उनकी नीतियां नहीं बदलती हैं.
| # | मुख्यमंत्री | राज्य | मुख्यमंत्री पद की शपथ | कुल मुख्यमंत्री कार्यकाल (लगभग) |
|---|---|---|---|---|
| 1 | नीतीश कुमार | बिहार | 10 बार | लगभग 19 साल (2000, 2005–2014, 2015–2020, 2020–2025, 2025– ) |
| 2 | पवन कुमार चामलिंग | सिक्किम | 5 बार | लगभग 24 साल (1994–2019) |
| 3 | नवीन पटनायक | ओडिशा | 5 बार | लगभग 24 साल (2000–2024) |
| 4 | ज्योति बसु | पश्चिम बंगाल | 5 बार | लगभग 23 साल (1977–2000) |
| 5 | वीरभद्र सिंह | हिमाचल प्रदेश | 6 बार (विभिन्न कार्यकाल) | लगभग 21 साल (विभिन्न कार्यकालों में) |
क्या है ‘नीतीश मॉडल’ जो उन्हें बनाता है ऑल टाइम फेवरेट?
नीतीश कुमार की सबसे बड़ी खूबी है उनकी स्वच्छ और स्वस्थ छवि. इस वजह से जनता उन्हें पसंद करती है. बात अगर उनके कार्यों की करें, तो हमें यह समझना होगा कि उन्होंने जब सत्ता संभाली थी, तब बिहार की क्या स्थिति थी. इसकी वजह यह है कि उस स्थिति ने भी नीतीश कुमार को ऑल टाइम फेवरेट बनाने में अहम भूमिका निभाई है. 1990 का दौर बिहार में जंगल राज का पर्याय था. प्रदेश का विकास रूका पड़ा था और अपराध, अव्यवस्था और जातीय संघर्ष का दौर जारी था. कमजोर प्रशासन में जनता का दम घुट रहा था. ऐसे में जनता के सामने उम्मीद की किरण बनकर उभरे नीतीश कुमार. नीतीश कुमार ने सबसे पहले अव्यवस्था को मिटाना शुरू किया और सुशासन का मॉडल पेश किया. सुशासन के इसी मॉडल ने उन्हें ‘सुशासन बाबू’ का निकनेम दिया है. उन्होंने सबसे पहले तीन चीजों पर फोकस किया.
- कानून व्यवस्था में सुधार
- इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार
- शिक्षा और समाज में सुधार
प्रभात खबर के पॉलिटिकल एडिटर मिथिलेश कुमार बताते हैं कि नीतीश कुमार अगर आज ऑल टाइम फेवरेट बन गए हैं, तो उसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि अबतक उनपर कोई सीधा आरोप नहीं लगा है. इससे उनकी छवि बहुत साफ-सुथरी और मजबूत है. उन्होंने शराबबंदी, महिला आरक्षण, स्वास्थ्य सेवा में सुधार जैसे कुछ कार्य किए, जिसकी वजह से उनके खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी नहीं है. इसके साथ ही उन्हें बिहार में मौजूद जंगलराज के परसेप्शन का भी फायदा मिलता है. आम जनता जंगलराज की यादों से इतना डरी हुई है कि वो बिलकुल भी नहीं चाहती है कि उन्हें वह दौर दोबारा देखना पड़े. नीतीश कुमार ने सुशासन की मिसाल कायम की है, इसलिए जनता उनके साथ है. सड़क, अस्पताल, आरक्षण, योजनाओं का लाभ ये कुछ ऐसी चीजें हैं, जिन्होंने नीतीश को शासन में बनाए रखा है.
राजनीतिक दल भी नीतीश कुमार के नाम पर कैसे हो जाते हैं एकमत?

नीतीश कुमार पहली बार 2000 में 7 दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने थे. उस वक्त वे एनडीए के साथ थे और एनडीए को 151 सीटें मिलीं थीं, जबकि लालू यादव को 159 सीटें. दोनों ही गठबंधन के पास बहुमत नहीं था. उस वक्त बिहार और झारखंड एक राज्य थे. बहुमत नहीं जुटा पाने के बाद नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा सौंप दिया था. उसके बाद वे 2005 में फिर मुख्यमंत्री बने और गठबंधन एनडीए का ही था, लेकिन 2015 में वो महागठबंधन के साथ रहे. 2022 में भी वो महागठबंधन के साथ थे. सफर और लंबा है, लेकिन कुल सार यह है कि दोनों गठबंधन ने उन्हें स्वीकार किया.
| वर्ष / अवधि | राजनीतिक गठबंधन | क्या हुआ / स्थिति |
|---|---|---|
| 2000 (पहला कार्यकाल) | NDA (BJP–JD(U)) | पहली बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने के कारण सिर्फ 7 दिन में इस्तीफ़ा देना पड़ा |
| 2005 | NDA | बहुमत के साथ पहली बार स्थायी मुख्यमंत्री बने |
| 2010–2013 | NDA | NDA के साथ दूसरा लगातार कार्यकाल; मोदी के PM चेहरे को लेकर मतभेद बढ़ने लगे |
| 2013 | NDA से अलग | JD(U) ने मोदी की घोषणा का विरोध करते हुए NDA छोड़ा |
| 2015 | महागठबंधन (RJD–Congress–JD(U)) | RJD–Congress के साथ भारी जीत; महागठबंधन सरकार बनी |
| 2017 | फिर NDA में वापसी | तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार मामले के बाद महागठबंधन तोड़ा और BJP–NDA में लौट आए |
| 2022 | फिर महागठबंधन में वापसी | BJP पर पार्टी तोड़ने की कोशिश का आरोप लगाते हुए NDA छोड़ा और RJD–Congress–Left के साथ नई सरकार बनाई |
| 2024–25 | फिर NDA में वापसी | महागठबंधन से फिर नाराज़ होकर BJP–NDA में लौटे और 10वीं बार मुख्यमंत्री बने |
मिथिलेश कुमार बताते हैं कि राजनीतिक दलों में उनकी स्वीकार्यता सबसे अधिक उनकी छवि को लेकर है. वे एक विजन वाले नेता है, जो प्रदेश को सुशासन और विकास दे सकते हैं. जनता के बीच उनकी अच्छी स्वीकार्यता है, जिसकी वजह से राजनीतिक दल भी उन्हें अपने साथ रखना चाहते हैं. इसके साथ ही उनके साथ कुर्मी और धानुक जाति का जो वोटबैंक है, वो उसी तरह जाता है जहां नीतीश होते हैं. यह भी एक बड़ी वजह है कि राजनेता नीतीश कुमार के नाम पर एकमत हो जाते हैं. महागठबंधन में लालू यादव को एक और फायदा नीतीश कुमार की वजह से होता है, वो यह है कि लालू यादव बिहार की राजनीति में अपने बेटों को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते हैं. लालू के बेटे जब नीतीश कुमार के साथ होते हैं, तो उनके बीच उम्र का जो फासला है, वो उन्हें राजनीति की अच्छी स्कूलिंग देता है. नीतीश कुमार एक मैच्योर नेता हैं, बस इस वजह से भी लालू यादव, नीतीश के साथ जोड़ी बना लेते हैं.
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क्या नीतीश कुमार का कार्यकाल मुख्यमंत्री के रूप में देश में सबसे अधिक है?
नहीं. नीतीश कुमार 10 बार शपथ भले लिए हैं, लेकिन उनका कार्यकाल 19 साल और कुछ महीनों का ही है. देश में सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक हैं. इन दोनों ने 24 साल तक मुख्यमंत्री पद को संभाला है.
नीतीश कुमार की पत्नी का क्या नाम था?
नीतीश कुमार की पत्नी का नाम मंजू सिन्हा था. उनकी मौत 2007 में हो गई है.
नीतीश कुमार के कितने बच्चे हैं?
नीतीश कुमार का एक बेटा है. उनका नाम निशांत कुमार है.
क्या नीतीश कुमार इंजीनियर थे?
हां नीतीश कुमार इंजीनियर थे और उन्होंने एनआईटी पहना से पढ़ाई की है.
नीतीश कुमार अभी किस पार्टी में हैं?
नीतीश कुमार जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. पहले वे समता पार्टी में रहे हैं, जिसकी स्थापना उन्होंने जाॅर्ज फर्नांडिस के साथ की थी.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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