Smart TV में 60Hz, 120Hz और 144Hz का क्या मतलब है? जानिए आपके लिए कौन सा सही

Published by : Ankit Anand Updated At : 05 Apr 2026 2:43 PM

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स्मार्ट टीवी और सामने खड़ा शख्स सोच में (Photo: Canva)

Smart TV में 60Hz, 120Hz और 144Hz दरअसल स्क्रीन की स्मूथनेस तय करते हैं. जितना ज्यादा रिफ्रेश रेट होगा, उतना बेहतर मोशन और क्लैरिटी मिलेगी. मूवी देखने वालों के लिए 120Hz काफी है, लेकिन अगर आप गेमिंग करते हैं, तो 144Hz आपको ज्यादा स्मूद एक्सपीरियंस देता है.

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Smart TV Refresh Rate: आज के समय में TV टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से बदल रही है कि कब क्या नया आ जाए, पता ही नहीं चलता. कभी CRT और Plasma TV हुआ करते थे, फिर उनकी जगह LCD TVs ने ली. उसके बाद Mini-LED और QLED TVs आए, और अब OLED, QD-OLED जैसे एडवांस ऑप्शन भी मार्केट में मौजूद हैं. इतना ही नहीं, अब तो Micro RGB TVs की भी एंट्री हो चुकी है. 

लेकिन बदलाव सिर्फ स्क्रीन (पैनल) तक ही सीमित नहीं है. TV के रिफ्रेश रेट में भी काफी अपग्रेड देखने को मिला है. पहले 60Hz नॉर्मल था, फिर 120Hz TVs आए और अब 144Hz TVs भी तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं. अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये 120Hz और 144Hz का मतलब क्या होता है? और क्या इन दोनों के बीच वाकई कोई बड़ा फर्क है, या ये सिर्फ मार्केटिंग का खेल है? आइए समझते हैं इससे

60Hz, 120Hz, और 144Hz क्या हैं?

अगर आप TV या मॉनिटर खरीदते समय 60Hz, 120Hz या 144Hz जैसे नंबर देखते हैं, तो ये दरअसल रिफ्रेश रेट (refresh rate) को दिखाते हैं. आसान शब्दों में समझें तो, स्क्रीन एक सेकंड में कितनी बार अपने आप को अपडेट करती है बस उसी को रिफ्रेश रेट कहते हैं. इसे आप सीधे आंखों से नहीं देख पाते, लेकिन फर्क जरूर महसूस होता है. जितना ज्यादा रिफ्रेश रेट, उतनी स्मूथ और फ्लूइड विजुअल्स.

क्या हैं इसके फायदे?

अब बात करते हैं इसके फायदों की. जब आप कोई फास्ट एक्शन सीन या स्पोर्ट्स देख रहे होते हैं, तब हाई रिफ्रेश रेट वाला टीवी आपको ज्यादा क्लियर और शार्प मोशन दिखाता है. इसके अलावा, ये जडर (judder) नाम की समस्या को भी कम करता है. जडर तब होता है जब वीडियो के फ्रेम्स और टीवी के रिफ्रेश रेट में तालमेल नहीं बैठता. इसे ठीक करने के लिए टीवी एक ही फ्रेम को कई बार दिखाता है. जैसे 24 FPS की मूवी को 120Hz स्क्रीन पर स्मूथ बनाने के लिए हर फ्रेम को 5 बार दिखाया जा सकता है.

आपके लिए कौन सा सही?

बता दें कि असली मजा हाई रिफ्रेश रेट का तब आता है जब आप गेमिंग करते हैं. अगर आपका कंसोल या PC ज्यादा फ्रेम्स निकाल सकता है, तो 120Hz या 144Hz टीवी उन फ्रेम्स का पूरा फायदा उठाता है. इससे गेमिंग एक्सपीरियंस और भी स्मूथ हो जाता है.

हर किसी के लिए 144Hz जरूरी नहीं होता है. अगर आप सिर्फ मूवीज और नॉर्मल टीवी देखते हैं, तो 120Hz भी काफी है. लेकिन अगर आप गेमिंग के शौकीन हैं, तो 144Hz आपके लिए एक बेहतर अपग्रेड रहेगा.

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

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