नोटबंदी के बाद भी नहीं थम रहा तस्करी का सिलसिला

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Nov 2016 1:07 AM

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सिलीगुड़ी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केवल काला धन, भ्रष्ट्राचार, कालाबाजारियों पर नकेल कसने के लिए ही नोटबंदी का फैसला नहीं किया है बल्कि देश को आर्थिक रूप से खोखला बना रही हर तरह की तस्करी(जाली नोट, प्रतिबंधित मादक पदार्थ, सोने के बिस्कुट आदि) पर भी पूरी तरह लगाम लगाने के लिए ही पुराने पांच सौ […]

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सिलीगुड़ी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केवल काला धन, भ्रष्ट्राचार, कालाबाजारियों पर नकेल कसने के लिए ही नोटबंदी का फैसला नहीं किया है बल्कि देश को आर्थिक रूप से खोखला बना रही हर तरह की तस्करी(जाली नोट, प्रतिबंधित मादक पदार्थ, सोने के बिस्कुट आदि) पर भी पूरी तरह लगाम लगाने के लिए ही पुराने पांच सौ और हजार के नोट पर पाबंदी लगायी है. मोदी सरकार के इस एतिहासिक फैसले के दो सप्ताह बीत जाने के बावजूद तस्करी नहीं रूक रही है.
प्रतिबंधित मादक पदार्थों (कफ सीरप, चरस, गांजा, हेरोइन आदि)व जाली नोटों की जमकर तस्करी हो रही है. सिलीगुड़ी मेट्रॉपोलिटन पुलिस की खुफिया विंग (डीडी) ने बीती रात को गुप्त सूचना के आधार पर प्रतिबंधित कफ सीरफ की दो हजार बोतलों के साथ दो तस्करों को दबोच कर कई अहम राज का खुलासा किया है. साथ ही पुलिस अधिकारी भी नोटबंदी के बावजूद तस्करी न थमने को लेकर गहरी चिंता जता रहे हैं.

डीडी के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सुनिल यादव ने बताया कि प्रधाननगर इलाके के रहनेवाले अरूण सिंह को देशबंधुपाड़ा के गोपाल मोड़ से बीती रात को दो हजार के कफ सीरप के बोतलों के साथ गिरफ्तार किया गया. यह सभी बोतलें प्रतिबंधित दवा फैंसिडिल है. जिनकी कीमत एक लाख रूपये से भी अधिक है. श्री यादव ने बताया कि इसका सेवन लोग नशा के लिए करते हैं. अरूण प्रतिबंधित मादक दवा का जखीरा कोलकाता से रेलमार्ग से कल रात को ही न्यू जलपाइगुड़ी (एनजेपी) पहुंचा. उसे एनजेपी से सिलीगुड़ी शहर जाने के क्रम में गोपाल मोड़ पर दबोच लिया गया. पूछताछ में उसने जुर्म कबूल किया और दवाओं की इन बोतलों को सिलीगुड़ी जंक्शन इलाके में नागेंद्र राय नामक एक व्यक्ति को देने की बात उसने पुलिस को बतायी. जिसके आधार पर रात में ही पुलिस ने सिलीगुड़ी जंक्शन इलाके से नागेंद्र राय को भी पकड़ लिया. श्री यादव ने बताया कि इनकी योजना इन कफ सीरप की बोतलों को सिलीगुड़ी, असम के रास्ते बांग्लादेश तस्करी करने की थी.

दोनों को शुक्रवार को पुलिस ने सिलीगुड़ी कोर्ट में पेश किया जहां से दोनों को मामले की गहन तफ्तीश के लिए पुलिस रिमांड पर लिया गया है. दूसरी ओर नोटबंदी के फैसले की तारीख के बाद के दिनों पर गौर करें तो उत्तर बंगाल के मालदा जिला क्षेत्र से मात्र दो सप्ताह में लाखों रूपये के जाली नोट बरामद हुए है और जाली नोट के तस्करी के आरोप में कई गिरफ्तार भी हुए हैं. एक ताजा मामला में बुधवार की रात बंगाल पुलिस ने मालदा जिले के कालियाचक थाना के नया ग्राम से 50 हजार रूपये के जाली नोट के साथ हजरूल शेख नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया. पुलिस ने इसके पास हजार रूपये के सभी जाली नोट बरामद किये. सप्ताह भर पहले भी मालदा जिले इलाके से ही पांच सौ और हजार के जाली नोट के साथ कई तस्कर गिरफ्तार हुए.

वहीं, सप्ताह भर पहले नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआइए) की टीम ने खुफिया सूचना के आधार पर भारत-नेपाल सीमांत के पानीटंकी बीओपी पर सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के साथ मुहिम चलाकर मेची ब्रीज से एक करोड़ से भी अधिक कीमत की हशीस के साथ नेपाल के ही एक तस्कर को गिरफ्तार किया था. वहीं, तीन दिन पहले मंगलवार को भी एसएसबी के 41 बटालियन के कमांडेंट डीके सिंह की अगुवायी में सिलीगुड़ी से सटे सालुगाड़ा इलाके में छापामारी अभियान चलायी गयी, इस दौरान एक संदिग्ध घर से 13 किलो गांजा के साथ सुरेंद्र सिंह नामक एक तस्कर को दबोच लिया गया. बरामद गांजा की कीमत तकरीबन साढ़े आठ लाख रूपये आंकी गयी.

तस्करी के इन सभी मामलों पर गौर किया जाये तो एक समानता नजर आती है. सभी मामले उत्तर बंगाल से सटे अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्जीय सीमाओं के आस-पास के इलाके से जुड़े हैं. मालदा जिला बांग्लादेश से काफी नजदीक है. बांग्लादेश से जाली नोटों व अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की गैर-कानूनी तरीके से तस्करी होती है. मालदा जिले का कालियाचक इलाका इन गोरखधंधों के लिए सबसे बड़ा गढ़ माना जाता है.

पानीटंकी नेपाल बोर्डर से सटा है. यहां से प्रतिबंधित मादक पदार्थ, सोना के बिस्कुट, नेपाली सुपारी आदि की सिलीगुड़ी, बागडोगरा एयरपोर्ट, असम के रास्ते म्यांमार, चीन, हांगकांग आदि देशों में तस्करी अब आम बात हो गयी है. साथ ही तस्करों ने तस्करी के लिए सिलीगुड़ी को सबसे सुरक्षित ट्रांजिट प्वाइंट बना लिया है. इसकी वजह उत्तर बंगाल का दूसरा सबसे प्रमुख शहर के अलावा सिलीगुड़ी को पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार माना जाता है. साथ ही इसकी भौगलिक संरचना भी ऐसी है कि यह शहर पड़ोसी राज्यों बिहार, सिक्किम, असम के अंतरराजीय सीमा के अलावा नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, चीन अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से भी काफी नजदीक है. इसके अलावा सिलीगुड़ी से कहीं भी जाने के लिए हर तरह की यात्रा (हवाइ, रेल व सड़क) की सुविधा है.

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