उत्तर बंगाल का ‘किंगमेकर’ कौन? 40 सीटों पर राजबंशी वोटों के लिए TMC और BJP में आर-पार की जंग

Published by :Mithilesh Jha
Published at :22 Apr 2026 12:46 PM (IST)
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Assembly Election 2026 North Bengal West Bengal Election 2026

Assembly Election 2026 North Bengal: बंगाल चुनाव में राजबंशी वोट बैंक को लेकर टीएमसी और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर है. उत्तर बंगाल का किंगमेकर माने जाने वाले इस समुदाय को लुभाने के लिए दोनों दलों ने झोंकी ताकत.

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Assembly Election 2026 North Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण की वोटिंग से पहले उत्तर बंगाल की सियासत गरम है. इस बार लड़ाई केवल विकास की नहीं, बल्कि उस ‘राजबंशी’ समुदाय का दिल जीतने की है, जो उत्तर बंगाल की कम से कम 30 से 40 सीटों पर हार-जीत तय करने की ताकत रखता है.

टीएमसी के राजबंशी कार्ड ने बढ़ायी भाजपा की चिंता

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपनी पकड़ बनाये रखने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ‘राजबंशी कार्ड’ खेलकर भगवा खेमे की चिंता बढ़ा दी है. उत्तर बंगाल का यह किला किसके पास रहेगा, इसका फैसला इस बार राजबंशी समुदाय के हाथ में है.

क्यों है राजबंशी समुदाय पर दोनों दलों का फोकस?

उत्तर बंगाल के कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, उत्तर दिनाजपुर और दार्जिलिंग जिलों में राजबंशी समुदाय की आबादी निर्णायक भूमिका में है. इस समुदाय का प्रभाव उत्तर बंगाल की लगभग आधी विधानसभा सीटों पर है.

  • भाजपा का मजबूत गढ़ : वर्ष 2019 के लोकसभा और 2021 के विधानसभा चुनाव में राजबंशी समुदाय का बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ खड़ा था. यही वजह है कि भाजपा ने इस क्षेत्र में क्लीन स्वीप जैसा प्रदर्शन किया था.
  • TMC की वापसी की कोशिश : ममता बनर्जी इस बार समुदाय के सांस्कृतिक गौरव और विकास योजनाओं के जरिये खोयी हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही हैं.

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ममता का ‘सांस्कृतिक दांव’ बनाम भाजपा का ‘पहचान कार्ड’

दोनों ही दलों ने इस समुदाय को लुभाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. तृणमूल कांग्रेस ने राजबंशी भाषा को मान्यता देने, अलग अकादमी बनाने और समुदाय के महापुरुषों के सम्मान में कई घोषणाएं की हैं. कूचबिहार की रैलियों में वह लगातार केंद्र पर समुदाय की उपेक्षा का आरोप लगा रही हैं.

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Assembly Election 2026 North Bengal: भाजपा भी कर रही घेराबंदी

भाजपा ने ‘नारायणी सेना’ और राजबंशी रेजिमेंट की मांग को लेकर समुदाय की भावनाओं को सहलाया है. साथ ही, निशीथ प्रमाणिक जैसे युवा राजबंशी चेहरे को आगे करके भाजपा ने अपनी पकड़ मजबूत रखने का प्रयास किया है.

अधूरे वादे और नाराजगी से बदलेगा समीकरण?

समुदाय के भीतर कुछ मुद्दों को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है. अलग राज्य की मांग और पहचान के मुद्दे अभी भी पूरी तरह सुलझे नहीं हैं. रोजगार और शिक्षा के अवसर राजबंशी युवाओं के लिए सबसे बड़ा सवाल हैं. नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर समुदाय में मिली-जुली प्रतिक्रिया है, जिसका फायदा दोनों दल अपने-अपने तरीके से उठाने की कोशिश कर रहे हैं.

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2026 में किसका पलड़ा भारी?

उत्तर बंगाल के इस ‘पावर गेम’ में राजबंशी समुदाय जिस तरफ झुकेगा, बंगाल की सत्ता की राह उसी के लिए आसान होगी. फिलहाल, भाजपा अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती से जूझ रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ‘मिशन उत्तर बंगाल’ के तहत सेंधमारी करने में जुटी है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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