अमित शाह का मिशन बंगाल और बूथ विजय का मास्टरप्लान : 2021 की गलतियों से लिया सबक, अब ‘दीदी ओ दीदी’ नहीं, पन्ना प्रमुखों पर भरोसा

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BJP West Bengal Strategy 2026: बंगाल चुनाव 2026 में भाजपा ने बदली अपनी चाल. अमित शाह के वार-रूम से लेकर पन्ना प्रमुखों की सक्रियता तक, जानें कैसे भाजपा 3-5 प्रतिशत वोट स्विंग के जरिये ममता बनर्जी को मात देने की तैयारी में है.
खास बातें
BJP West Bengal Strategy 2026: बंगाल चुनाव 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है. 2021 की हार और व्यक्तिगत हमलों के ‘बैकफायर’ होने के बाद, इस बार अमित शाह ने खुद कमान संभालते हुए बंगाल के सियासी समर को ‘बूथ लेवल’ तक तोड़ दिया है.
हर बूथ पर 10-15 नये वोटर जोड़ने का प्लान
शोर-शराबे वाली रैलियों से ज्यादा ध्यान अब एक-एक बूथ पर 10-15 नये वोटर जोड़ने पर है. इस बार भाजपा का लक्ष्य केवल भाषण देना नहीं, बल्कि उन 60 सीटों को जीतना है, जहां पिछले चुनाव में हार का अंतर 5,000 से 10,000 वोटों से कम था.
शाह का वार-रूम : 294 सीटों का डेटा और 40-50 सीटों का खेल
अमित शाह पिछले कुछ दिनों से लगातार बंगाल आ रहे हैं. वह यहां एक आधुनिक ‘वार-रूम’ चला रहे हैं.
- माइक्रो मैनेजमेंट : हर विधानसभा में 250-300 बूथ होते हैं. शाह का स्पष्ट निर्देश है कि अगर हर बूथ पर 10 अतिरिक्त वोटर जुड़ते हैं, तो प्रति सीट 3,000 वोटों का इजाफा होगा. यही वो जादुई आंकड़ा है, जो बंगाल की सत्ता की चाबी भाजपा को दिला सकता है.
- टारगेट सीटें : भाजपा ने 100-120 ‘जीतने वाली’ और 80-100 ‘मुकाबले वाली’ सीटों की पहचान की है. लक्ष्य 135-160 सीटों तक पहुंचना है, जबकि बहुमत के लिए 148 का आंकड़ा चाहिए.
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बदला हुआ अंदाज : व्यक्तिगत हमलों पर पूरी तरह रोक
वर्ष 2021 के बंगाल चुनाव में ‘दीदी ओ दीदी’ जैसे नारों ने ममता बनर्जी को सहानुभूति बटोरने का मौका दिया था. इस बार भाजपा ने अपनी भाषा बदल ली है.
- मुद्दों पर फोकस : अब हमला सीधे तौर पर भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की विफलताओं पर है.
- स्थानीय चेहरे : इस बार फिल्मी सितारों और दलबदलुओं की बजाय उन स्थानीय नेताओं को टिकट दिया गया है, जिनकी जमीनी पकड़ मजबूत है.
- आरजी कर मुद्दा : कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना को भाजपा ने बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया है. यहां तक कि पीड़ित डॉक्टर की मां को उत्तर 24 परगना के पानीहाटी से मैदान में उतार दिया है.
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क्षेत्रीय रणनीति : उत्तर बंगाल से दक्षिण बंगाल तक घेराबंदी
भाजपा ने बंगाल को अलग-अलग जोन में बांटकर बड़े नेताओं को तैनात किया है.
- उत्तर बंगाल और जंगलमहल : राजबंशी समाज, चाय बागान श्रमिक और आदिवासी वोट बैंक पर नजर है. भाजपा को उम्मीद है कि 2-3 प्रतिशत का वोट स्विंग यहां की सीटों के नतीजों को पूरी तरह बदल देगा.
- बॉर्डर और मतुआ समाज : सीमावर्ती जिलों में नागरिकता और अधिकारों के मुद्दे पर मतुआ समुदाय के बीच ‘सॉफ्ट मैसेजिंग’ की जा रही है.
- दक्षिण बंगाल की चुनौती : भाजपा को 2021 में वोट तो मिले थे, पर सीटें नहीं मिलीं. अब व्यापारियों और मध्यम वर्ग के बीच ‘डोर टू डोर’ कैंपेन चलाया जा रहा है.
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BJP West Bengal Strategy 2026: सफारी रेनबो और अल्पसंख्यक फैक्टर
भाजपा का गेमप्लान दोतरफा है. पहला- हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण (OBC, SC, ST को जोड़कर) और दूसरा- अल्पसंख्यक वोटों का बिखराव. भाजपा को उम्मीद है कि कांग्रेस, वामपंथी दल और आईएसएफ मिलकर टीएमसी के अल्पसंख्यक वोट बैंक में सेंध लगायेंगे, जिसका सीधा फायदा भगवा खेमे को होगा.
कुल मिलाकर, भाजपा 2026 में 2021 वाली आक्रामकता के बजाय एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम कर रही है, जहां जीत का रास्ता बड़ी रैलियों से नहीं, बल्कि पन्ना प्रमुखों के जरिये बूथों से होकर गुजरता है.
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By मिथिलेश झा
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