नोटबंदी: किसानों को लोन देने का काम रूका
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Nov 2016 1:34 AM
मालदा. नोटबंदी के बाद मालदा जिले में किसानों को कृषि लोन देने का काम बंद हो गया है. इसकी वजह से न केवल आम किसान, बल्कि मालदा जिला सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक के अधिकारी भी परेशान हैं. वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान किसानों को 90 करोड़ रुपये का लोन दिया गया था. वर्तमान वित्तीय वर्ष में […]
सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा था. आठ नवंबर को केन्द्र सरकार द्वारा नोटबंदी की घोषणा के बाद सबकुछ पटरी से उतर गया है. जिले में सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक अधीन कुल 171 किसान कॉपरेटिव समितियां चल रही हैं. इन्हीं समितियों के माध्यम से किसानों को सीधे लोन दिया जाता है. आठ नवंबर से इन समितियों ने काम करना बंद कर दिया है. हरिश्चन्द्रपुर-1 ब्लॉक के बहुतल कॉपरेटिव कृषि विकास समिति के सचिव जमील अख्तर ने बताया है कि सिर्फ इसी समिति में सदस्यों की संख्या तीन हजार से ऊपर है.
समिति के पास 57 लाख रुपये पड़े हुए हैं. खुदरा पैसा नहीं होने की वजह से किसानों को लोन देने का काम बंद है. इसके अलावा समिति के गोदाम में खाद एवं बीज भी है, लेकिन उसे खरीदने के लिए कोई किसान नहीं आ रहा है. किसानों के पास भी पैसे नहीं हैं. खेती-बाड़ी का काम पूरी तरह से बंद है. यही स्थिति रही तो गोदामों में पड़े बीज तथा खाद नष्ट हो जायेंगे. हरिश्चन्द्रपुर बहुतल कॉपरेटिव कृषि विकास समिति के पास भी सात लाख रुपये मूल्य के खाद पड़े हुए हैं. पांच लाख रुपये मूल्य का बीज भी है. पैसे के अभाव में किसान खाद-बीज नहीं खरीद पा रहे हैं.
ऐसा सबकुछ रबी फसल के समय हो रहा है. आम तौर पर किसान नवंबर से ही खाद एवं बीज खरीद कर रबी फसल की खेती शुरू कर देते हैं. हटात् नोटबंदी से किसानों के सर पर हाथ है. गाजोल, बारडांगा कृषि कॉपरेटिव समिति के सचिव बरेन विश्वास ने कहा है कि स्थिति काफी खराब है. आलू एवं बोरो धान की खेती नहीं हो पायेगी. नाबार्ड से अनुमोदित सिड विलेज भी इस कॉपरेटिव समिति के अधीन है. सिड के पास 20 लाख रुपये के बीज हैं. कोई खरीदने वाला नहीं है. 10 लाख रुपये का खाद भी पड़ा हुआ है. इस समिति के अधीन 2000 से भी अधिक किसान हैं. यह लोग सीधे कृषि लोन लेकर अपनी खेती करते हैं. नोटबंदी के बाद इस समिति के पास 41 लाख रुपये के 1000 तथा 500 रुपये के नोट पड़े हुए हैं. इस संबंध में मालदा जिला सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक के सीईओ अमिय राय ने बताया है कि नवंबर का महीना रबी फसल का है.
इसी महीने किसान आलू के साथ बोरो धान, सब्जी आदि की खेती करते हैं. कृषि कॉपरेटिव समितियों से इसके लिए किसान लोन भी लेते हैं. नगदी के अभाव में फिलहाल खेती पूरी तरह से बंद है. पैसे देने के मामले में किसानों के साथ रोज कहा-सुनी होती है. वह लोग चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं. यदि इस साल रबी की खेती नहीं हुई, तो ग्रामीण इलाकों में अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित होगा. राज्य सरकार को पूरे मामले की जानकारी दे दी गई है. 14 नवंबर को आरबीआइ द्वारा जारी नये सर्कुलर के बाद कॉपरेटिव बैंकों ने 1000 तथा 500 के पुराने नोट जमा लेना भी बंद कर दिया है. इन बैंकों के पास अभी भी करीब 100 करोड़ रुपये के 1000 तथा 500 के नोट पड़े हुए हैं. ऐसा नहीं है कि बैंकों के पास पैसा नहीं है. इन नोटों को बंद कर दिये जाने की वजह से ही इतनी बड़ी समस्या पैदा हो गई है.
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