210 बच्चे पर तीन शिक्षक

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Nov 2016 5:55 AM

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सरकारी जूनियर स्कूल का हाल बेहाल चपरासी और क्लर्क की भी नहीं हुई है नियुक्ति बालुरघाट : करीब तीन वर्षों से भी अधिक समय से शिक्षकों की नियुक्त नहीं होने से सरकारी स्कूलों की हालत खराब है.खासकर जुनियर हाइ स्कूलों की हालत तो काफी खराब है.दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर उत्तर चक्र दोमुठा फरीदपुर जुनियर […]

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सरकारी जूनियर स्कूल का हाल बेहाल
चपरासी और क्लर्क की भी नहीं हुई है नियुक्ति
बालुरघाट : करीब तीन वर्षों से भी अधिक समय से शिक्षकों की नियुक्त नहीं होने से सरकारी स्कूलों की हालत खराब है.खासकर जुनियर हाइ स्कूलों की हालत तो काफी खराब है.दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर उत्तर चक्र दोमुठा फरीदपुर जुनियर हाइ स्कूल भी उन्हीं स्कूलों में शुमार है.यहां पांचवीं से लेकर आठवीं तक की पढ़ाइ होती है.यहां कुल छात्र-छात्राओं की संख्या 210 है. जबकि शिक्षक और शिक्षिकाओं की संख्या मात्र तीन ही है.
इनमें से भी एक शिक्षक प्रधानाध्यापक है.यहां ना तो ग्रुप डी का कोइ कर्मचारी है और ना ही कोइ कर्ल्क.इसके परिणाम स्वरूप यहां का पठन पाठन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है.अब इस स्कूल को माध्यमिक स्कूल में बदलने की भी तैयारी की जा रही है.इसको देखकर यहां के प्रधान शिक्षक देवाशीष गंगापुत्र खासे आतंकित हैं.प्राप्त जानकारी के अनुसार इस स्कूल की स्थापना वर्ष 2008 में हुयी थी.पहले यहां एक ही शिक्षक थे. साल 2010 में यहां तीन स्थायी शिक्षकों की नियुक्त हुयी.बाद में जो पहले शिक्षक थे वह रिटायर हो गये.
उसके बाद से यहां तीन ही शिक्षक बचे हुए है. यही तीनों 210 बच्चों को पढ़ाते हैं.प्रधान शिक्षक श्री गंगापुत्र ने बताया कि शिक्षको की कमी तो है ही साथ ही गैर शिक्षक कर्मचारी भी नहीं है. मिड डे मील के हिसाब किताब से लेकर बच्चो को अन्य सरकारी सुविधाएं देने,खाता-पत्र निबटाने आदि की जिम्मेदारी भी वही लोग निभा रहे हैं.शिक्षिका पपी सरकार ने बताया कि तीन में से यदि कोइ एक किसी दिन किसी कारण से स्कूल नहीं आया तो हालत और भी खराब हो जाती है.नियमानुसार तीस बच्चों पर एक शिक्षक की व्यवस्था होनी चाहिए.
यहां तो 200 से अधिक बच्चों पर तीन शिक्षक ही हैं.इसके अलावा इस स्कूल में बाउंडरी वाल भी नहीं है. बाहरी बदमाशों का यहां अड‍्डा लगता है. पास ही एक तालाब है. बरसात में तालाब के लबालब भरे रहने से बच्चों के खेल-खेल में उसमें गिर जाने की भी संभावना होती है.इधर,जिला स्कूल निरीक्षक दीपंकर राय का कहना है कि इन समस्याओं की जानकारी उन्हें है.लेकिन वह कुछ नहीं कर सकते. स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति एसएससी से होती है.
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