विश्वभारती में पहली बार ‘फ्री एंट्री’ नोटिस, बवाल

Published by : AMIT KUMAR Updated At : 29 Jan 2026 9:38 PM

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शांतिनिकेतन स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय विश्वभारती के इतिहास में पहली बार ऐसी अधिसूचना जारी हुई है, जिसे लेकर हंगामे के आसार पैदा हो गये हैं.

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बोलपुर.

शांतिनिकेतन स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय विश्वभारती के इतिहास में पहली बार ऐसी अधिसूचना जारी हुई है, जिसे लेकर हंगामे के आसार पैदा हो गये हैं. विश्वभारती के रवींद्र भवन संग्रहालय और आश्रम परिसर में निःशुल्क प्रवेश पर एक अधिसूचना जारी की गयी है, जिसे लेकर विवाद पैदा होता दिख रहा है. मिली जानकारी के मुताबिक इस अधिसूचना में देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर आसीन महानुभावों के नाम शामिल किये जाने से विश्वविद्यालय प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया है. विश्वभारती के कार्यकारी सचिव के हवाले से जारी अधिसूचना में लिखा गया है कि 106 अति विशिष्टजनों को रवींद्र भवन संग्रहालय और विश्वभारती परिसर में पूर्ण निःशुल्क प्रवेश की अनुमति होगी.

इस सूची में राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम शामिल किये गये हैं. यह अधिसूचना कुलपति प्रबीर कुमार घोष की अनुमति से कार्यकारी सचिव विकास मुखोपाध्याय के हस्ताक्षर से जारी हुई है. इसे लेकर परिसर में गरमागरम बहस का दौर चल पड़ा है.

विश्वभारती के कार्यवाहक जनसंपर्क अधिकारी अतिग घोष ने कहा कि यह व्यवस्था संविधान के अंतर्गत आती है और केवल वीवीआईपी के लिए लागू होगी. उल्लेखनीय है कि 17 सितंबर 2023 को यूनेस्को ने विश्वभारती को विश्व धरोहर घोषित किया था. इसके बाद नए पर्यटकों के लिए टिकट व्यवस्था के साथ ‘हेरिटेज वॉक’ शुरू किया गया था.

संवैधानिक पदों की भूमिका पर सवाल

आलोचकों का कहना है कि विश्वभारती अधिनियम 1951 के अनुसार राष्ट्रपति विश्वविद्यालय के निरीक्षक, प्रधानमंत्री आचार्य और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल प्रमुख हैं. ऐसे में कुलपति या सचिव की ओर से उन्हें प्रवेश की अनुमति देने का औचित्य समझ से परे है. केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के कारण विश्वभारती केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन है, फिर भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री का नाम निःशुल्क प्रवेश सूची में शामिल है.

आश्रम निवासी एवं ट्रस्ट की आपत्ति

आश्रमिक यानी आश्रम की निवासी और टैगोर परिवार की सदस्य सुप्रिया टैगोर ने उक्त अधिसूचना को अपमानजनक बताया. आश्रम के एक अन्य निवासी सुब्रत सेन मजूमदार ने कहा कि इससे पहले कभी ऐसा नोटिस नहीं देखा गया. शांतिनिकेतन ट्रस्ट के सचिव अनिल कोनार ने भी अधिसूचना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह संवैधानिक पदों की गरिमा के खिलाफ है. इस पूरे मुद्दे पर विश्वभारती परिसर में शोरगुल व हंगामा शुरू हो गया है.

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