बंगाल में अब फ्री बिजली नहीं, लगेंगे 2 करोड़ स्मार्ट मीटर, 15000 करोड़ वसूलने की तैयारी
Published by : Mithilesh Jha Updated At : 02 Jun 2026 7:07 AM
West Bengal Smart Meters Rollout: पश्चिम बंगाल में जुलाई 2026 से 2 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर योजना शुरू हो रही है. केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और सीएम शुभेंदु अधिकारी की बैठक में टैरिफ बदलने और 15,000 करोड़ का घाटा वसूलने की योजना पर मुहर लगी.
खास बातें
West Bengal Smart Meters Rollout: पश्चिम बंगाल की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने राज्य की चरमरायी बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कड़ा कदम उठाया है. राज्य के करीब 2 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को बहुत जल्द अपने घरों के पुराने मीटर बदलने होंगे. केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की कोलकाता में हुई एक हाई-प्रोफाइल समीक्षा बैठक के बाद राज्य में स्मार्ट मीटरिंग प्रोग्राम को हरी झंडी दे दी गयी है.
बंगाल में बदल जायेगा इलेक्ट्रिक टैरिफ फ्रेमवर्क
जुलाई 2026 से इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत होने जा रही है. इस फैसले के बाद न केवल बिजली चोरी पर लगाम लगेगी, बल्कि सालों से बकाया बिलों की वसूली के साथ-साथ राज्य का पूरा बिजली टैरिफ ढांचा (Tariff Framework) भी पूरी तरह बदल जायेगा.
जुलाई से मिशन मोड में होगा काम
केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर इस योजना को चरणों में लागू करने की रणनीति बनायी है. राज्य ने कहा है कि जून 2026 तक सभी सरकारी दफ्तरों और परिसरों में शत-प्रतिशत स्मार्ट मीटर लगाने का काम पूरा हो जायेगा. सरकारी प्रतिष्ठानों में मीटर लगाने के बाद अगस्त 2026 तक उन्हें पूरी तरह से प्रीपेड मोड में कन्वर्ट कर दिया जायेगा, ताकि सरकारी विभागों का बकाया खत्म हो सके.
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सरकारी दफ्तरों के बाद घरेलू उपभोक्ताओं की बारी
सरकारी दफ्तरों के बाद इस योजना के दायरे में बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को लाया जायेगा. उसके बाद क्रमिक रूप से 2 करोड़ आम घरेलू उपभोक्ताओं के घरों में इसे इंस्टॉल किया जायेगा.
उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों विकल्प
आमतौर पर स्मार्ट मीटर को लेकर जनता में डर रहता है कि उन्हें जबरन प्रीपेड सिस्टम में धकेल दिया जायेगा, लेकिन बंगाल सरकार उपभोक्ताओं को छूट देगी कि वे अपनी सुविधा के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड में से कोई भी एक विकल्प चुन सकते हैं. इस योजना के तहत केंद्र सरकार हर स्मार्ट मीटर पर 900 रुपए की सब्सिडी देगी. यूजर्स को मीटर लगाने के लिए जेब से एकमुश्त पैसे नहीं देने होंगे. उन्हें हर महीने के बिल में सिर्फ 100 रुपए का योगदान देना होगा.
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टैरिफ में बड़ा बदलाव, 15000 करोड़ के घाटे की होगी भरपाई
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की समीक्षा में पश्चिम बंगाल के बिजली क्षेत्र की जो कड़वी हकीकत सामने आयी है, उसने अधिकारियों के होश उड़ा दिये हैं. राज्य में वर्तमान में ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) लॉस करीब 12 फीसदी है, जिसे स्मार्ट मीटर की मदद से सिंगल डिजिट में लाया जायेगा.
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West Bengal Smart Meters Rollout: 2 महीने में तैयार होगा सोर्स एलोकेशन प्लान
पिछले कई वर्षों में कुप्रबंधन के कारण बिजली विभाग का घाटा करीब 15,000 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है. इसे सुधारने के लिए अगले दो महीनों के भीतर एक व्यापक ‘सोर्स एलोकेशन प्लान’ तैयार किया जायेगा. सरकारी विभागों और अन्य बड़े बकायेदारों से करीब 800 करोड़ रुपए के बकाया बिलों की वसूली के लिए सख्त तंत्र बनाया जा रहा है.
पीएम सूर्य घर और कुसुम योजना को मिलेगी रफ्तार
बैठक में सिर्फ मीटर बदलने पर ही नहीं, बल्कि वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया. शुभेंदु अधिकारी सरकार ने केंद्र को भरोसा दिलाया है कि राज्य में ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ और पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) योजना के क्रियान्वयन में तेजी लायी जायेगी, ताकि गरीब और किसानों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा मिल सके.
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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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