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बढ़ती मांग को देखते हुए नयी बिजली नीति लायेगी सरकार

Updated at : 13 May 2025 1:55 AM (IST)
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बढ़ती मांग को देखते हुए नयी बिजली नीति लायेगी सरकार

पश्चिम बंगाल में बिजली की मांग 2034-35 तक लगभग 24,757 मेगावाट तक पहुंच सकती है. केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीइए) की हाल ही में जारी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है.

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राज्य में 2035 तक 24,757 मेगावाट हो सकती है बिजली की मांग

अमर शक्ति, कोलकातापश्चिम बंगाल में बिजली की मांग 2034-35 तक लगभग 24,757 मेगावाट तक पहुंच सकती है. केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीइए) की हाल ही में जारी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. अगले दशक में राज्य में बिजली की मांग लगभग 6,500 मेगावाट बढ़ जायेगी. अब इस उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार की ओर से नयी ‘पश्चिम बंगाल ऊर्जा नीति’ तैयार करने जा रही है. विद्युत विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय एजेंसी के अनुमान के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य में कोयला आधारित विद्युत उत्पादन की कुल अनुबंधित क्षमता 8,244 मेगावाट है, जिसे अगले दशक में बढ़ाकर 14,148 मेगावाट करने का लक्ष्य है. इसका मतलब यह है कि राज्य को अपनी उत्पादन क्षमता में 5,904 मेगावाट की वृद्धि करनी होगी. इसके लिए राज्य सरकार की ओर से चार नयी ताप बिजली उत्पादन केंद्र बनाने की योजना बनायी गयी है. इनमें से 1600 मेगावाट की ‘ग्रीनफील्ड’ परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है. शेष परियोजनाएं अभी प्रारंभिक चरण में हैं. नयी बिजली नीति तैयार करने के लिए ‘स्ट्रैटेजिक प्लानिंग यूनिट’ की स्थापना करेगी सरकार: इसके अतिरिक्त, विद्युत विभाग के अंतर्गत एक ””स्ट्रैटेजिक प्लानिंग यूनिट”” की स्थापना की जायेगी. इसका उद्देश्य राज्य की ऊर्जा सुरक्षा और ऊर्जा परिवर्तन के लिए एक दूरगामी ढांचा तैयार करना है. बताया गया है कि यहां सिर्फ बिजली उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है. राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास में बड़े निवेश की भी जरूरत है. इसलिए सरकार एक नयी ऊर्जा नीति का मसौदा तैयार करने के लिए एक ””स्ट्रैटेजिक प्लानिंग यूनिट”” बनाने का काम कर रही है. साथ ही राज्य सरकार पिछले पांच वर्षों में बिजली क्षेत्र में शुरू की गई विभिन्न परियोजनाओं का पुनर्मूल्यांकन करने, बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के प्रदर्शन की समीक्षा करने और भविष्य की संविदात्मक बिजली खरीद योजनाओं की जांच करने का काम भी कर रही है. हालांकि राज्य प्रशासन का मानना है कि फिलहाल बिजली की मांग और आपूर्ति को लेकर चिंता की कोई बात नहीं है, बल्कि राज्य में मांग से अधिक बिजली का उत्पादन होता है. देवचा पचामी परियोजना से राज्य सरकार को काफी उम्मीद: राज्य सरकार को बीरभूम जिले के देवचा-पचामी परियाेजना से काफी उम्मीदें हैं. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कहा है कि देवचा-पचामी में इतना कोयले का भंडार है कि जिससे यहां स्थित ताप विद्युत उत्पादन यूनिटों को आगामी 100 वर्ष तक कोयला की कमी नहीं होगी. राज्य सरकार का मानना है कि यदि यह परियोजना क्रियान्वित होती है तो भविष्य में राज्य में बिजली की कमी नहीं होगी. लेकिन सबसे पहले एक सुनियोजित ऊर्जा नीति की आवश्यकता है. इसलिए ””स्ट्रैटेजिक प्लानिंग यूनिट”” इस बात की भी समीक्षा करेगा कि राज्य सरकार अल्पावधि, मध्यमावधि और दीर्घावधि में राज्य बिजली की खरीद किस प्रकार करेगा. नीति निर्माता यह सुनिश्चित करने पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे कि राज्य की बिजली प्रणाली आर्थिक रूप से टिकाऊ हो तथा औद्योगिक व वाणिज्यिक क्षेत्रों को सस्ती कीमतों पर बिजली उपलब्ध कराया जा सके.

पर्यावरण अनुकूल बिजली उत्पादन पर विशेष जोर देगी राज्य सरकार

बिजली उत्पादन के क्षेत्र में राज्य सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है. राज्य सरकार की ओर से ””कार्बन बाजार”” के गठन की योजना बनायी गयी है. केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, ऊर्जा विभाग पर्यावरण अनुकूल विद्युत उत्पादन में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में कार्बन बाजार शुरू करने की तैयारी कर रहा है. बिजली विभाग के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, राज्य सरकार इस बात पर विचार किया जा रहा है कि राज्य के बिजली क्षेत्र को वित्तीय रूप से कितना अधिक व्यावहारिक बनाया जा सकता है. राज्य सरकार इस पूरे मुद्दे को लेकर काफी गंभीर है, क्योंकि बिजली का प्रयाेग आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर उद्योगों तक में होता है. इसलिए बिजली क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार की जरूरत है. अगर ऐसा किया जाता है तो सस्ती बिजली सुनिश्चित करना और राज्य के विकास को गति देना संभव हो सकेगा.

एक दशक में बिजली की मांग में 4200 मेगावाट की हुई है वृद्धि

जानकारी के अनुसार, अगर राज्य में बिजली की मांग में वृद्धि का आंकड़ा देखें तो यह पता चलेगा कि पिछले एक दशक में पश्चिम बंगाल में बिजली की मांग में 4200 मेगावाट की वृद्धि हुई है. वर्ष 2016 में पश्चिम बंगाल राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (डब्ल्यूबीएसइडीसीएल) क्षेत्र में बिजली की मांग 5901 मेगावाट थी, जो वर्ष 2024 में 10 हजार मेगावाट का आंकड़ा पार कर गया था. पश्चिम बंगाल में वर्ष 2024 में बिजली की औसतन मांग बढ़ कर 10,040 मेगावाट पर पहुंच गया है. अनुमान है कि 2031-32 तक यहां बिजली की मांग बढ़ कर 20770 मेगावाट व 2034-35 तक बढ़ कर 24757 मेगावाट तक पहुंच जायेगी. मांग के अनुसार उत्पादन बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को इसे मौजूदा 8244 मेगावाट से बढ़ा कर 14148 मेगावाट करना होगा, जिसके लिए राज्य को अपनी उत्पादन क्षमता 5900 मेगावाट बढ़ानी होगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AKHILESH KUMAR SINGH

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