रानीगंज में धंसानग्रस्त क्षेत्र से 300 मीटर के दायरे में घर बनाने पर रोक, जनांदोलन करेगा मंच

Updated at : 07 Jun 2025 9:55 PM (IST)
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रानीगंज में धंसानग्रस्त क्षेत्र से 300 मीटर के दायरे में घर बनाने पर रोक, जनांदोलन करेगा मंच

ऐतिहासिक रानीगंज शहर के कई इलाकों को ‘धंसानग्रस्त क्षेत्र’ घोषित कर घरों के निर्माण पर रोक लगाने के आसनसोल-दुर्गापुर विकास प्राधिकरण (एडीडीए) और आसनसोल नगर निगम के निर्णय से स्थानीय लोगों में भारी रोष देखा जा रहा है. निर्देश है िक धंसानग्रस्त जगह से 300 मीटर के दायरे में कोई घर या आशियाना नहीं बनाया जा सकता.

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रानीगंज.

ऐतिहासिक रानीगंज शहर के कई इलाकों को ‘धंसानग्रस्त क्षेत्र’ घोषित कर घरों के निर्माण पर रोक लगाने के आसनसोल-दुर्गापुर विकास प्राधिकरण (एडीडीए) और आसनसोल नगर निगम के निर्णय से स्थानीय लोगों में भारी रोष देखा जा रहा है. निर्देश है िक धंसानग्रस्त जगह से 300 मीटर के दायरे में कोई घर या आशियाना नहीं बनाया जा सकता. इसके खिलाफ ”रानीगंज बचाओ मंच” ने व्यापक जन आंदोलन करने का आह्वान किया है. आरोप लगाया है कि यह केंद्र सरकार और कोल इंडिया के अधिकारियों की ओर से शहर को खाली करा कर कोयला निकालने की बड़ी साजिश का हिस्सा है.

रानीगंज बचाओ मंच का इल्जाम

””रानीगंज बचाओ मंच”” के संयोजक गौतम घटक और सह-संयोजक डॉ. एस. के. बासु ने एक बयान जारी कर कहा है कि पिछले एक साल से रानीगंज बोरो-2 इलाके में मकान निर्माण की अनुमति नहीं दी जा रही है.जिन लोगों ने भी निर्माण नक्शे जमा किए हैं, उनके आवेदन इस आधार पर खारिज किए जा रहे हैं कि प्रस्तावित स्थान धसान (भूमि धंसाव) प्रभावित क्षेत्र से 300 मीटर के दायरे में आता है. मंच का दावा है कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि बोरो-2 का पूरा इलाका ही निर्माण के लिए अनुपयुक्त घोषित कर दिया गया है.

मंच ने जोर देकर कहा है कि पिछले 100 वर्षों में रानीगंज शहर में किसी बड़े धसान की कोई घटना दर्ज नहीं की गई है.उनका मानना है कि महावीर कोलियरी में अवैज्ञानिक तरीके से कोयला निकालने के कारण शहर को मामूली क्षति हुई थी, लेकिन अगर आसपास के इलाकों में अवैज्ञानिक खनन और अवैध कोलियरी गतिविधियों को रोका जाए, तो रानीगंज शहर में किसी भी दुर्घटना की संभावना नहीं है. कई कोयला विशेषज्ञ भी इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि शहर का अधिकांश क्षेत्र सख्त मिट्टी पर स्थित है, जिससे डरने का कोई कारण नहीं है.

साजिश का आरोप और अतीत के विरोध

””रानीगंज बचाओ मंच”” का आरोप है कि यह केंद्रीय सरकार और कोलियरी अधिकारियों की पुरानी मंशा है कि रानीगंज शहर को धीरे-धीरे खाली कराकर यहां से कोयला निकाला जा सके.उनका मुख्य उद्देश्य ओपन कास्ट माइनिंग के माध्यम से कोयला निकालना है. मंच ने याद दिलाया कि पहले भी रोनाई से रामबागान तक ओसीपी के माध्यम से कोयला निकालने के प्रयास को ””रानीगंज सिटीजन्स फोरम”” और ””रानीगंज चैंबर ऑफ कॉमर्स”” के कड़े विरोध के कारण विफल कर दिया गया था, अब फिर से नए-नए तरीकों से यह “कुचेष्टा ” जारी है. मंच ने राज्य सरकार से इस साजिश के खिलाफ प्रत्यक्ष कार्रवाई न करने पर भी निराशा व्यक्त की है.

कोयला खनन बनाम शहरी विकास

मंच ने स्पष्ट किया है कि वे भूमिगत कोयला खनन या देश के विकास के लिए इस संपत्ति के उपयोग के विरोधी नहीं हैं, हालांकि, वे ओसीपी के माध्यम से कोयला निकालकर आवासीय क्षेत्रों, कारखानों, व्यावसायिक स्थलों और कृषि योग्य भूमि को नष्ट करने के खिलाफ हैं. वे 21वीं सदी में उच्च वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग करके शहर, गांवों और सभी संस्थानों को बचाते हुए कोयला निकालने के पक्ष में हैं.

जन प्रतिनिधियों से अपील और ””रानीगंज बचाओ मंच”” का गठन

इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए ””रानीगंज सिटीजन्स फोरम”” और ””रानीगंज चैंबर ऑफ कॉमर्स”” के प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय सांसद, विधायक, अड्डा के चेयरमैन और जिला शासक से मुलाकात कर विनाशकारी निर्णय को लागू न करने का अनुरोध किया है. हालांकि, ””रानीगंज बचाओ मंच”” का मानना है कि एक व्यापक और वृहत्तर आंदोलन के बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है. इसी उद्देश्य से ””रानीगंज बचाओ मंच”” का गठन किया गया है, जिसका लक्ष्य शहर को उजाड़ने के प्रयासों के खिलाफ जन आंदोलन तैयार करना है. मंच ने सभी नागरिकों से इसकी गतिविधियों में शामिल होने और सहयोग करने का अनुरोध किया है.

इसीएल का खंडन व अफसरों का स्पष्टीकरण

हालांकि, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (इसीएल) के अधिकारियों ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि उनके पास रानीगंज शहर के आसपास ऐसी कोई योजना नहीं है. पूर्ववर्ती रानीगंज नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष और माकपा के पूर्व विधायक रुनु दत्ता ने बताया कि 2005 तक जिला प्रशासन ने निर्देश दिया था कि रानीगंज शहर के पश्चिमी हिस्से में गिरजापाड़ा, एगरा, महावीर कोलियरी, इंद्रप्रस्थ कॉलोनी आदि इलाके भूस्खलन की आशंका वाले हैं और वहां किसी भी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी. नगरपालिका उसी के अनुसार अनुमति भी देती थी. लेकिन अब 300 मीटर तक निर्माण की अनुमति नहीं देने का फैसला सही नहीं है और इससे कई परिवारों को असुविधा होगी.

रानीगंज विधायक और एडीडीए के पूर्व अध्यक्ष तापस बनर्जी ने मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि खनन क्षेत्र में निर्माण कार्य की रूपरेखा खान सुरक्षा महानिदेशक (डीजीएमएस) द्वारा तैयार की जाती है. उनके निर्देश के अनुसार, ऐसे इलाकों के 300 मीटर के भीतर किसी भी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती, जहां जमीन के नीचे कोई खाली जगह है. बनर्जी ने सभी संगठनों से नगर निगम और शहरी विकास विभाग के शीर्ष अधिकारियों से मिलकर मामले की विस्तृत जानकारी देने और फिर डीजीएमएस से चर्चा कर संबंधित आवेदन प्रस्तुत करने का आग्रह किया है.उन्होंने इस तरह की बैठक की व्यवस्था करने का भी आश्वासन दिया है.

रानीगंज के भविष्य को लेकर यह विवाद एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आ गया है, जिसमें स्थानीय निवासियों की आजीविका और शहर के विकास को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं.आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ””रानीगंज बचाओ मंच”” का आंदोलन क्या रंग लाता है और सरकारी एजेंसियां इस जटिल मुद्दे का क्या समाधान निकालती हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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