सांखीर में जल संकट व जंजाल, प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों का मोर्चा

Published by :AMIT KUMAR
Published at :28 Apr 2026 9:45 PM (IST)
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सांखीर में जल संकट व जंजाल, प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों का मोर्चा

जामुड़िया थाने के चुरुलिया फांड़ी क्षेत्र के सांखीर गांव(नामू पाड़ा) में मंगलवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा.

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जामुड़िया.

जामुड़िया थाने के चुरुलिया फांड़ी क्षेत्र के सांखीर गांव(नामू पाड़ा) में मंगलवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा. गांव की जीवनरेखा माने जानेवाले एकमात्र तालाब की बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर स्थानीय लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया. ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदूषण और अवैध जल-दोहन से गांव महामारी की कगार पर है.

कूड़े का डंपिंग यार्ड बना तालाब, फैल रहे रोग

ग्रामीणों ने शिकायत की कि गांव में दैनिक उपयोग के लिए बस एक ही तालाब बचा है. आरोप है कि पास के फास्ट फूड दुकानदार तालाब के किनारों पर कचरे का पहाड़ खड़ा कर रहे हैं.इतना ही नहीं, दुकानों और बाथरूम का गंदा पानी सीधे पाइप के जरिए तालाब में गिराया जा रहा है.ग्रामीणों ने बताया कि तालाब का पानी काला और बदबूदार हो गया है, जिससे चर्म रोग , पेट की बीमारियां और संक्रमण का खतरा बढ़ गया है.भीषण गर्मी में पानी पहले ही कम है, उस पर कुछ किसानों द्वारा ताड़ के पेड़ (पंप) लगाकर सब्जियों की सिंचाई की जा रही है, जिससे जलस्तर तेजी से गिर रहा है.स्थानीय प्रशासन को बार-बार सूचित करने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है.ग्रामीणों ने बताया कि तालाब से इतनी बदबू आ रही है कि किनारे खड़ा होना मुश्किल है. अगर जल्द ही इसे साफ नहीं किया गया और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरा गांव बीमार पड़ जायेगा.

दूसरी ओर, जिन दुकानदारों पर गंदगी फैलाने का आरोप है, उन्होंने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि वे केवल हाथ-मुंह धोने और बर्तन साफ करने का पानी ही तालाब में बहाते हैं.उनका दावा है कि ग्रामीण मामले को बेवजह बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं. हालांकि, तालाब की वर्तमान स्थिति और वहां से उठती दुर्गंध दुकानदारों के दावों पर सवालिया निशान लगा रही है.सांखीर गांव में वर्तमान में पर्यावरण प्रदूषण, पानी की भारी किल्लत और प्रशासनिक लापरवाही का त्रिकोणीय संकट गहरा गया है. ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तुरंत जांच कराकर तालाब का प्रदूषण नहीं रोका गया और पानी की बर्बादी बंद नहीं हुई, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.

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